हाईकोर्ट में भोजशाला मामला गरमाया, मुस्लिम पक्ष ने मंदिर तोड़ने के आरोपों को बताया निराधार

इंदौर धार स्थित भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने के लिए मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में चल रही याचिकाओं में बुधवार को भी सुनवाई जारी रही। मस्जिद पक्ष के वकीलों ने तर्क रखते हुए कहा कि ऐसा कोई साक्ष्य रिकार्ड पर उपलब्ध नहीं है जिससे साबित हो कि मस्जिद बनाने के लिए मंदिर को तोड़ा गया था। सौ वर्ष से अधिक समय तक धार पर मुस्लिम शासकों का शासन रहा। इस दौरान उन्होंने कई इमारतों का निर्माण कराया, जिसमें पुरानी इमारतों के मलबा का उपयोग हुआ। निर्माण स्थानीय कारीगरों द्वारा किया गया था और यह बात मस्जिद में

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Published On :

अप्रैल 29, 2026

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इंदौर

धार स्थित भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने के लिए मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में चल रही याचिकाओं में बुधवार को भी सुनवाई जारी रही। मस्जिद पक्ष के वकीलों ने तर्क रखते हुए कहा कि ऐसा कोई साक्ष्य रिकार्ड पर उपलब्ध नहीं है जिससे साबित हो कि मस्जिद बनाने के लिए मंदिर को तोड़ा गया था। सौ वर्ष से अधिक समय तक धार पर मुस्लिम शासकों का शासन रहा। इस दौरान उन्होंने कई इमारतों का निर्माण कराया, जिसमें पुरानी इमारतों के मलबा का उपयोग हुआ। निर्माण स्थानीय कारीगरों द्वारा किया गया था और यह बात मस्जिद में नजर आ भी रही है।

राजस्व रिकॉर्ड और 700 साल की परंपरा का हवाला

मस्जिद में 700 वर्ष से अधिक समय से नमाज पढ़ी जा रही है। राजस्व रिकार्ड में भी धार के सर्वे नंबर 313 पर मस्जिद ही है। मस्जिद पक्ष ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप भी लगाया। कहा कि भोजशाला को लेकर चल रही याचिकाओं में एएसआइ अलग-अलग जवाब दे रहा है। मस्जिद में अगर संस्कृत में लिखे श्लोक मिले हैं तो अरबी में लिखी बातें भी मिली हैं। कोर्ट का समय समाप्त होने से मस्जिद पक्ष के तर्क अधूरे रहे। सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी। कोर्ट ने एएसआइ के वकील से कहा है कि मस्जिद पक्ष के तर्क सुनने के बाद वे अपने तर्क रखें।

 

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