UP News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरु पूर्णिमा के पावन और पवित्र अवसर पर वाराणसी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए राज्य की राजनीति में एक बहुत बड़ा ऐलान किया है। सीएम योगी ने घोषणा की है कि अब से भदोही जिले को आधिकारिक तौर पर ‘संत रविदास नगर’ के नाम से जाना जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों द्वारा मुख्यमंत्री के इस बड़े कदम को साल 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के मद्देनजर उनके ‘मिशन दलित’ और सामाजिक समरसता की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री के इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर नामों बदलने और राजनीतिक बयानों का दौर तेज हो गया है।
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पूर्व समाजवादी पार्टी सरकार पर बोला सीधा हमला
वाराणसी में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी (सपा) की पूर्ववर्ती सरकार पर तीखा और सीधा हमला बोला। सीएम योगी ने आरोप लगाते हुए कहा कि सपा सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान एक बहुत बड़ा पाप किया था, जिसके तहत उन्होंने संत रविदास जी के नाम पर रखे गए जिले का नाम हटा दिया था। मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में कहा कि हमारी सरकार संत-महात्माओं और महापुरुषों के सम्मान के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है, इसलिए आज से भदोही को उसके पुराने और गौरवशाली नाम यानी ‘संत रविदास नगर’ के रूप में ही जाना जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसलों का किया जिक्र
इस दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार द्वारा देश के महान संतों और महापुरुषों को लगातार दिए जा रहे ऐतिहासिक सम्मान का भी विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने याद दिलाया कि किस प्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब के जालंधर एयरपोर्ट का नाम बदलकर संत रविदास जी के नाम पर रखा था। इसके अलावा, अयोध्या में नवनिर्मित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नामकरण महर्षि वाल्मीकि जी के नाम पर किया गया है। सीएम योगी ने कहा कि देश और प्रदेश की डबल इंजन सरकारें महापुरुषों के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने और उन्हें चिरस्थाई बनाने का कार्य कर रही हैं।
“समाज को बांटने वालों के आदर्श औरंगजेब और बाबर”
विपक्षी दलों और समाज में वैमनस्य फैलाने वाली ताकतों पर करारा प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जो लोग हमेशा जाति, धर्म और वर्ग के नाम पर समाज को बांटने की गंदी राजनीति करते हैं, उनके कभी भी संत रविदास या महर्षि वाल्मीकि जैसे महान संत आदर्श नहीं हो सकते। ऐसे लोगों के वैचारिक आदर्श और प्रेरणास्रोत तो इतिहास के क्रूर आक्रांता औरंगजेब और बाबर जैसे लोग रहे हैं, जिन्होंने हमेशा भारतीय संस्कृति को नष्ट करने का प्रयास किया।
संतों के आदर्शों पर चल रही है सरकार
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि वर्तमान सरकार पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ प्रदेश के विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत को संजोने का काम कर रही है। संत रविदास और अन्य महापुरुषों के विचार पूरे समाज के लिए मार्गदर्शक हैं। भदोही का नाम बदलकर पुनः ‘संत रविदास नगर’ करना न केवल उस क्षेत्र की जनता की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करना है, बल्कि यह महान संत के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि भी है। इस ऐतिहासिक घोषणा से पूरे क्षेत्र के लोगों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
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