UP Election 2027: उन्नाव की मोहान (164) सुरक्षित सीट का विस्तृत राजनीतिक एवं भौगोलिक विश्लेषण

उन्नाव की मोहान (164) विधानसभा सीट पर 2027 के चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। दलित और सवर्ण बहुल इस आरक्षित सीट पर बीजेपी अपना कब्जा बरकरार रखने की जुगत में है, तो वहीं सपा 'PDA' फॉर्मूले के साथ सेंध लगाने की तैयारी में है। जानिए मोहान सीट का पूरा जातीय समीकरण और राजनीतिक इतिहास।

UP Election 2027

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

सितम्बर 12, 2026

UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों ने क्षेत्रीय और जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों के चयन पर मंथन शुरु कर दिया है।भारतीय जनता पार्टी जो हमेशा चुनावी मोड में रहती है सीएम योगी के चेहरे पर हैट्रिक लगाने का दम भर रही है तो वहीं भाजपा की मुख्य प्रतिद्वंदी और 2024 के लोकसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करने वाली समाजवादी पार्टी पीडीए के दम पर सत्ता में वापसी की तैयारी में जुटी है।

दलित वोटों का गढ़, कड़े मुकाबले की राह और सियासी समीकरण!

उत्तर प्रदेश की राजनीति में उन्नाव जिले की मोहान विधानसभा सीट (संख्या 164) एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील राजनीतिक केंद्र मानी जाती है। यह सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है। भौगोलिक रूप से राजधानी लखनऊ के नजदीक होने के कारण इस क्षेत्र की राजनीतिक गतिविधियां हमेशा से मुख्यधारा के चर्चा में रहती हैं। आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर इस सीट पर समीकरण अभी से सुगबुगाहट तेज कर चुके हैं।

भौगोलिक स्थिति और क्षेत्र विस्तार

मोहान विधानसभा क्षेत्र भौगोलिक रूप से सई नदी के किनारे बसा हुआ है। यह क्षेत्र सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की सीमाओं से सटा हुआ है, जिससे यहां शहरी और ग्रामीण संस्कृति का मिला-जुला प्रभाव देखने को मिलता है। इस विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत मुख्य रूप से नवाबगंज, हसनगंज और औरास विकासखंड (ब्लाक) आते हैं। प्रशासनिक और स्थानीय स्तर पर इस क्षेत्र में मोहान, औरास और नवाबगंज जैसी तीन प्रमुख नगर पंचायतें शामिल हैं। लखनऊ-कानपुर मार्ग और ग्रामीण संपर्क मार्गों की वजह से यह रणनीतिक रूप से काफी अहम है।

मतदाताओं की कुल संख्या

पिछले कुछ चुनावों के आंकड़ों के अनुसार मोहान सीट पर मतदाताओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है:

  • 2012 चुनाव: लगभग 2.87 लाख पंजीकृत मतदाता
  • 2017 चुनाव: लगभग 3.22 लाख मतदाता
  • 2022 चुनाव: बढ़कर लगभग 3.43 लाख मतदाता हुए

विभिन्न चुनावी रुझानों और पुनरीक्षण के बाद यहां कुल मतदाताओं की संख्या बढ़कर 3.50 लाख के आंकड़े को पार कर चुकी है, जिसमें पुरुष और महिला मतदाताओं के अलावा युवा मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं।

मोहान में फिर काम आएगा BJP का विजन?

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि, मोहान में सई नदी और आसपास के संपर्क मार्गों से जुड़ी समस्याएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुडे़ निषाद समुदाय को प्रभावित करती है। इस लिहाज से इन समुदायों का वोट केवल जातीय पहचान पर नहीं पड़ता बल्कि स्थानीय विकास और ग्रामीण कनेक्टिविटी पर भी निर्भर है। इस नदी पर पुराने जर्जर पुल के स्थान पर नया पुल बनवाने का श्रेय मौजूदा भाजपा विधायक को जाता है। इसके अलावा मौजूदा विधायक ने कई सड़कों को भी बनवाने का काम किया है। लेकिन हाईवे के ब्लैक स्पाट चिन्हित न होने से सड़क दुर्घटनाओं में अक्सर लोगों की मौत का सवाल भी यहां के लोगों के लिए बड़ा है। हालांकि अब ब्लैक स्पाट चिन्हित करने का काम शुरू हो चुका है।

जातीय समीकरण-

  • जाति मतदाता अनुमानित
  • पासी 55 हजार
  • जाटव 48 हजार
  • मौर्य 25 हजार
  • लोधी 21 हजार
  • ब्राहम्ण 18 हजार
  • निषाद 17 हजार
  • पाल 14 हजार
  • क्षत्रिय 14 हजार
  • वैश्य 11 हजार
  • मुस्लिम 15 हजार
  • यादव 14 हजार

