Ganesh Chaturthi 2026: घर पर कैसे करें गणपति पूजा? जानें शुभ मुहूर्त और पूजन सामग्री

रिद्धि-सिद्धि के स्वामी भगवान गणेश की कृपा से जीवन में संपदा और समृद्धि बनी रहती है। उन्हें प्रसन्न करने के लिए मोदक का भोग और दूर्वा (घास) अर्पित करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

Ganesh Chaturthi 2026

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

सितम्बर 14, 2026

Ganesh Chaturthi 2026: सनातन परंपरा में प्रथम पूज्य श्री गणेश विघ्नहर्ता, लोक मंगल और रिद्धि-सिद्धि के दाता हैं। किसी भी अनुष्ठान या नए कार्य की शुरुआत इनकी आराधना के बिना अधूरी मानी जाती है। बौद्धिक ज्ञान, समृद्धि और संकट मोचन के प्रतीक गणेश जी की उपासना से जीवन के समस्त अवरोध समाप्त होते हैं।

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भगवान गणेश को अत्यंत प्रिय भोग और अर्पित करने योग्य सामग्री

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घर पर कैसे करें गणपति पूजा?

भक्त विधि-विधान से पूजन तो करते हैं, परंतु कई बार आवश्यक चीजों को अर्पित करना विस्मृत हो जाता है। गणपति को मुख्य रूप से तीन चीजें अतिप्रिय हैं:

मोदक: आनंद और प्रसन्नता का प्रतीक।

दूर्वा (एक प्रकार की घास): दूर्वांकुरार्पण से गणेश जी शीघ्रातिशीघ्र प्रसन्न होते हैं।

घी: सात्विक ऊर्जा और शुद्धि का प्रतीक।

मोदक और दूर्वा चढ़ाने के पीछे की पौराणिक कथाएं

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान परशुराम के साथ युद्ध के दौरान गणेश जी का एक दांत टूट गया था, जिससे उन्हें भोजन चबाने में कठिनाई होने लगी। तब उनके लिए मुलायम और सुपाच्य पकवान के रूप में मोदक तैयार किया गया, जो उनका प्रिय मिष्ठान बन गया। शाब्दिक अर्थ में मोदक का अर्थ ‘खुशी या आनंद’ है। दूर्वा की तीन या पांच पत्तियों वाला अंकुर शीतलता और नकारात्मकता निवारण का कार्य करता है।

गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन क्यों वर्जित है?

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घर पर कैसे करें गणपति पूजा?

गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन निषेध माना जाता है; मान्यता है कि इससे व्यक्ति पर ‘मिथ्या कलंक’ (झूठा आरोप) लगता है। पौराणिक संदर्भानुसार, भगवान कृष्ण ने भी इस दिन चंद्र दर्शन के कारण स्यमंतक मणि चोरी का मिथ्या कलंक झेला था।

दोष निवारण मंत्र: यदि भूलवश चंद्र दर्शन हो जाए, तो इस मंत्र का 28, 54 या 108 बार जाप करें:

सिंहःप्रसेनमवधीत् , सिंहो जाम्बवता हतः।
सुकुमारक मा रोदीस्तव, ह्येष स्यमन्तकः।।

(श्रीमद्भागवत के दसवें स्कन्द के 57वें अध्याय का पाठ करने से भी यह दोष मिट जाता है।)

गणेश चतुर्थी पूजन विधि और नियम

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घर पर कैसे करें गणपति पूजा?

प्रातः स्नान के बाद स्वर्ण, तांबे या पवित्र मिट्टी से निर्मित श्रीगणेश प्रतिमा स्थापित करें। पाटे/चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर गणपति को विराजमान करें। सिंदूर व दूर्वा अर्पित कर 21 लड्डुओं का भोग लगाएं (5 लड्डू अर्पित करें, शेष प्रसादस्वरूप बांट दें)। सायंकाल कथा, चालीसा और आरती के बाद नजरें नीचे रखकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। इस दिन विशेष रूप से सिद्धिविनायक स्वरूप की आराधना की जाती है। गणेश पूजन में तुलसी पत्र का प्रयोग वर्जित है; तुलसी छोड़कर अन्य सभी पत्र-पुष्प मान्य हैं। सामान्यतः 1 परिक्रमा का विधान है (मतांतर से 3 परिक्रमा भी की जाती है)।

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