Dharmendra Pradhan Resignation: केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस घटनाक्रम को जनता की ताकत और लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत बताया। वांगचुक ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संदेश साझा करते हुए कहा कि यह सफलता किसी एक व्यक्ति या संगठन की नहीं, बल्कि देश के युवाओं और आम नागरिकों के साहस, धैर्य और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिणाम है।
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वांगचुक ने जनता और युवाओं को दिया जीत का श्रेय
वांगचुक ने अपने बयान में कहा कि यह लोकतंत्र की जीत है, जो शांतिपूर्ण तरीके और जनता की भागीदारी से हासिल हुई है। उन्होंने इस पूरे संघर्ष को धैर्य, अनुशासन और संकल्प की मिसाल बताया। उनके अनुसार, देशभर के युवाओं और नागरिकों ने जिस तरह अपनी आवाज उठाई, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों की भूमिका को दर्शाता है।
Gen Z और नागरिकों के साहस की सराहना
उन्होंने आंदोलन में शामिल युवाओं और नागरिकों की प्रशंसा करते हुए कहा कि देश की नई पीढ़ी ने डर को पीछे छोड़कर अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के लिए आवाज बुलंद की। वांगचुक ने विशेष रूप से जेनरेशन जेड यानी Gen Z के युवाओं और नागरिक समाज के प्रयासों को सराहा। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों से लोगों का एकजुट होकर सामने आना लोकतंत्र की मजबूती का संकेत है।
अब सुधारों की ओर बढ़ने का समय’
हालांकि, सोनम वांगचुक ने यह भी स्पष्ट किया कि यह संघर्ष का अंतिम पड़ाव नहीं है। उनके मुताबिक, यह केवल एक नए चरण की शुरुआत है। उन्होंने अपने संदेश में आगे की दिशा तय करते हुए कहा कि अब ध्यान जवाबदेही सुनिश्चित करने और आवश्यक सुधारों को लागू कराने पर होना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि जनता की भागीदारी और संस्थागत सुधारों की मांग आगे भी जारी रहेगी।
26 दिनों के अनशन के बाद खत्म हुआ आंदोलन
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक ने हाल ही में 26 दिनों तक लंबा अनशन किया था। इसके बाद शुक्रवार को उन्होंने अपना उपवास समाप्त किया। गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने उन्हें जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया था। इस दौरान सरकार की ओर से उन्हें कई आश्वासन दिए गए थे।
अनशन खत्म करने का फैसला
सरकार ने यह भरोसा दिलाया था कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसी आश्वासन के बाद वांगचुक ने अपना अनशन खत्म करने का फैसला लिया।
जवाबदेही और सुधारों को लेकर आगे की रणनीति
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर वांगचुक ने कहा कि जनता की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने शांतिपूर्ण संघर्ष को लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि आगे की लड़ाई व्यवस्था में सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए होगी।
आंदोलन की सफलता को बताया नई शुरुआत
उनका संदेश साफ था कि किसी भी आंदोलन की सफलता केवल एक फैसले तक सीमित नहीं होती, बल्कि उससे जुड़े व्यापक बदलावों की दिशा में आगे बढ़ना जरूरी होता है। वांगचुक ने नागरिकों से इसी भावना के साथ आगे बढ़ने की अपील की और कहा कि अब अगला लक्ष्य सुधारों की ओर बढ़ना है।










