UP News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को गोरखपुर में आईएमए चैरिटेबल ब्लड सेंटर का लोकार्पण किया। तारामंडल स्थित सेठ बद्री प्रसाद जायसवाल मेमोरियल हॉल में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने पूर्वी उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में हुए बदलावों का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ वर्ष पहले इंसेफेलाइटिस को लेकर परिवारों में चिंता का माहौल रहता था, लेकिन अब इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण हासिल किया गया है।
‘रक्त बनाया नहीं जा सकता, रक्तदाता तैयार करना होगा’

मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा के लिए अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीक, दवाएं और संसाधन उपलब्ध कराए जा सकते हैं, लेकिन रक्त का निर्माण नहीं किया जा सकता। इसके लिए स्वैच्छिक रक्तदाताओं की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि रक्तदान के जरिए एक व्यक्ति जरूरतमंद को जीवन बचाने में मदद करता है। सीएम ने आईएमए गोरखपुर की इस पहल को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ते हुए इसकी सराहना की।
आईएमए गोरखपुर की सामाजिक सेवा पहल
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आईएमए केवल चिकित्सकों का संगठन नहीं, बल्कि सामाजिक सेवा में भी योगदान देने वाली संस्था है। गोरखपुर में पहले निश्शुल्क ओपीडी शुरू की गई और अब चैरिटेबल ब्लड सेंटर की शुरुआत हुई है। उन्होंने बताया कि 2017-18 में सीतापुर आई हॉस्पिटल में निश्शुल्क ओपीडी शुरू हुई थी। बाद में गोरखपुर विकास प्राधिकरण के सहयोग से उपलब्ध कराए गए भूखंड पर यह ब्लड सेंटर स्थापित किया गया। आईएमए गोरखपुर से 1,400 से अधिक चिकित्सक जुड़े हैं।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज की बदली तस्वीर
मुख्यमंत्री ने गोरखपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था में बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ वर्ष पहले बीआरडी मेडिकल कॉलेज पूर्वी उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र था, लेकिन वहां सुविधाओं की कमी के कारण एक बेड पर कई मरीजों के भर्ती होने जैसी स्थिति रहती थी। उन्होंने कहा कि आज यही संस्थान सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं और इंसेफेलाइटिस समेत विभिन्न गंभीर बीमारियों के उपचार का प्रमुख केंद्र बन चुका है।
पूर्वांचल में मेडिकल कॉलेजों का तेजी से विस्तार

सीएम योगी ने कहा कि गोरखपुर में एम्स के साथ चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हुआ है। इसके अलावा महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बलरामपुर, बहराइच, गोंडा, अयोध्या और अंबेडकरनगर समेत कई जिलों में मेडिकल कॉलेज शुरू किए गए हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक प्रदेश में 75 जिलों के बीच 85 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं और दो एम्स भी काम कर रहे हैं। एमबीबीएस सीटों की संख्या भी 4,600 से बढ़कर 13,500 से अधिक हो गई है।
माफिया से मेडिकल कॉलेज तक बदली पहचान
मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में पहले चिकित्सकों को कथित तौर पर धमकियां मिलने और रंगदारी मांगने की घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर आंदोलन तक करने पड़ते थे। योगी ने दावा किया कि अब गोरखपुर समेत पूरे प्रदेश में चिकित्सक, व्यापारी और आम नागरिक खुद को अधिक सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की पहचान अब माफिया के बजाय ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज’ जैसे स्वास्थ्य विस्तार के लक्ष्य से बन रही है।
गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय का उदाहरण
मुख्यमंत्री ने गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय का उदाहरण देते हुए कहा कि शुरुआत में अस्पताल को 10 बेड से शुरू करने की चर्चा थी, लेकिन चिकित्सकों के सहयोग से इसे 100 बेड का अस्पताल बनाया गया। उन्होंने कहा कि अस्पताल ने यह दिखाया कि चैरिटी मॉडल पर भी गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा और ब्लड बैंक जैसी सेवाएं संचालित की जा सकती हैं। यहां ब्लड सेपरेटर, एफेरेसिस और डायलिसिस जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।
गोरखपुर में डायलिसिस और विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले डायलिसिस के लिए मरीजों को लखनऊ या बीएचयू तक जाना पड़ता था, लेकिन अब गोरखपुर में ही गुणवत्तापूर्ण डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि सरकार ने जिला अस्पतालों में भी निश्शुल्क डायलिसिस की व्यवस्था शुरू की है। स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक बनाने के लिए आईआईटी कानपुर के सहयोग से मेडटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और एसजीपीजीआई में भी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
स्वैच्छिक रक्तदान को लेकर सीएम योगी की अपील
मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्त की मांग के मुकाबले आपूर्ति पूरी नहीं हो पाती है। ऐसे में चिकित्सकों और सामाजिक संगठनों को लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित करना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर नियमित रूप से रक्तदान जागरूकता अभियान चलाने की अपील की। उनका कहना था कि अधिक से अधिक लोगों को स्वेच्छा से रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए।
पेशेवर रक्तदाताओं को लेकर भी जताई चिंता

सीएम योगी ने पेशेवर रक्तदाताओं को लेकर चिकित्सकों को सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि विभिन्न बीमारियों से ग्रसित लोगों के रक्तदान पर प्रभावी निगरानी जरूरी है, क्योंकि इससे संक्रमण का जोखिम पैदा हो सकता है। उन्होंने चिकित्सकों से ऐसी गतिविधियों की जानकारी शासन-प्रशासन तक पहुंचाने और जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाने को कहा।
अत्याधुनिक ब्लड सेंटर की मशीनों का निरीक्षण
लोकार्पण से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आईएमए चैरिटेबल ब्लड सेंटर में स्थापित अत्याधुनिक मशीनों का निरीक्षण किया। उन्होंने चिकित्सकों से मशीनों के संचालन, रक्त संग्रह, जांच प्रक्रिया और अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी ली। इसके बाद शिलापट्ट का अनावरण कर ब्लड सेंटर का विधिवत लोकार्पण किया।
निरीक्षण के दौरान सीएम योगी ने बच्ची से की बातचीत
ब्लड सेंटर के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री की नजर परिसर में मौजूद एक नन्ही बच्ची पर पड़ी। योगी आदित्यनाथ ने बच्ची से आत्मीयता से बातचीत की, उसका हालचाल पूछा और उसे स्नेह व आशीर्वाद दिया। कार्यक्रम में आईएमए के पदाधिकारियों और चिकित्सकों ने चैरिटेबल ब्लड सेंटर को जरूरतमंदों के लिए प्रभावी सेवा केंद्र के रूप में विकसित करने की प्रतिबद्धता जताई।










