Gorakhpur News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार (28 सितंबर) को गोरखनाथ मंदिर में आयोजित एक श्रद्धांजलि सभा के दौरान विपक्ष और सनातन विरोधी ताकतों पर जमकर निशाना साधा। गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ महाराज की 57वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ महाराज की 12वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में चल रहे साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह के तहत सीएम योगी ने महंत दिग्विजयनाथ की पुण्यतिथि पर आयोजित सभा को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने अयोध्या के विकास, सनातन संस्कृति की महत्ता और आज के दौर के ‘कालनेमियों’ से सावधान रहने की बात कही।
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“अयोध्या का वैभव और विकास रामद्रोहियों को नहीं आ रहा रास”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में वर्ष 1949 में अयोध्या स्थित श्री रामजन्मभूमि पर रामलला के प्रकटीकरण को श्रीराम मंदिर निर्माण का ऐतिहासिक पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि आज जब अयोध्या में भगवान श्रीराम की भव्य जन्मभूमि पर अलौकिक मंदिर का निर्माण हो चुका है और चारों तरफ विकास की गंगा बह रही है, तो सनातन और रामविरोधी ताकतों को यह वैभव बर्दाश्त नहीं हो रहा है। उन्होंने जनता को आगाह करते हुए कहा कि आज के दौर में भी कई ‘कालनेमि’ सक्रिय हैं, जो सनातन धर्म के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे हैं और समाज में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। रामायण काल में जिस प्रकार कालनेमि ने हनुमान जी का रास्ता रोकने का छद्म प्रयास किया था, उसी तरह आज के सनातनद्रोहियों से सभी रामभक्तों को बेहद सतर्क और जागरूक रहने की आवश्यकता है।
सनातन की बढ़ती भव्यता से जलते हैं विरोधी, एक साथ आगे बढ़ने की अपील

सीएम योगी ने अयोध्या के भव्य मंदिर के साथ-साथ काशी में बाबा विश्वनाथ धाम, विंध्याचल में मां विंध्यवासिनी धाम के वैभव, प्रयागराज के दिव्य कुंभ और वृंदावन के वैष्णव कुंभ के आयोजनों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों की दिव्यता को देखकर सनातन संस्कृति से चिढ़ने वाले लोग तरह-तरह के भ्रम पैदा करेंगे। उन्होंने 2019 के प्रयागराज कुंभ और उसके बाद वृंदावन के वैष्णव कुंभ का जिक्र करते हुए कहा कि कोरोना काल जैसी महाआपदा में भी बांके बिहारी लाल और राधारानी की कृपा से इन आयोजनों पर कोई आंच नहीं आई, जो आध्यात्मिक शक्ति का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को साकार करने के लिए देश के 140 करोड़ नागरिकों को एक स्वर, एक भाव और एक गति से आगे बढ़ना होगा। अलग-अलग स्वरों में बोलना या अलग गति से चलना अंततः दुर्गति का कारण बनता है।
गोरक्षपीठ और संतों के महान योगदान का स्मरण
शैक्षणिक और सामाजिक सुधारों पर चर्चा करते हुए सीएम योगी ने कहा कि गोरक्षपीठ किसी भी पंथ, संप्रदाय या जाति में कोई भेदभाव नहीं करती, बल्कि यह संपूर्ण सनातन के लिए समर्पित है। उन्होंने ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए कहा कि जब देश गुलाम था और संसाधनों की भारी कमी थी, तब उन्होंने ‘महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद’ की स्थापना की थी। उन्होंने बालिकाओं की शिक्षा और संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए उस दौर में महाविद्यालयों की स्थापना कर भविष्य की मजबूत नींव रखी थी। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने गोरखनाथ संस्कृत विद्यापीठ के पूर्व प्राचार्य डॉ. रामनरेश पांडेय द्वारा रचित पुस्तक ‘श्री हनुमत्कथापूजनम’ का औपचारिक विमोचन भी किया।
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