
Haryana News: हरियाणा सरकार ने राज्य में प्राकृतिक और पर्यावरण-अनुकूल खेती को प्रोत्साहित करने तथा किसानों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा राज्य के बजट में की गई घोषणाओं पर अमल करते हुए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने तेजी से काम करना शुरू कर दिया है। सरकार के इस नए फैसले से जहां एक ओर किसानों को जैविक खाद खरीदने में बड़ी वित्तीय सहायता मिलेगी, वहीं दूसरी ओर जैविक खाद के व्यापार से जुड़े छोटे विक्रेताओं को भी प्रशासनिक प्रक्रियाओं से बड़ी राहत दी गई है।
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जैविक खाद पर 80% तक की भारी सब्सिडी
हरियाणा सरकार का बड़ा ऐलान
हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने इस नीतिगत फैसले की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि राज्य सरकार राज्य में रसायन मुक्त और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य किसानों को पारंपरिक रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से बचाकर जैविक विकल्पों की ओर मोड़ना है।
इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों का ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ (MFMB) पोर्टल पर पंजीकृत होना अनिवार्य होगा। पोर्टल पर रजिस्टर्ड किसानों को जैविक खाद की खरीदारी पर 80 प्रतिशत तक की सीधी सब्सिडी प्रदान की जाएगी। इस भारी छूट के कारण किसानों पर खाद का आर्थिक बोझ काफी कम हो जाएगा और वे अधिक मात्रा में प्राकृतिक व जैविक उत्पादों का उपयोग अपनी फसलों में कर सकेंगे, जिससे मिट्टी की उपजाऊ क्षमता में भी सुधार होगा।
छोटे विक्रेताओं के लिए लाइसेंसिंग प्रक्रिया में छूट

जैविक खाद की उपलब्धता को आसान और सुलभ बनाने के लिए सरकार ने इसके बिक्री नियमों में भी बड़ा ढील दिया है। कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने बताया कि 5 किलोग्राम तक के छोटे पैकेटों में जैविक खाद बेचने वाले छोटे डीलरों और दुकानदारों को लाइसेंस लेने की जटिल प्रक्रिया से मुक्त करने का निर्णय लिया गया है।
विभाग द्वारा तय किए गए नए मानकों के अनुसार, जो विक्रेता 5 किलोग्राम तक के छोटे पैकेटों में कुल 10 मीट्रिक टन तक जैविक खाद का स्टॉक रखते हैं, उन्हें लाइसेंसिंग नियमों से छूट की मंजूरी दे दी गई है। इस नियम के दायरे में विभिन्न प्रकार की जैविक खादें शामिल हैं, जैसे:
फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर (FOM)
लिक्विड फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर (LFOM)
फॉस्फेट रिच ऑर्गेनिक मैन्योर (PROM)
सरकार का यह नियम जल्द ही पूरी तरह से लागू कर दिया जाएगा।
किसानों और स्थानीय व्यापार दोनों को मिलेगा फायदा

सरकार की इस दोहरी रणनीति से राज्य में जैविक उत्पादों की खपत और मांग में तेजी से बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। एक तरफ जहां किसानों को सीधे तौर पर सब्सिडी का फायदा मिलेगा और उनकी लागत घटेगी, वहीं दूसरी तरफ लाइसेंसिंग प्रक्रिया आसान होने से गांव और कस्बों के छोटे व्यापारियों के लिए जैविक खाद का कारोबार करना बेहद सरल हो जाएगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा और राज्य में पर्यावरण-अनुकूल कृषि मॉडल को मजबूती प्राप्त होगी।
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