Asian Games 2026: भारतीय खेलों के इतिहास में कई ऐसे दर्दनाक पल दर्ज हैं, जहां खिलाड़ी अपनी मेहनत से नहीं बल्कि नियमों और किस्मत के फेर से मात खा जाते हैं। पेरिस ओलंपिक 2024 में विनेश फोगाट के साथ जो हुआ था, कुछ वैसा ही दिल दहला देने वाला वाकया एशियन गेम्स के मैट पर देखने को मिला है। मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) इवेंट में भारत की अनुभवी फाइटर सुचिका तरियाल को एक विवादास्पद फैसले और महज 700 ग्राम वजन के अंतर के कारण स्वर्ण पदक की रेस से बाहर होना पड़ा। इस घटना ने एक बार फिर खेल प्रेमियों के जेहन में पुराना दर्द ताजा कर दिया है।
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नियमों की मार और सेमीफाइनल का रोमांचक मुकाबला

हरियाणा की 36 वर्षीय अनुभवी फाइटर सुचिका तरियाल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए क्वार्टर फाइनल में मंगोलिया की अल्तानचिमेग बैगलामा को 2-0 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया था। सेमीफाइनल में सुचिका का सामना सिंगापुर की खिलाड़ी हुई हून टियो से था। पहले राउंड में सिंगापुर की खिलाड़ी का पलड़ा भारी रहा, लेकिन दूसरे राउंड में सुचिका ने जबरदस्त वापसी की।
निर्धारित समय तक दोनों खिलाड़ियों के बीच मुकाबला बराबरी पर रहा, जिसके बाद मैच को एक मिनट के अतिरिक्त राउंड में ले जाया गया। अतिरिक्त राउंड में दोनों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी और मुकाबला समाप्त होने पर दोनों ही जीत का जश्न मनाने लगीं। हालांकि, रेफरी ने शुरुआती फैसले में सिंगापुर की टियो को विजेता घोषित कर दिया।
700 ग्राम वजन और विवादास्पद फैसला
इस फैसले के खिलाफ भारतीय टीम ने कड़ी आपत्ति जताई और चुनौती दी, जिसके बाद खेल अधिकारियों ने नियमों के तहत रिव्यू किया। भारतीय टीम की अपील के बाद मुकाबला ड्रॉ घोषित किया गया। इसके बाद विजेता का फैसला करने के लिए दोनों एथलीटों के सुबह के वजन (Weigh-in) को आधार बनाया गया।
एमएमए खेल महासंघ के अध्यक्ष निखिल कुंडे के अनुसार, सिंगापुर की खिलाड़ी का वजन सुचिका तरियाल से लगभग 700 ग्राम कम था। इसी वजन के मामूली अंतर के नियम के कारण टियो को विजेता घोषित कर दिया गया और सुचिका को ब्रॉन्ज मेडल से ही संतोष करना पड़ा। इस अप्रत्याशित फैसले से सुचिका का दिल टूट गया और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।
संघर्षों से भरा सुचिका तरियाल का प्रेरणादायक सफर

सुचिका तरियाल की यह हार भले ही निराशाजनक रही हो, लेकिन उनका खेल तक का सफर बेहद संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायक रहा है। सुचिका ने मात्र 12 साल की कम उम्र में सड़क पर उत्पीड़न (उत्पीड़न की घटना) का सामना करने के बाद आत्मरक्षा के लिए मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग लेनी शुरू की थी।
अपनी कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने कई अलग-अलग मार्शल आर्ट विधाओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने साल 2022 के राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो और 2023 के एशियाई खेलों में कुराश प्रतियोगिता में देश का मान बढ़ाया था।
एशियन गेम्स में सुचिका तरियाल के साथ हुआ यह वाकया विनेश फोगाट की याद दिलाता है, जहां मामूली अंतर ने एक चैंपियन खिलाड़ी के वर्षों की मेहनत पर पानी फेर दिया। भले ही सुचिका सोना जीतने से चूक गईं और उन्हें कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा, लेकिन उनकी जुझारू शैली और मैदान पर दिखाई गई जिजीविषा ने साबित कर दिया कि वह एक सच्चे योद्धा की तरह लड़ीं। देश को उनकी इस उपलब्धि और संघर्ष पर हमेशा गर्व रहेगा।
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