Punjab News: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) और राज्य सरकार को एक बड़ा झटका देते हुए कर्मचारियों के पक्ष में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने कर्मचारियों और पेंशनर्स को बकाया महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) जारी करने के सिंगल जज के आदेश को चुनौती देने वाली अपील को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही, कोर्ट ने बहुत ही कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि जब तक सभी कर्मचारियों और पेंशनर्स के बकाये का पूरा भुगतान नहीं हो जाता, तब तक राज्य सरकार प्रिंट या सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियान (Advertisement Campaign) जैसे कोई भी गैर-जरूरी खर्च नहीं करेगी।
वित्तीय संकट को आधार बनाकर भुगतान से नहीं बचा जा सकता
एक्टिंग चीफ जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि कर्मचारियों और पेंशनर्स को उनके जायज सर्विस बेनिफिट्स और बकाये से वंचित करने के लिए सरकारी खजाने की कमी या पैसे की तंगी को बहाना नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने माना कि कर्मचारियों का मेहनताना और उनके अधिकार सर्वोपरि हैं और सरकार वित्तीय संकट का हवाला देकर अपने दायित्वों से पीछे नहीं हट सकती।
सिंगल जज का फैसला और लिक्विडेशन स्कीम रद्द
गौरतलब है कि इससे पहले सिंगल जज की बेंच ने राज्य सरकार की 18 फरवरी 2025 की ‘लिक्विडेशन स्कीम’ को रद्द कर दिया था। इस स्कीम के तहत सरकार उम्र के आधार पर किश्तों में पेंशन का बकाया देने की बात कह रही थी, जिसे अदालत ने मनमाना और संविधान की धारा 14 (समानता के अधिकार) का उल्लंघन करार दिया था। सिंगल जज ने कर्मचारियों को बकाया डीए तुरंत जारी करने के निर्देश दिए थे, जिसके खिलाफ सरकार ने अपील दायर की थी।
दोनों पक्षों की दलीलें और कानूनी बहस
राज्य सरकार की ओर से पेश हुए एडवोकेट जनरल (AG) मनिंदरजीत सिंह बेदी ने दलील दी कि सिंगल जज का निर्देश न्याय के खिलाफ था। उन्होंने तर्क दिया कि आदेश पारित करते समय सिंगल बेंच के पास संबंधित वैधानिक संस्थाओं और कॉर्पोरेशनों का रोस्टर था, न कि पूरे राज्य के सर्विस मामलों का। इसलिए यह आदेश कथित तौर पर बिना अधिकार क्षेत्र के पास किया गया था, जो कानूनी रूप से मान्य नहीं है।
दूसरी ओर, कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व कर रहे सीनियर वकील ने इन सभी दलीलों का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि रोस्टर आपस में ओवरलैप हो रहे थे, इसलिए तकनीकी आपत्तियां बेबुनियाद हैं। इसके अलावा, PSPCL ने खुद यह स्वीकार किया है कि वे राज्य सरकार के वित्तीय और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करते हैं, ऐसी स्थिति में राज्य सरकार के खिलाफ निर्देश जारी करना पूरी तरह से न्यायसंगत है।
हाई कोर्ट का कड़ा संदेश
हाई कोर्ट के इस फैसले से पंजाब के हजारों पावरकॉम कर्मचारियों और पेंशनर्स में भारी खुशी की लहर दौड़ गई है। अदालत के इस आदेश ने यह साफ कर दिया है कि सरकारें जनता के धन का उपयोग अपनी पब्लिसिटी या विज्ञापनों पर तब तक नहीं कर सकतीं, जब तक कि उनके अपने कर्मचारियों के कानूनी और वित्तीय बकाये लंबित पड़े हों। यह फैसला प्रशासनिक पारदर्शिता और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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