UP Politics: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी संगठन में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने का बड़ा ऐलान किया है। मायावती ने कहा है कि बसपा ने युवाओं, खासकर Gen-Z को संगठन में करीब 50 प्रतिशत तक भागीदारी देने की नीति पर लंबे समय से काम किया है। उनके इस कदम को युवा मतदाताओं के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
Gen-Z को टिकट में प्राथमिकता देने की तैयारी

आपको बता दे कि, मायावती ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए सर्वसमाज के कर्मठ और युवा चेहरों को उम्मीदवार बनाने में प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। बसपा की कोशिश ऐसे युवाओं को राजनीति में आगे लाने की है, जो पार्टी की विचारधारा और संवैधानिक मूल्यों को आगे बढ़ा सकें।
युवा राजनीति के जरिए अंबेडकरवादी विचारधारा को बढ़ाने का लक्ष्य
बसपा प्रमुख के मुताबिक, नई पीढ़ी को संगठन और चुनावी राजनीति में आगे लाने का मकसद देश में अंबेडकरवादी राजनीति और संवैधानिक मूल्यों का तेजी से विकास करना है। मायावती ने कहा कि पार्टी चाहती है कि युवा केवल चुनावी राजनीति का हिस्सा न बनें, बल्कि सामाजिक बराबरी, लोकतंत्र और संविधान के मूल्यों को मजबूत करने में भी भूमिका निभाएं।
संविधान के मानवतावादी और समतामूलक उद्देश्य पर जोर
मायावती ने कहा कि भारतीय संविधान के मानवतावादी, समतामूलक और धर्मनिरपेक्ष उद्देश्यों को जमीन पर लागू करना जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में बसपा की चार सरकारों के दौरान कानून-व्यवस्था के साथ जनहित, जनकल्याण और विकास के मुद्दों पर प्रभावी काम किया गया था। उनका कहना है कि समाज के हर वर्ग को विकास का लाभ पहुंचाना बसपा की प्राथमिकता रही है।
रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर बसपा का दावा

बसपा प्रमुख ने अपनी सरकारों के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों के साथ सरकारी नौकरियों और रोजगार पर भी काम किया गया। उन्होंने शहरी और ग्रामीण विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि Gen-Z और Gen-Alpha की जरूरतों को भी मजबूत इच्छाशक्ति के साथ पूरा करने की आवश्यकता है।
कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर विरोधी दलों पर हमला
मायावती ने विपक्षी दलों पर जातिवादी रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसी वजह से बसपा वर्ष 2012 में उत्तर प्रदेश में पांचवीं बार सरकार नहीं बना सकी। उन्होंने दावा किया कि आज भी समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों को इसका अफसोस है। मायावती ने यह भी आरोप लगाया कि बसपा सरकार के बाद प्रदेश में कानून का राज कमजोर हुआ, जिससे आम जनता परेशान है।
युवाओं और महिलाओं को उम्मीदवार बनाने पर जोर
बसपा सुप्रीमो ने पार्टी कार्यकर्ताओं को उम्मीदवार चयन को लेकर भी दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चुनाव में सर्वसमाज के योग्य लोगों के साथ युवाओं और महिलाओं को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए। माना जा रहा है कि बसपा की यह रणनीति पार्टी के पारंपरिक सामाजिक आधार के साथ युवा और महिला मतदाताओं को जोड़ने की कोशिश का हिस्सा है।
परिवारवाद पर मायावती ने फिर दिया संदेश
मायावती ने अपने परिवार को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि बसपा संस्थापक कांशीराम की तरह उन्होंने अपने भाई-बहन, परिवार के युवाओं और करीबी रिश्तेदारों को पार्टी के काम तक सीमित रखा। उनके मुताबिक, परिवार के सदस्यों को सांसद, विधायक, मंत्री या किसी अन्य राजनीतिक पद का लाभ नहीं दिया गया।
बसपा का फोकस बहुजन समाज और आत्मनिर्भरता पर
मायावती ने कहा कि बसपा बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के आत्मसम्मान और स्वाभिमान के मिशन को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इस मिशन की सफलता में किसी भी तरह की बाधा उन्हें स्वीकार नहीं है। उनका दावा है कि पार्टी का मुख्य फोकस बहुजन समाज के हित, कल्याण और उसे आत्मनिर्भर बनाने पर है।
2027 से पहले मायावती की नई रणनीति पर नजर

मायावती के Gen-Z को 50 प्रतिशत संगठनात्मक भागीदारी और युवा चेहरों को टिकट में प्राथमिकता देने के ऐलान ने उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। अब देखना होगा कि बसपा की यह रणनीति जमीन पर कितनी प्रभावी होती है और क्या युवा चेहरों के सहारे पार्टी आगामी चुनावों में अपने राजनीतिक आधार को दोबारा मजबूत कर पाती है।










