Vishwakarma Puja 2026: हिंदू धर्म में भगवान विश्वकर्मा को ब्रह्मांड का पहला शिल्पकार और वास्तुकार माना गया है। हर साल भाद्रपद मास की संक्रांति यानी 17 सितंबर को विश्वकर्मा जयंती बेहद उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। इस पावन पर्व की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस दिन पारंपरिक पूजा-पाठ के साथ-साथ हमारी आजीविका का साधन बनने वाली मशीनों, औजारों और उपकरणों की विशेष पूजा की जाती है। ‘कर्म ही पूजा है’ की भावना को चरितार्थ करने वाला यह पर्व हमारे जीवन में यंत्रों के महत्व को सम्मान देने का अनूठा अवसर है।
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विश्वकर्मा पूजा का महत्व और परंपरा

विश्वकर्मा पूजा के दिन कारखानों, फैक्टरियों, दफ्तरों और दुकानों में सभी मशीनें पूरी तरह शांत रखी जाती हैं और उनकी विधि-विधान से आराधना की जाती है। इस दिन ऑटो-रिक्शा, कार और अन्य गाड़ियों के बोनट पर रोली-तिलक लगाया जाता है। एक दर्जी अपनी कैंची की पूजा करता है, तो वास्तुकार और शिल्पकार अपने निर्माण उपकरणों को नमन करते हैं। इसके अलावा, आधुनिक युग में ऑफिसों और आईटी सेक्टर में काम करने वाले इंजीनियर अपने लैपटॉप और कंप्यूटर्स की पूजा कर भगवान विश्वकर्मा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। यह भगवान विश्वकर्मा को सम्मान देने और अपने काम के प्रति निष्ठा दिखाने का एक पवित्र माध्यम है।
मशीन और औजारों की पूजन की सही विधि

यदि आप भी विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर अपने कार्यस्थल, दुकान, गैराज या घर की मशीनों और औजारों का पूजन करना चाहते हैं, तो शास्त्रों में बताई गई सही विधि का पालन अवश्य करें। पूजा से एक दिन पहले या सुबह अपनी फैक्ट्री, दुकान, वर्कशॉप या ऑफिस की अच्छी तरह साफ-सफाई करें। जिन मशीनों और औजारों की आप पूजा करने वाले हैं, उनकी भी मिट्टी और धूल साफ कर लें। यदि कोई मशीन खराब है, तो उसे ठीक करवा लें; यदि तुरंत ठीक कराना संभव न हो, तो उसे साफ-सुथरा जरूर रखें। किसी भी यंत्र पर गंदगी नहीं रहनी चाहिए।
पूजा स्थल या कारखाने के एक साफ-सुथरे कोने में चौकी रखें और उस पर पीला या लाल रंग का साफ कपड़ा बिछाएं। इसके बाद उस पर भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। चौकी को फूलों और आम के पत्तों से सजाएं। चौकी के निकट जल से भरा हुआ मिट्टी या तांबे का कलश रखें। कलश के मुख पर कलावा (रक्षा सूत्र) बांधकर उसमें आम के पत्ते और नारियल स्थापित करें।

फैक्टरी या दुकान में रखे सभी छोटे औजारों और हथियारों को पूजा के स्थान के पास एकत्रित करें। जो बड़ी मशीनें हैं, उन्हें उनके स्थान पर ही साफ करके रोली, हल्दी और अक्षत (चावल) का तिलक लगाएं। भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर और सभी उपकरणों पर हल्दी, कुमकुम, चावल और फूल अर्पित करें। तस्वीर के सामने शुद्ध घी का दीपक और अगरबत्ती प्रज्वलित करें। इसके बाद फल, मिठाई और पारंपरिक पूजन सामग्री अर्पित करें।
अंत में फैक्ट्री या प्रतिष्ठान के सभी मालिक, कर्मचारी और कामगार मिलकर सामूहिक रूप से भगवान विश्वकर्मा की आरती करें। पूजन संपन्न होने के बाद उपस्थित सभी लोगों में प्रसाद का वितरण करें। इस विधि-विधान से भगवान विश्वकर्मा की आराधना करने से व्यापार में उन्नति होती है, मशीनों की उम्र लंबी होती है और जीवन में सुख-समृद्धि व बरकत का वास हमेशा बना रहता है।
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Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां पौराणिक कथाओं,धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। खबर में दी जानकारी पर विश्वास व्यक्ति की अपनी सूझ-बूझ और विवेक पर निर्भर करता है। प्राइम टीवी इंडिया इस पर दावा नहीं करता है ना ही किसी बात पर सत्यता का प्रमाण देता है।










