Delhi Students Protest: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी CJP, आशुतोष रांका ने खोले अगले कदम के पत्ते

दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के बीच CJP ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है। संगठन से जुड़े आशुतोष रांका ने आंदोलन के अगले कदमों को लेकर संकेत दिए हैं। आखिर प्रदर्शन किस दिशा में जाएगा और सरकार पर इसका कितना असर पड़ेगा? जानिए पूरी रिपोर्ट।

Delhi Students Protest

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 25, 2026

Delhi Students Protest:  नीट पेपर लीक मामले को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और केंद्र सरकार के बीच बातचीत का दौर लगातार जारी है। शुक्रवार को संगठन की ओर से राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रांका की केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा तथा केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ एक और महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। सूत्रों के अनुसार यह बैठक नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हो सकती है। माना जा रहा है कि इस वार्ता में आंदोलन से जुड़ी प्रमुख मांगों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के मुद्दों पर चर्चा होगी।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को बताया सबसे बड़ी मांग

बैठक से पहले CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने स्पष्ट किया कि संगठन की सबसे प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस मुद्दे पर कोई ठोस निर्णय नहीं लेती है, तो आगे की बातचीत का उद्देश्य कमजोर पड़ जाएगा। रांका के अनुसार आंदोलन केवल शिक्षा सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि जवाबदेही तय करने की भी मांग कर रहा है। उनका कहना है कि जब तक इस मुद्दे पर स्पष्ट फैसला नहीं होता, तब तक आंदोलन की दिशा में बड़ा बदलाव संभव नहीं होगा।

‘इस्तीफा नहीं तो आगे की बातचीत का कोई अर्थ नहीं’

आशुतोष रांका ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यदि यह स्पष्ट हो जाता है कि शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देंगे, तो सरकार और संगठन के बीच होने वाली बैठकों का कोई विशेष महत्व नहीं रह जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में CJP अपनी आगे की रणनीति पर विचार करेगी और आंदोलन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सख्त कदम उठाने पर मजबूर होगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के रुख के आधार पर संगठन भविष्य की कार्रवाई तय करेगा।

मुआवजे और कानूनी कार्रवाई पर सकारात्मक संकेत

हालांकि रांका ने यह भी बताया कि सरकार के साथ हुई पिछली बैठकों में कुछ मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति देखने को मिली है। उनके अनुसार प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों को मुआवजा देने तथा कानूनी कार्रवाई से जुड़े विषयों पर सिद्धांततः सहमति बनी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार जल्द ही इन बिंदुओं पर लिखित सहमति भी उपलब्ध कराएगी। उनका कहना है कि यदि इन विषयों पर आधिकारिक दस्तावेज जारी होता है, तो यह आंदोलन की कुछ मांगों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा।

NTA अधिकारियों की बर्खास्तगी पर उठाए सवाल

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को हटाए जाने के फैसले पर भी CJP ने सवाल उठाए हैं। आशुतोष रांका ने कहा कि इस निर्णय की पूरी जानकारी सामने आने के बाद ही इसका मूल्यांकन किया जा सकेगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारियों को हटाने मात्र से मूल समस्या समाप्त नहीं हो जाती। उनके अनुसार सबसे बड़ा सवाल यह है कि परीक्षा प्रणाली में हुई कथित गड़बड़ियों की अंतिम जिम्मेदारी किसकी है और उसके लिए जवाबदेही किस स्तर पर तय की जाएगी।

‘नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री दें इस्तीफा’

रांका ने कहा कि यदि पेपर लीक जैसी घटनाएं हुई हैं और बड़ी संख्या में छात्र प्रभावित हुए हैं, तो इसकी नैतिक जिम्मेदारी शिक्षा मंत्रालय की बनती है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री को जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए पद छोड़ देना चाहिए। उनके अनुसार जवाबदेही तय किए बिना केवल प्रशासनिक कार्रवाई करने से छात्रों का भरोसा पूरी तरह बहाल नहीं हो सकेगा।

सरकार को सौंपा शिक्षा सुधारों का विस्तृत मांगपत्र

बैठक के दौरान CJP ने सरकार को शिक्षा व्यवस्था में सुधार से जुड़ा एक विस्तृत मांगपत्र (चार्टर ऑफ डिमांड्स) भी सौंपा है। इस दस्तावेज में परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने, जवाबदेही सुनिश्चित करने तथा छात्रों के हितों की रक्षा के लिए कई सुझाव शामिल किए गए हैं। संगठन का कहना है कि इन सुधारों पर सरकार के साथ लगातार चर्चा हो रही है और कई बिंदुओं पर बातचीत आगे बढ़ी है।

आंदोलन की दिशा अब सरकार के अगले कदम पर निर्भर

फिलहाल CJP और केंद्र सरकार के बीच संवाद जारी है, लेकिन आंदोलन की सबसे महत्वपूर्ण मांग—केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे—पर अब तक कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। ऐसे में आगामी बैठक को काफी अहम माना जा रहा है। यदि सरकार इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट रुख अपनाती है, तो आंदोलन की दिशा बदल सकती है। वहीं, यदि मांगों पर सहमति नहीं बनती है, तो संगठन ने संकेत दिया है कि वह अपने आंदोलन को और तेज करने के विकल्पों पर विचार करेगा।

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