Sunil Anand Death: हिंदी सिनेमा के सदाबहार लीजेंड्री अभिनेता देव आनंद के परिवार से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। दिवंगत अभिनेता देव आनंद और अभिनेत्री कल्पना कार्तिक के इकलौते बेटे सुनील आनंद का निधन हो गया है। सुनील आनंद ने 70 वर्ष की उम्र में लंदन की धरती पर अंतिम सांस ली। वह पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे और बीमारी से जूझ रहे थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 26 जुलाई को उन्हें दिल का दौरा (हार्ट अटैक) आया, जो उनके निधन का कारण बना। उनके जाने से फिल्म जगत और परिवार में शोक की लहर दौड़ गई है।
परिवार ने जारी किया आधिकारिक बयान
सुनील आनंद के निधन की पुष्टि करते हुए उनकी भतीजी जीना नारंग ने परिवार की तरफ से एक आधिकारिक बयान जारी किया है। इस दुखद घड़ी में परिवार ने मीडिया और प्रशंसकों से प्राइवेसी (निजीता) बनाए रखने की पुरजोर अपील की है। परिवार ने अपने बयान में सुनील के निधन के बाद दुनिया भर से मिल रहे प्यार, दुआओं और समर्थन के लिए सभी का आभार व्यक्त किया है। परिवार ने कहा कि वे सुनील के इस अचानक दुनिया से चले जाने से बेहद आहत और दुखी हैं। हालांकि, अभी तक परिवार की ओर से सुनील आनंद के अंतिम संस्कार (अंतिम विदाई) को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है।
सुनील आनंद का जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि
सुनील आनंद का जन्म 30 जून 1956 को स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख शहर में हुआ था। उनके पिता देव आनंद भारतीय सिनेमा के सबसे महान और लोकप्रिय अभिनेताओं में गिने जाते हैं, वहीं उनकी माता कल्पना कार्तिक ने भी अपने दौर में ‘बाजी’, ‘टैक्सी ड्राइवर’ और ‘हाउस नंबर 44’ जैसी कई शानदार और सुपरहिट फिल्मों में अपनी अदाकारी का जादू बिखेरा था। फिल्मी और समृद्ध पृष्ठभूमि में जन्म लेने वाले सुनील की शुरुआती परवरिश काफी खास माहौल में हुई थी।
शिक्षा, अभिनय और फिल्म निर्माण का सफर
सुनील आनंद ने अपनी उच्च शिक्षा अमेरिका से पूरी की। उन्होंने वॉशिंगटन डीसी की प्रसिद्ध अमेरिकन यूनिवर्सिटी से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA/Business Administration) की डिग्री हासिल की। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने फिल्मों की दुनिया में कदम रखा। शुरुआत में उन्होंने कई प्रोजेक्ट्स में अपने पिता देव आनंद को असिस्ट किया, ताकि फिल्म मेकिंग की बारीकियों को समझ सकें।
अभिनय की शुरुआत: साल 1984 में रिलीज हुई फिल्म ‘आनंद और आनंद’ के जरिए उन्होंने बॉलीवुड में बतौर अभिनेता डेब्यू किया। इस फिल्म का निर्देशन और निर्माण खुद उनके पिता देव आनंद ने किया था, और इसमें पिता-पुत्र की जोड़ी को एक साथ पर्दे पर देखा गया था।
अन्य फिल्में: इसके बाद वे साल 1986 में आई फिल्म ‘कार थीफ’ में नजर आए, जिसमें उनके साथ अभिनेत्री विजयता पंडित मुख्य भूमिका में थीं। उन्होंने फिल्म ‘मैं तेरे लिए’ में भी अभिनय किया।
हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद सुनील आनंद को वो मुकाम और कमर्शियल सफलता नहीं मिली, जिसकी उन्हें तलाश थी। फिल्मों के बॉक्स ऑफिस पर सफल न होने के कारण उन्होंने अभिनय से धीरे-धीरे दूरी बना ली और फिल्म निर्माण (फिल्ममेकिंग) में अपनी किस्मत आजमाने लगे। उन्होंने साल 2001 में मार्शल आर्ट्स पर आधारित फिल्म ‘मास्टर’ का निर्देशन किया। इसके अलावा उन्होंने ‘वागाटोर मिक्सर’ नामक एक अंग्रेजी फिल्म की भी घोषणा की थी, हालांकि वह फिल्म कभी रिलीज नहीं हो सकी।
पिता की विरासत को आगे बढ़ाया
पिता देव आनंद के निधन के बाद सुनील आनंद ने परिवार के प्रतिष्ठित बैनर ‘नवकेतन फिल्म्स’ की जिम्मेदारी संभाली और अपने पिता की अमूल्य सिनेमाई विरासत को पूरी निष्ठा से संजोए रखा। साल 2008 में कान फिल्म फेस्टिवल (Cannes Film Festival) के दौरान देव आनंद की क्लासिक और культовой फिल्म ‘गाइड’ की स्पेशल स्क्रीनिंग कराने में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। सुनील आनंद का जाना फिल्म इंडस्ट्री के एक स्वर्णिम अध्याय के और करीब से जुड़ने वाले शख्स का विदा होना है।










