CJP Protest: प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ बातचीत के लिए सरकार की ओर से पहल किए जाने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी की कैराना सांसद इकरा हसन ने इस मुद्दे पर सरकार की बातचीत की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार वास्तव में छात्रों की समस्याओं का समाधान चाहती है तो बातचीत खुले मंच पर और सभी की मौजूदगी में होनी चाहिए। इकरा हसन ने आरोप लगाया कि पहले भी आंदोलन के नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया गया था, लेकिन उस दौरान उनकी मांगों पर कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया गया।
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पहले हुई बैठक का हवाला देकर सरकार पर निशाना
आपको बता दें कि, सांसद इकरा हसन ने कहा कि 20 जुलाई को आंदोलन से जुड़े नेता जब भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिलने पहुंचे थे, तब उन्हें कई घंटे इंतजार कराया गया। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में लोग अपनी मांगों को लेकर पहुंचे थे, लेकिन बैठक के बाद भी उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि जब छात्र और आंदोलनकारी अपनी बात रखने के लिए तैयार हैं, तो सरकार को भी खुले तौर पर उनकी बात सुननी चाहिए और स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।
बंद कमरे में बातचीत के तरीके पर जताई आपत्ति
इकरा हसन ने कहा कि किसी भी आंदोलन या धरने की एक प्रक्रिया होती है। उन्होंने कहा कि बातचीत ऐसी जगह होनी चाहिए जहां आंदोलन से जुड़े सभी लोगों की भागीदारी हो और निर्णय भी सबके सामने लिया जाए। उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि केवल कुछ लोगों को कमरे में बुलाकर बातचीत करने से समाधान नहीं निकलेगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन में शामिल सभी लोगों की राय को महत्व दिया जाना चाहिए और फैसले पारदर्शी तरीके से होने चाहिए।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सरकार को घेरा
संसद सत्र के दौरान जारी गतिरोध को लेकर भी इकरा हसन ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सदन चलाने की जिम्मेदारी सरकार की होती है और विपक्ष अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाता रहेगा। उन्होंने कहा कि छात्रों और विपक्ष की ओर से रखी जा रही मांगों पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। इकरा हसन ने धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि यह कोई बड़ी मांग नहीं है, लेकिन सरकार इसे स्वीकार नहीं कर रही है।
जेपी नड्डा की भूमिका पर उठाए सवाल
इकरा हसन ने जेपी नड्डा के साथ हुई बातचीत को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जेपी नड्डा न तो शिक्षा मंत्री हैं, न गृह मंत्री और न ही प्रधानमंत्री, इसलिए आंदोलनकारियों के साथ बातचीत के लिए उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी ऐसी बैठकों में समय की बर्बादी हुई और अब दोबारा उसी प्रक्रिया को दोहराने की कोशिश की जा रही है।
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छात्रों की मांगों पर बातचीत जरूरी: इकरा हसन
सांसद ने कहा कि सरकार को छात्रों की चिंताओं को समझना चाहिए और बातचीत के लिए ऐसा मंच तैयार करना चाहिए जहां सभी पक्षों की बात सुनी जा सके। उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन का समाधान बातचीत और विश्वास के जरिए ही निकल सकता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष और छात्रों दोनों के साथ संवाद करने में गंभीरता नहीं दिखा रही है। अब इस मामले में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच आगे होने वाली बातचीत पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।










