Middle East Crisis : हूती संकट में सऊदी अरब ने इजराइल से मांगी मदद, पाकिस्तान ने तैनाती से किया इनकार

हूती संकट के बीच सऊदी अरब के इजराइल से मदद मांगने की खबर ने मध्य-पूर्व की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। दूसरी ओर, पाकिस्तान ने कथित सैन्य तैनाती से इनकार किया है। आखिर सऊदी को इजराइल की मदद की जरूरत क्यों पड़ी और पाकिस्तान ने दूरी क्यों बनाई? जानिए पूरी कहानी।

Middle East Crisis

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 15, 2026

Middle East Crisis :  यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई के बीच सऊदी अरब की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, रियाद को अपने प्रमुख सहयोगियों से अपेक्षित सैन्य मदद नहीं मिली है। ऐसे में सऊदी अरब ने कथित तौर पर इजराइल से मदद लेने की कोशिश की है। यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम है क्योंकि सऊदी अरब और इजराइल के बीच अभी औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं।

रेड सी और बाब अल-मंदेब में बढ़ा हूतियों का दबाव

पिछले सप्ताह हूती लड़ाकों की गतिविधियों के बाद यमन के रेड सी तट और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास सुरक्षा स्थिति गंभीर होने की खबरें सामने आई हैं। यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हूतियों के हमलों और बढ़ते प्रभाव ने सऊदी अरब सहित क्षेत्रीय देशों के सामने समुद्री सुरक्षा को लेकर नई चुनौती खड़ी कर दी है।

पाकिस्तान से अपेक्षित सैन्य सहयोग नहीं मिलने की खबर

रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सऊदी अरब ने अपने करीबी सहयोगी पाकिस्तान से भी मदद की उम्मीद की थी। हालांकि, पाकिस्तान ने यमन में हूतियों के खिलाफ लड़ाई के लिए अपनी सेना या सैन्य संसाधनों को विदेशी धरती पर तैनात करने से इनकार किया है। पाकिस्तान का यह रुख रियाद के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि दोनों देशों के बीच लंबे समय से रणनीतिक और रक्षा संबंध रहे हैं।

अमेरिका और ब्रिटेन भी सीधे हमले से पीछे

सऊदी अरब की मुश्किल इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि अमेरिका और ब्रिटेन ने कथित तौर पर हूतियों के खिलाफ सीधे हमले करने से दूरी बनाई है। ऐसे में रियाद के सामने उपलब्ध सैन्य विकल्प सीमित होते जा रहे हैं। यमन में संघर्ष का विस्तार होने और समुद्री मार्गों पर खतरा बढ़ने से सऊदी अरब को अपनी सुरक्षा रणनीति पर दोबारा विचार करना पड़ रहा है।

अमेरिकी Centcom की मध्यस्थता से इजराइल से बातचीत

इजराइल के अखबार ‘द जेरूसलम पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब और इजराइल के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी Centcom की मध्यस्थता में बातचीत हुई। रिपोर्ट में कहा गया कि बातचीत का मुख्य उद्देश्य हूती सैन्य गतिविधियों से जुड़े खतरों के संबंध में खुफिया जानकारी साझा करने और सऊदी अरब की रक्षा क्षमता को मजबूत करने से जुड़ा था।

MBS ने खाड़ी देशों और मिस्र से भी मांगी मदद

इजराइली अखबार ‘इजराइल हायोम’ ने भी इस घटनाक्रम को लेकर अलग रिपोर्ट प्रकाशित की। इसके अनुसार, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने हूती हमलों से निपटने के लिए खाड़ी देशों और मिस्र से सहायता मांगी थी। रिपोर्ट में दावा किया गया कि रियाद क्षेत्रीय सहयोगियों को साथ लाने की कोशिश कर रहा है, ताकि बाब अल-मंदेब क्षेत्र में बढ़ते खतरे का सामना किया जा सके।

Centcom के जरिए इजराइल से अप्रत्यक्ष संपर्क

रिपोर्ट के मुताबिक, मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी Centcom के माध्यम से इजराइल से अप्रत्यक्ष रूप से संपर्क किया। कथित तौर पर सऊदी पक्ष ने बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से जुड़े खतरों और हूतियों की गतिविधियों पर खुफिया जानकारी हासिल करने में सहयोग मांगा। यदि यह रिपोर्ट सही है तो यह दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे बढ़ते रणनीतिक संपर्क का संकेत हो सकता है।

इजराइल को मान्यता नहीं देता सऊदी अरब

सऊदी अरब और इजराइल के बीच संबंधों का यह पहलू सबसे ज्यादा चर्चा में है। रियाद ने अब तक इजराइल को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में औपचारिक मान्यता नहीं दी है और दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध भी स्थापित नहीं हुए हैं। ऐसे में सुरक्षा जरूरतों के कारण अप्रत्यक्ष संपर्क की खबर मध्य पूर्व की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव के संकेत के रूप में देखी जा रही है।

हूती संकट ने बदले मध्य पूर्व के समीकरण

सऊदी अरब का कथित तौर पर इजराइल की ओर मदद के लिए देखना क्षेत्रीय राजनीति में बदलते समीकरणों को दर्शाता है। यदि रियाद और तेल अवीव के बीच सुरक्षा सहयोग बढ़ता है, तो इसका असर ईरान, यमन, खाड़ी देशों और अमेरिका की रणनीति पर भी पड़ सकता है। फिलहाल हूती हमलों के बीच सऊदी अरब अपने सहयोगियों से अपेक्षित समर्थन जुटाने और रेड सी क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है।

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