Abhijeet Dipke CJP: ‘बार-बार फोन मत करो’— प्रदर्शन के बीच अभिजीत दीपके ने पिता से क्यों कही ये बात?

जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच अभिजीत दीपके का अपने पिता से कहा गया एक भावुक वाक्य अब चर्चा का विषय बन गया है। आखिर उन्होंने बार-बार फोन न करने की बात क्यों कही, परिवार किस तनाव से गुजर रहा था और पिता ने क्या बड़ा खुलासा किया, पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

प्रदर्शन के बीच अभिजीत दीपके ने पिता से क्यों कही ये बात?

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

जुलाई 27, 2026

Abhijeet Dipke CJP: दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के बड़े प्रदर्शन के दौरान कई भावुक पल भी सामने आए। इस आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रमुख अभिजीत दीपके लगातार प्रदर्शनकारियों के साथ मौजूद रहे। इस बीच उनके पिता भगवानराव दीपके ने मीडिया से बातचीत में उन दिनों की परिस्थितियों और परिवार की चिंता को साझा किया।

उन्होंने बताया कि आंदोलन के दौरान पूरा परिवार लगातार तनाव में था। विशेष रूप से 20 जुलाई के बाद हालात और गंभीर हो गए थे, जिससे घरवालों की चिंता काफी बढ़ गई। परिवार को अभिजीत की सुरक्षा की फिक्र सताने लगी थी और वे लगातार उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रहे थे।

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अभिजीत ने पिता से कही भावुक बात

भगवानराव दीपके ने बताया कि उन्होंने बेटे को वापस घर लाने का मन बनाया था। उनका विचार था कि वे दिल्ली जाकर अभिजीत को अपने साथ ले आएं, लेकिन बेटे ने ऐसा करने से साफ मना कर दिया। उन्होंने बताया कि अभिजीत ने उनसे कहा कि वे बार-बार फोन न करें। अभिजीत ने भावुक अंदाज में कहा, “अब मैं सिर्फ आपका बेटा नहीं हूं, पूरे देश का बेटा हूं।” पिता के अनुसार, बेटे की यह बात सुनकर उन्हें उसकी जिम्मेदारी और आंदोलन के प्रति समर्पण का एहसास हुआ।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर पिता की प्रतिक्रिया

भगवानराव दीपके ने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना था कि छात्रों के बीच काफी नाराजगी थी और वे लंबे समय से मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। उन्होंने कहा कि केवल छात्र ही नहीं, बल्कि उनके अभिभावकों में भी काफी आक्रोश था। शुरुआत में आंदोलन सिर्फ दिल्ली के जंतर-मंतर तक सीमित था, लेकिन 20 जुलाई के बाद यह देश के कई हिस्सों तक फैल गया। ऐसे में उनका मानना है कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हालात को शांत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

देशभर में फैला छात्र आंदोलन

जानकारी के अनुसार, छात्रों का प्रदर्शन धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर का आंदोलन बन गया। बड़ी संख्या में छात्र अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगते रहे। प्रदर्शन में कई छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों ने भी भागीदारी की। आंदोलन के विस्तार के बाद सरकार पर दबाव बढ़ा, जिसके बाद राजनीतिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।

प्रह्लाद जोशी ने संभाला शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने वरिष्ठ मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने रविवार को सोशल मीडिया के माध्यम से पदभार संभालने की जानकारी साझा की। प्रह्लाद जोशी पहले से ही उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय का कार्यभार संभाल रहे हैं। अब उन्हें शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। सरकार को उम्मीद है कि नए नेतृत्व में मंत्रालय शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर तेजी से काम करेगा और छात्रों की चिंताओं का समाधान निकालने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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परिवार की चिंता और आंदोलन का संदेश

अभिजीत दीपके के पिता के बयान ने यह स्पष्ट किया कि किसी भी बड़े जनआंदोलन के पीछे केवल प्रदर्शनकारी ही नहीं, बल्कि उनके परिवार भी मानसिक तनाव और चिंता से गुजरते हैं। वहीं, अभिजीत का अपने पिता से कहा गया भावुक संवाद इस बात को दर्शाता है कि वह आंदोलन को केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देख रहे थे। यह घटना आंदोलन के मानवीय पक्ष को भी सामने लाती है।