Supreme Court Bail: इंडियन मुजाहिदीन के दो आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, 12 साल की हिरासत पर सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े मामले में दो आरोपियों को जमानत देते हुए उनकी लगभग 12 साल की लंबी हिरासत पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने मुकदमे में हुई देरी और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं पर भी टिप्पणी की। आखिर कोर्ट ने क्या कहा और इस फैसले का कानूनी महत्व क्या है, जानिए पूरी रिपोर्ट।

Supreme Court Bail

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 29, 2026

Supreme Court Bail:  सुप्रीम कोर्ट ने कथित इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) से जुड़े मामले में करीब 12 वर्षों से जेल में बंद मोहम्मद साकिब अंसारी और वकार अज़हर को जमानत देने का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मुकदमे में अत्यधिक देरी और आरोपियों की लंबे समय तक न्यायिक हिरासत संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से जुड़ा गंभीर विषय है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी आरोपी को केवल इसलिए अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रखा जा सकता क्योंकि मुकदमे की सुनवाई पूरी नहीं हो पा रही है।

अनुच्छेद 21 के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने 27 जुलाई को पारित आदेश में कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता भारतीय संविधान का मूल अधिकार है। अदालत के अनुसार, यदि किसी मामले की सुनवाई असामान्य रूप से लंबी अवधि तक लंबित रहती है और उसके जल्द पूरा होने की संभावना नहीं दिखती, तो आरोपी की निरंतर हिरासत उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन मानी जा सकती है। इसी आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को जमानत देने का फैसला सुनाया।

2014 से न्यायिक हिरासत में हैं दोनों आरोपी

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि मोहम्मद साकिब अंसारी और वकार अज़हर वर्ष 2014 से न्यायिक हिरासत में हैं। अदालत ने यह भी कहा कि इतने लंबे समय के बावजूद मुकदमे की सुनवाई धीमी गति से चल रही है और निकट भविष्य में इसके समाप्त होने की संभावना भी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में केवल मुकदमे के लंबित रहने के आधार पर किसी व्यक्ति को लगातार जेल में रखना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।

दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को दी थी चुनौती

दोनों आरोपियों ने अपनी जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इससे पहले अप्रैल 2026 में दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिकाओं को अस्वीकार कर दिया था। इसके बाद उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने मामले के तथ्यों और लंबी न्यायिक हिरासत को देखते हुए हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें राहत प्रदान की।

सह-आरोपी को पहले मिल चुकी है जमानत

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस तथ्य पर भी ध्यान दिया कि इसी मामले के एक सह-आरोपी को पहले ही जमानत दी जा चुकी है। अदालत ने कहा कि समान परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। साथ ही न्यायालय ने यह भी माना कि वर्तमान मामले में लंबे समय तक हिरासत जारी रखना उचित नहीं है, विशेषकर तब जब मुकदमे के शीघ्र समाप्त होने की संभावना नहीं दिख रही हो।

दिल्ली और राजस्थान के मामलों पर भी हुई चर्चा

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि दोनों आरोपियों के खिलाफ दिल्ली और राजस्थान में कुल तीन एफआईआर दर्ज हैं, जिनमें लगाए गए आरोप काफी हद तक एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। राजस्थान के एक मामले में वर्ष 2021 में ट्रायल कोर्ट ने दोनों को दोषी ठहराया था, लेकिन बाद में हाईकोर्ट ने उस सजा पर रोक लगा दी। वहीं दूसरे राजस्थान मामले में दोनों पहले से ही जमानत पर हैं। इन सभी परिस्थितियों पर विचार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने वर्तमान मामले में जमानत देने का निर्णय लिया।

ट्रायल कोर्ट को जमानत देने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि यदि दोनों आरोपी किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं, तो उचित शर्तों के साथ उन्हें जमानत पर रिहा किया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत का आदेश केवल इस मामले में लंबी हिरासत और सुनवाई में देरी को ध्यान में रखते हुए दिया गया है। इसे मामले के गुण-दोष पर अंतिम टिप्पणी नहीं माना जाना चाहिए।

सुनवाई में पूरा सहयोग करना होगा

अपने आदेश में सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों आरोपियों को निर्देश दिया कि वे मुकदमे की सुनवाई में पूरा सहयोग करेंगे। यदि वे अदालत की कार्यवाही में बाधा डालते हैं, जानबूझकर सुनवाई में देरी करते हैं या जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन करते हैं, तो अभियोजन पक्ष उनकी जमानत रद्द कराने के लिए संबंधित अदालत में आवेदन दे सकता है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला नवंबर 2011 में दर्ज एक आतंकवाद संबंधी जांच से जुड़ा है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उस समय कथित इंडियन मुजाहिदीन सदस्य मोहम्मद कतील सिद्दीकी को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियों के अनुसार, पूछताछ के दौरान कथित तौर पर राजस्थान स्थित एक मॉड्यूल के माध्यम से दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में आतंकी गतिविधियों की साजिश की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया और विस्फोटक तथा हथियार बरामद करने का दावा किया। मामले की सुनवाई अभी भी जारी है और अंतिम निर्णय ट्रायल कोर्ट द्वारा साक्ष्यों के आधार पर लिया जाएगा।

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