मोहान विधानसभा एक नजर में –

आरक्षण अनुसूचित

  • कुल मतदाता 3,10, 066
  • पुरूष मतदाता 1,69 636
  • महिला मतदाता 1,40, 416
  • थर्ड जेंडर 14

मोहान विधानसभा का राजनीतिक इतिहास –

वर्षविजेता विधायकपार्टीउपविजेता / प्रमुख प्रतिद्वंदीपार्टीजीत का अंतर
2012राधे लाल रावतबहुजन समाज पार्टी (BSP)मस्त रामभारतीय जनता पार्टी (BJP)9,169 वोट
2017बृजेश कुमारभारतीय जनता पार्टी (BJP)राधे लाल रावतबहुजन समाज पार्टी (BSP)54,095 वोट
2022बृजेश कुमारभारतीय जनता पार्टी (BJP)डॉ. आंचल वर्मासमाजवादी पार्टी (SP)43,179 वोट

2012 का चुनाव: इस चुनाव में बसपा के टिकट पर राधे लाल रावत ने जीत दर्ज की थी, उन्होंने भाजपा के मस्त राम को हराया था।

2017 का चुनाव: मोदी लहर और भाजपा की आंधी में बीजेपी के नए चेहरे बृजेश कुमार ने भारी अंतर (54,095 वोटों) से जीत हासिल कर यह सीट बसपा से छीन ली।

2022 का चुनाव: भाजपा विधायक बृजेश कुमार ने अपने कार्यकाल के दम पर दोबारा मैदान में बाजी मारी। उन्होंने सपा की उम्मीदवार डॉ. आंचल वर्मा को 43,179 मतों के अंतर से करारी शिकस्त दी और भगवा दल का कब्जा बरकरार रखा।

मोहान सीट का सबसे बड़ा सियासी पेंच

आरक्षित सीट होने के कारण मोहान सीट पर सभी दलों के प्रत्याशी अनुसूचित जाति से ही होते है। ऐसे में पासी और जाटव बाहुल्य वाली इस विधानसभा सीट पर मौजूद ब्राहम्ण और क्षत्रिय मतदाता भी किसके पक्ष में लामबंद होते है, यह भी महत्वपूर्ण रहता है। इस विधानसभा सीट पर कुछ क्षेत्रों में मुस्लिम मतदाता भी मौजूद है। यहां मुस्लिमों की घनी आबादी है, लिहाजा स्थानीय जातीय समीकरण के साथ मिल कर वह भी चुनाव नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखते है।

2027 चुनाव में जाति कितना बड़ा रोल अदा करेगी?

आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में मोहान सीट पर जातिगत फैक्टर सबसे बड़ा केंद्र बिंदु रहने वाला है। चूंकि यह सीट आरक्षित है, इसलिए दलित मतों का बिखराव या एकजुटता परिणाम तय करेगी। इसके साथ ही, बीजेपी सवर्ण-पिछड़ा गोलबंदी को साधने की कोशिश करेगी, वहीं समाजवादी पार्टी ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंखयक) फॉर्मूले के जरिए दलित और पिछड़ों के गठजोड़ को मजबूत करने में जुटी है। जातियों की यह स्थानीय गोलबंदी ही तय करेगी कि राजनीतिक दल किस रणनीति के साथ मैदान में उतरते हैं।

2027 के संभावित चेहरे और चुनावी समर की सुगबुगाहट

आगामी 2027 के रण के लिए अभी से राजनीतिक दलों में सुगबुगाहट तेज हो गई है:

  • भारतीय जनता पार्टी (BJP): पार्टी की तरफ से मौजूदा विधायक बृजेश कुमार का दावा सबसे मजबूत माना जा रहा है, हालांकि स्थानीय स्तर पर टिकट के लिए कुछ अन्य नए और पुराने नेता भी अपनी दावेदारी अंदरखाने मजबूत कर रहे हैं।
  • समाजवादी पार्टी (SP): पिछले चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करने वाली डॉ. आंचल वर्मा या सपा के अन्य स्थानीय क्षत्रप टिकट की रेस में सबसे आगे हैं। पार्टी इस बार पिछले अंतर को पाटने के लिए आक्रामक रणनीति अपनाएगी।
  • बहुजन समाज पार्टी (BSP) और अन्य: बसपा अपने पुराने आधार वोट बैंक को टटोलने के लिए किसी मजबूत और कद्दावर चेहरे की तलाश में है, ताकि वह त्रिकोणीय मुकाबला खड़ा कर सके।

मोहान सीट पर आगामी चुनाव सत्ता पक्ष के लिए अपनी साख बचाए रखने और विपक्ष के लिए सेंध लगाने की बड़ी चुनौती साबित होने वाला है।