Anti Paper Leak Bill 2026: परीक्षाओं में गड़बड़ी पर सख्त कानून, आज लोकसभा में आएगा एंटी-पेपर लीक बिल

परीक्षाओं में पेपर लीक और धोखाधड़ी रोकने के लिए केंद्र सरकार नया कदम उठाने जा रही है। लोकसभा में पेश होने वाले Anti Paper Leak Bill 2026 में सख्त सजा, फास्ट ट्रैक जांच और नए नियमों का प्रस्ताव है। आखिर इस बिल में क्या खास है और छात्रों पर इसका क्या असर होगा?

परीक्षाओं में गड़बड़ी पर सख्त कानून

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

जुलाई 27, 2026

Anti Paper Leak Bill 2026: देशभर में प्रतियोगी और सरकारी परीक्षाओं के दौरान सामने आए पेपर लीक मामलों पर लगाम लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार आज लोकसभा में ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026’ पेश करने जा रही है। सरकार का मानना है कि इस संशोधित कानून के जरिए परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जा सकेगा। इससे पहले शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी थी।

यह संशोधन पहले से लागू पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अधिनियम, 2024 में आवश्यक बदलावों के रूप में लाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य पेपर लीक, परीक्षा में धोखाधड़ी और संगठित परीक्षा अपराधों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

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संशोधित बिल में क्या होंगे प्रमुख प्रावधान?

सरकार द्वारा प्रस्तावित संशोधन में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किए जाने का प्रस्ताव है, ताकि मामलों का जल्द निपटारा हो सके। इसके अलावा जांच एजेंसियों को निर्देश होगा कि ऐसे मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी की जाए। सरकार का उद्देश्य है कि दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई हो और लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण न्याय में देरी न हो।

दोषियों के लिए सख्त सजा का प्रावधान

नए संशोधित कानून के तहत पेपर लीक के दोषी पाए जाने वाले आरोपियों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, दोष सिद्ध होने पर कम से कम पांच वर्ष और अधिकतम दस वर्ष तक की जेल हो सकती है। यदि मामला किसी संगठित गिरोह या बड़े नेटवर्क से जुड़ा पाया जाता है, तो सजा और भी कठोर होगी। ऐसे मामलों में कम से कम सात वर्ष की कैद और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे संगठित अपराधों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।

लोकसभा में लंबी चर्चा की संभावना

इस विधेयक को आज लोकसभा में कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह पेश करेंगे। संसद में इस महत्वपूर्ण बिल पर लगभग आठ से दस घंटे तक विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। सरकार और विपक्ष दोनों इस विषय पर अपने-अपने विचार रखेंगे। चूंकि पेपर लीक का मुद्दा हाल के वर्षों में लगातार चर्चा में रहा है, इसलिए इस बहस को काफी अहम माना जा रहा है।

एनडीए ने बनाई विशेष रणनीति

इस विधेयक को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने विशेष रणनीति तैयार की है। जानकारी के अनुसार, गठबंधन की ओर से युवा सांसदों को चर्चा में प्रमुख भूमिका दी गई है। इन सांसदों का उद्देश्य बिल के समर्थन में अपने तर्क प्रस्तुत करना और विपक्ष की आपत्तियों का जवाब देना होगा। सरकार का मानना है कि युवाओं से जुड़े इस विषय पर युवा सांसद प्रभावी ढंग से अपनी बात रख सकेंगे और परीक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता को संसद के सामने मजबूती से रखेंगे।

कौन-कौन सांसद लेंगे बहस में हिस्सा?

सूत्रों के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी की ओर से बांसुरी स्वराज और तेजस्वी सूर्या इस बिल पर अपनी बात रखेंगे। वहीं अन्य दलों के कई प्रमुख सांसद भी चर्चा में भाग लेने वाले हैं। इनमें सयोनी घोष, मिताली बाग, लावु श्री कृष्ण देवरायलु, लल्लन सिंह, डॉ. श्रीकांत शिंदे, सुनील तटकरे, अनुप्रिया पटेल और अरुण भारती जैसे सांसद शामिल हैं। सभी सदस्य अपने-अपने दलों का पक्ष रखते हुए विधेयक के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगे।

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परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने की कोशिश

केंद्र सरकार का कहना है कि इस संशोधित कानून का उद्देश्य केवल दोषियों को सजा देना नहीं, बल्कि पूरे परीक्षा तंत्र में पारदर्शिता और विश्वास बहाल करना भी है। यदि यह विधेयक संसद से पारित हो जाता है, तो भविष्य में पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा।