Dharmendra Pradhan Resign: नीट (NEET) परीक्षा में सामने आए पेपर लीक मामलों और उसके बाद देश भर में भड़के भारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच शनिवार, 25 जुलाई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। पिछले कई हफ्तों से लगातार प्रदर्शन कर रहे छात्रों और विपक्षी दलों द्वारा उनके इस्तीफे की मांग की जा रही थी। आखिरकार बढ़ते राजनीतिक और सामाजिक दबाव के आगे झुकते हुए उन्होंने अपना त्यागपत्र सौंप दिया है, जिसके बाद से देश की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है और इस कदम को छात्र आंदोलन की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार की तीखी प्रतिक्रिया
बताते चले कि, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आते ही कांग्रेस पार्टी के आक्रामक तेवर देखने को मिले हैं। कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए एक नया और तीखा राजनीतिक नारा बुलंद किया है। उन्होंने लिखा, “अभी तो ली अंगड़ाई है, आगे और लड़ाई है। धर्मेंद्र गए, अब नरेंद्र की बारी है।” अपने इस पोस्ट के जरिए कन्हैया कुमार ने यह साफ कर दिया है कि विपक्षी दल अब केवल एक इस्तीफे से संतुष्ट होने वाले नहीं हैं, बल्कि उनका अगला सीधा निशाना देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर है और यह जवाबदेही की एक लंबी लड़ाई की महज शुरुआत है।
सरकार पर ‘गुड कॉप-बेड कॉप’ खेलने का आरोप
आपको बता दे कि, इस्तीफे की इस बड़ी घटना से ठीक पहले, शनिवार को ही कन्हैया कुमार ने केंद्र सरकार और विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा तंज कसते हुए एक और पोस्ट साझा किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि सरकार ‘गुड कॉप-बेड कॉप’ का खेल खेल रही है, जहां एक तरफ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर दोस्ताना माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है, तो वहीं दूसरी तरफ बैकडोर से छात्रों पर लाठीचार्ज कराया जा रहा है, उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है और डराया-धमकाया जा रहा है। उन्होंने सरकार पर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने और सच्चाई छिपाने के लिए अफवाहें फैलाने का भी गंभीर आरोप लगाया था।
जंतर-मंतर के प्रदर्शन और सियासी हलचल
उल्लेखनीय है कि नीट परीक्षा में धांधली और पेपर लीक के खिलाफ पिछले काफी समय से दिल्ली के जंतर-मंतर सहित देश के विभिन्न हिस्सों में उग्र प्रदर्शन चल रहे थे। इन आंदोलनों को दबाने के बजाय विपक्ष लगातार इसे एक बड़ा मुद्दा बनाता रहा है। शिक्षा मंत्री के पद छोड़ने के बाद अब राजनीतिक सरगर्मी और ज्यादा तेज हो गई है। विपक्षी दल इसे अपनी वैचारिक और राजनीतिक जीत बता रहे हैं, वहीं आने वाले दिनों में संसद और सड़कों पर सरकार के खिलाफ इस आंदोलन को और अधिक आक्रामक तरीके से आगे बढ़ाने की पूरी तैयारी की जा रही है, जिससे सत्ता पक्ष की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं।










