Hindi Diwas 2026: हिंदी दिवस के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए भारत की भाषाई विविधता को देश की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में बोली जाने वाली विभिन्न भाषाएं किसी कमजोरी का संकेत नहीं हैं, बल्कि ये सांस्कृतिक समृद्धि का परिचायक हैं। हर भाषा अपने साथ एक विशिष्ट इतिहास, लोक परंपराएं और विश्वदृष्टि लेकर चलती है, जो नई पीढ़ी के मूल्यों को आकार देती है।
UCC पर सरकार का बड़ा प्लान, अमित शाह ने राज्यों के लिए तय की डेडलाइन
‘हिंदी किसी दूसरी भाषा की प्रतिद्वंद्वी नहीं’

गृह मंत्री ने जोर देकर कहा कि हिंदी का उद्देश्य अन्य भारतीय भाषाओं से प्रतिस्पर्धा करना कदापि नहीं है। यह विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं के बीच सार्थक संवाद स्थापित करने और राष्ट्रीय एकता को सूत्रबद्ध करने वाली एक महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करती है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि गैर-हिंदीभाषी क्षेत्रों और मातृभाषाओं के लोगों ने भी हिंदी को व्यापक जनसंचार की भाषा बनाने में ऐतिहासिक योगदान दिया है।
‘वैश्विक भाषाएं सीखें, पर मातृभाषा से नाता न तोड़ें’
युवाओं को संबोधित करते हुए श्री शाह ने आह्वान किया कि वे दुनिया की अधिकाधिक भाषाएं सीखें, लेकिन अपनी मातृभाषा का त्याग न करें। अभिभावकों से विशेष अपील की गई कि वे बच्चों से घर में मातृभाषा में ही संवाद करें। अपनी भाषा बोलने में कोई हीनभाव नहीं होना चाहिए, क्योंकि भाषा हमें हमारी मां, मिट्टी, इतिहास और संस्कृति से जोड़ती है।
राजभाषा का दर्जा: 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था।
औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति: प्रधानमंत्री मोदी के इस आह्वान में भाषा की अहम भूमिका है; राजपथ का नाम ‘कर्तव्य पथ’ और नए औपनिवेशिक कानूनों में बदलाव इसी आत्मसम्मान की मिसाल हैं।
गैर-हिंदीभाषी महापुरुषों का योगदान और हिंदी

अमित शाह ने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनकी अपनी मातृभाषा गुजराती है, किंतु देश के किसी भी कोने में आम नागरिकों से जुड़ने में हिंदी उन्हें सहज संवाद का माध्यम देती है। आजादी के बाद से ही भारतीय भाषाओं ने प्रशासन और विकास को जनता तक पहुंचाया है। हिंदी के विकास में उन महापुरुषों का अतुलनीय योगदान रहा है जिनकी मातृभाषा हिंदी नहीं थी:
स्वामी दयानंद सरस्वती: गुजरातीभाषी होने के बावजूद उन्होंने अपना प्रसिद्ध ग्रंथ ‘सत्यार्थ प्रकाश’ हिंदी में लिखा।
महात्मा गांधी: वर्ष 1918 में मद्रास में ‘दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा’ की स्थापना कर दक्षिण में हिंदी प्रसार की नींव रखी।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस: बंगालीभाषी होने के बावजूद आजाद हिंद फौज में संवाद के लिए हिंदी को अपनाया और ‘जय हिंद’ का अमर नारा दिया।










