Supreme Court: एनिमेशन फिल्म पर बैन की मांग खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

भगवान जगन्नाथ पर बनी एनिमेटेड फिल्म 'महाप्रभु जगन्नाथ' के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 29, 2026

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने भगवान जगन्नाथ के जीवन और स्वरूप पर आधारित एनिमेटेड फिल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ के प्रदर्शन पर रोक लगाने से साफ इंकार कर दिया है। अदालत ने बहुत ही कड़े शब्दों में यह स्पष्ट किया है कि कुछ लोगों की व्यक्तिगत भावनाओं और संवेदनशीलता के नाम पर कला, अभिव्यक्ति और रचनात्मकता को दबाया नहीं जा सकता है। यह पूरा मामला तब सामने आया जब श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) और ओडिशा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की थी। उनका तर्क था कि फिल्म में भगवान जगन्नाथ से जुड़ी पारंपरिक मान्यताओं के विपरीत दृश्यों को दिखाया गया है, जिससे बच्चों और समाज में गलत संदेश जा सकता है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने इन दलीलों को खारिज करते हुए फिल्म के देश भर में रिलीज होने का रास्ता पूरी तरह साफ कर दिया है।

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“अगर ऐसा हुआ तो रामायण और महाभारत का प्रसारण भी बंद करना पड़ेगा”

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन शामिल थे, ने इस मामले में बार-बार याचिकाएं दाखिल किए जाने पर गहरी नाराजगी और कड़ा एतराज जताया। जस्टिस नागरत्ना ने सुनवाई के दौरान अत्यंत सख्त टिप्पणी करते हुए याचिकाकर्ताओं से तीखा सवाल पूछा, “क्या आप हमसे यह कहलवाना चाहते हैं कि हिंदू देवी-देवताओं पर कोई फिल्म बन ही नहीं सकती?” उन्होंने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि यदि केवल दो-तीन लोगों की संवेदनशीलता के आधार पर ऐसी याचिकाएं बार-बार अदालत में आती रहीं, तो एक दिन ऐसा आदेश पारित करना पड़ेगा कि भारत में हिंदू देवी-देवताओं या पौराणिक कथाओं पर आधारित कोई भी कलाकृति या फिल्म बनाई ही न जाए। यदि इस तरह की रोक लगा दी गई, तो भविष्य में टेलीविजन चैनलों पर लोकप्रिय धारावाहिकों जैसे रामायण और महाभारत का प्रसारण भी बंद करना पड़ जाएगा, जो कि पूरी तरह से अनुचित है।

“एनिमेशन बच्चों को संस्कृति से जोड़ने का एक सशक्त जरिया”

याचिकाकर्ताओं द्वारा यह मुख्य आपत्ति जताई गई थी कि भगवान जगन्नाथ को एक एनिमेटेड चरित्र (Animation Character) के रूप में दिखाया जाना गलत है और भगवान को ‘डोरेमोन’ या ‘स्पाइडर-मैन’ जैसे कार्टून पात्रों की तरह पेश नहीं किया जा सकता।

इस दलील को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कहा कि आज के दौर में एनिमेशन तकनीक बच्चों को उनकी संस्कृति, इतिहास और पौराणिक कथाओं से जोड़ने का एक बेहद आधुनिक और प्रभावी जरिया बन चुकी है। अदालत ने माना कि इस प्रकार के आधुनिक चित्रण या एनिमेशन माध्यम से भगवान जगन्नाथ के प्रति करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था, श्रद्धा और विश्वास में कोई कमी नहीं आती है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्माता चाहें तो वे अपने स्वविवेक से फिल्म में कुछ मामूली संशोधन कर सकते हैं, लेकिन अदालत कलात्मक और रचनात्मक स्वतंत्रता के मामलों में किसी भी प्रकार का अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करेगी।

रथ यात्रा का समापन और फिल्म रिलीज का मार्ग प्रशस्त

गौरतलब है कि इससे पहले 17 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने पुरी में प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा के समापन के बाद इस फिल्म को सिनेमाघरों में रिलीज करने की अनुमति दी थी। चूँकि 28 जुलाई को रथ यात्रा का भव्य समापन हो चुका था, इसलिए ओडिशा सरकार ने कोर्ट के पिछले आदेश पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के जजों ने सरकार के इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया। अदालत के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब देश भर में इस एनिमेटेड फिल्म के प्रदर्शन की सभी कानूनी बाधाएं समाप्त हो गई हैं।

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