Sanjay Singh: देश की राजनीति में शनिवार का दिन एक बड़े और अप्रत्याशित घटनाक्रम का गवाह बना। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। पिछले एक महीने से अधिक समय से दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट परीक्षा और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं व पेपर लीक मामलों को लेकर छात्रों का जबरदस्त विरोध-प्रदर्शन चल रहा था। मंत्री के इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए देश के युवाओं और छात्रों की ताकत को सलाम किया है।
संजय सिंह का सोशल मीडिया पर बड़ा बयान
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के तुरंत बाद, ‘आप’ सांसद संजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक आक्रामक और उत्साहवर्धक पोस्ट साझा की। उन्होंने युवाओं के संघर्ष की तारीफ करते हुए लिखा, “युवा शक्ति जिंदाबाद, छात्र शक्ति जिंदाबाद। जिस ओर जवानी चलती है, उस ओर जमाना चलता है। देश के करोड़ों युवाओं ने अपने आंदोलन के बदौलत कुंभकर्ण की नींद में सो रही मोदी सरकार को जगाया और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेने के लिए मजबूर किया।” संजय सिंह ने आगे स्पष्ट किया कि यह लड़ाई सिर्फ एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा बहुत बड़ा है। उन्होंने लिखा, “पेपर लीक से शुरू हुई लड़ाई, रोजगार तक जाएगी। इसके बाद अब देश में हर गलती की जवाबदेही तय होगी। आंदोलन के विजय की बधाई। जय हिंद।”
एक महीने से सुलग रहा था जंतर-मंतर का आंदोलन
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले और विभिन्न छात्र संगठनों के नेतृत्व में युवा पिछले एक महीने से अधिक समय से लगातार अनशन और प्रदर्शन कर रहे थे। उनकी मुख्य मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और पीड़ित छात्रों के लिए न्याय थी।
यह आंदोलन तब और अधिक उग्र हो गया जब 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान स्थिति हिंसक हो गई। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें कई छात्र और युवा गंभीर रूप से घायल हो गए। इस पुलिसिया कार्रवाई के बाद छात्रों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और देश के दूर-दराज के इलाकों से भी युवा जंतर-मंतर पहुंचने लगे। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया, जिससे केंद्र सरकार पर चौतरफा दबाव बढ़ गया था।
संसद का मानसून सत्र भी हुआ था पूरी तरह ठप
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों ने संसद के मानसून सत्र में भी जबरदस्त हंगामा किया। विपक्ष के कड़े रुख और लगातार नारेबाजी के कारण संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) की कार्यवाही एक दिन भी सुचारू रूप से नहीं चल सकी। सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और पेपर लीक मामलों पर चर्चा की मांग पर अड़ा हुआ था।
अब जबकि केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने अपना इस्तीफा सौंप दिया है, राजनीतिक हलकों में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि विपक्ष का विरोध कुछ शांत होगा और सोमवार से संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से पटरी पर लौट सकती है। हालांकि, छात्रों और युवा संगठनों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी बाकी मांगें (जैसे पीड़ित परिवारों को मुआवजा और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई) पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका संघर्ष और सतर्कता बनी रहेगी।
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