Jammu Kashmir: जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले से एक बेहद दहला देने वाली और दुखद खबर सामने आई है। जिले के बिलावर उपमंडल के तहत आने वाले मशका इलाके में स्थित सेवा हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट (सेवा-III) के सीआईएसएफ कैंप में आपसी कहासुनी के बाद हुई अंधाधुंध गोलीबारी में चार जवानों की मौत हो गई। इस भीषण घटना में एक असिस्टेंट कमांडेंट और एक सब-इंस्पेक्टर समेत चार सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं। इस खूनी संघर्ष के बाद पूरे सुरक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है, और उच्च अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच के आदेश दे दिए हैं।
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सेवा पावर प्रोजेक्ट कैंप में आपसी विवाद ने लिया खूनी रूप

प्राप्त जानकारी के अनुसार, हिमाचल प्रदेश की सीमा से सटे कठुआ जिले के बसोहली-मशका क्षेत्र में सीआईएसएफ के जवान सेवा-III बिजली परियोजना की सुरक्षा में तैनात थे। ड्यूटी के दौरान किसी बात को लेकर जवानों के बीच आपसी कहासुनी शुरू हो गई, जो देखते ही देखते हाथापाई और फिर खूनी संघर्ष में बदल गई।
सूत्रों के हवाले से मिली शुरुआती जानकारियों के मुताबिक, सीआईएसएफ के हेड कांस्टेबल अवधेश कुमार ने किसी बात पर उपजे विवाद के बाद अपने आधिकारिक सर्विस हथियार से अपने ही साथी जवानों पर ताबड़तोड़ गोलियां चलानी शुरू कर दीं। इस अचानक हुई फायरिंग से कैंप में अफरा-तफरी मच गई। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और सीआईएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
मृतकों में असिस्टेंट कमांडेंट और सब-इंस्पेक्टर शामिल, अस्पताल में तोड़ा दम
इस गोलीबारी की चपेट में आने से चार गंभीर रूप से घायल जवानों को तुरंत नजदीकी हिमाचल प्रदेश की सीमा से लगे एनएचपीसी (NHPC) अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद गंभीर चोटों के चलते चारों जवानों की जान नहीं बचाई जा सकी और इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
शहीद हुए या मृत जवानों की पहचान असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडे, सब-इंस्पेक्टर लक्ष्मण सिंह, कांस्टेबल रफीक अहमद और कांस्टेबल संदीप कुमार के रूप में हुई है। एक ही कैंप के भीतर हुई इस आंतरिक हिंसा और वरिष्ठ अधिकारियों की इस तरह मौत से सुरक्षा बलों के गलियारों में गहरा शोक और चिंता का माहौल है।
आरोपी जवान हिरासत में, सीआईएसएफ मुख्यालय ने दिए ‘कोर्ट ऑफ इंक्वायरी’ के आदेश

घटना को अंजाम देने वाले आरोपी हेड कांस्टेबल अवधेश कुमार को तुरंत हिरासत में ले लिया गया है और उससे पूछताछ की जा रही है। सुरक्षा बलों के भीतर इस तरह के तनाव और आपसी फायरिंग की घटनाओं को रोकने के लिए विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है।
इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए सीआईएसएफ मुख्यालय ने ‘कोर्ट ऑफ इंक्वायरी’ (Court of Inquiry) के आदेश दे दिए हैं, जो यह पता लगाएगी कि आखिर किन परिस्थितियों और मानसिक तनाव के चलते यह खूनी संघर्ष हुआ। वरिष्ठ अधिकारी मौके पर कैंप की सुरक्षा व्यवस्था और जवानों के मानसिक स्वास्थ्य की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
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