Punjab News: पंजाब सरकार द्वारा राज्य के नागरिकों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे और प्रचार इन दिनों जोरों पर हैं। हर सरकारी मंच और विज्ञापन में इस बात का ढिंढोरा पीटा जा रहा है कि आम जनता को बिजली बिलों से राहत मिल चुकी है। लेकिन, आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले ही राज्य की जनता को एक बड़ा झटका लगा है। एक साथ चार-चार महीने के बिजली बिल हाथ में आते ही पंजाब के उपभोक्ता सदमे में हैं। सरकार की यह तथाकथित सुविधा अब जनता के लिए एक बड़ी दुविधा और मानसिक परेशानी का सबब बनती जा रही है।
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मीटर रीडर्स की हड़ताल और ‘जीरो बिल’ का भ्रम

इस पूरी समस्या की शुरुआत कुछ महीने पहले हुई हड़ताल से जुड़ी है। करीब दो-तीन महीने पहले हुई मीटर रीडर्स की हड़ताल के दौरान घरों के बिजली मीटरों की रीडिंग नहीं ली जा सकी थी। इसके चलते बिजली बोर्ड ने एवरेज (औसत) खपत के आधार पर बिल जेनरेट किए। कई उपभोक्ताओं के फोन पर मैसेज भी आए कि उनका दो महीने का बिजली बिल ‘जीरो’ है, जिससे लोगों को लगा कि उन्हें सरकार की मुफ्त बिजली योजना का पूरा लाभ मिल रहा है। लेकिन जैसे ही हड़ताल समाप्त हुई और मीटर रीडर्स ने घरों पर पहुंचकर चार महीने की एकत्रित रीडिंग ली, तो आंकड़े पूरी तरह बदल गए।
कैसे बेकार हो गई 600 यूनिट की फ्री बिजली की छूट?

पंजाब सरकार प्रति माह 300 यूनिट यानी दो महीने में 600 यूनिट मुफ्त बिजली देने का दावा करती है। लेकिन चार महीने की एक साथ रीडिंग होने के कारण कुल खपत 1200 मुफ्त यूनिट की सीमा को पार कर गई। जैसे ही कुल खपत इस दायरे से बाहर हुई, उपभोक्ताओं को सरकार द्वारा दी जाने वाली वह छूट मिलती दिखाई नहीं दी, जिसके वे उम्मीद कर रहे थे। अब जनता को चार महीने का संचयी बिल चुकाना पड़ रहा है, जिसमें यूनिट्स की संख्या अधिक होने के कारण स्लैब बदल गए हैं और बिल भारी-भरकम रकम के रूप में सामने आए हैं।
दफ्तरों के चक्कर काटती जनता और झूठे आश्वासन
इस गंभीर समस्या को लेकर जब उपभोक्ता अपने बढ़े हुए बिजली बिल ठीक करवाने के लिए बिजली बोर्ड के सब-डिवीजन ऑफिसों के चक्कर काट रहे हैं, तो उन्हें निराशा हाथ लग रही है। हालांकि, स्थिति को संभालते हुए पंजाब सरकार के मंत्रियों और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा की ओर से यह बयान जरूर आया था कि उपभोक्ता बिल ठीक होने तक थोड़ा इंतजार करें। लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त यह है कि बिजली बोर्ड के कर्मचारियों के पास सरकार की तरफ से कोई भी आधिकारिक लिखित आदेश नहीं पहुँचा है। अधिकारियों का साफ कहना है कि बिल पूरे ही भरने होंगे, जिससे जनता अपने आपको ठगा हुआ महसूस कर रही है।
बिजली के कट और राजनीतिक विरोध से गरमाया माहौल

बढ़े हुए बिजली बिलों की मार झेल रही जनता पहले से ही परेशान है, ऊपर से राज्य में लगातार हो रहे बिजली के अघोषित कटों ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राज्य की सभी विपक्षी पार्टियाँ आक्रामक हो गई हैं और आम जनता के साथ मिलकर सरकार व बिजली बोर्ड के खिलाफ प्रदर्शन कर रही हैं। इसके बावजूद सरकार की तरफ से कोई ठोस और त्वरित कार्रवाई होती नहीं दिख रही है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस गंभीर वित्तीय संकट और बिजली बिलों की समस्या का समाधान कब तक निकालती है, वरना जनता के सिर पर भारी-भरकम बिलों की यह तलवार हमेशा लटकती रहेगी।
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