Punjab Assembly: मंत्री हरपाल चीमा ने कांग्रेस और अकाली-भाजपा पर साधा निशाना, कहा- इंसाफ दिलाने में सभी विफल

चंडीगढ़. पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को बेअदबी और पूर्व दौर में कथित मानवाधिकार उल्लंघन का मुद्दा सदन में गूंजा। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने शिरोमणि अकाली दल के विधायक मनप्रीत सिंह अयाली के आरोपों का तीखा जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस शासनकाल में सिखों पर अत्याचार हुए, लेकिन उस समय अकाली दल के कई नेता भी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। उन्होंने कहा कि आज बयान देना आसान है, जबकि सत्ता में रहते हुए इस मुद्दे पर प्रभावी आवाज नहीं उठाई गई। चीमा ने कहा कि अयाली आज जसवंत सिंह खालड़ा का मुद्दा

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Published On :

अगस्त 3, 2026

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चंडीगढ़.

पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को बेअदबी और पूर्व दौर में कथित मानवाधिकार उल्लंघन का मुद्दा सदन में गूंजा। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने शिरोमणि अकाली दल के विधायक मनप्रीत सिंह अयाली के आरोपों का तीखा जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस शासनकाल में सिखों पर अत्याचार हुए, लेकिन उस समय अकाली दल के कई नेता भी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।

उन्होंने कहा कि आज बयान देना आसान है, जबकि सत्ता में रहते हुए इस मुद्दे पर प्रभावी आवाज नहीं उठाई गई। चीमा ने कहा कि अयाली आज जसवंत सिंह खालड़ा का मुद्दा उठा रहे हैं, लेकिन जब अकाली दल-भाजपा सरकार सत्ता में थी तब उन्होंने इस मामले में उतनी मुखरता नहीं दिखाई।

भाजपा-अकाली सरकार वादों पर खरी नहीं उतरी
वित्त मंत्री ने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान पंजाब में गंभीर घटनाएं हुईं और अलग-अलग समुदायों के बीच तनाव का माहौल बनाया गया। उस दौर के पीड़ितों को न्याय मिलना चाहिए था, लेकिन बाद में सत्ता में आई अकाली दल-भाजपा सरकार भी अपने वादों पर खरी नहीं उतरी। उन्होंने कहा कि चुनावी घोषणा पत्र में न्याय दिलाने का वादा किया गया था, लेकिन सरकार बनने के बाद इस दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए। चीमा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के साथ-साथ अकाली दल-भाजपा सरकार भी बेअदबी के मामलों और अन्य संवेदनशील प्रकरणों में पीड़ितों को न्याय दिलाने में विफल रही। उन्होंने कहा कि जिन बेगुनाह लोगों ने वर्षों तक इंसाफ का इंतजार किया, उन्हें किसी भी सरकार ने राहत नहीं दिलाई। ऐसे में केवल कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।

संवेदनशील मुद्दे पर हुई तीखी नोकझोंक
उन्होंने कहा कि शून्यकाल में सामान्य तौर पर जवाब नहीं दिया जाता, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने अपना पक्ष रखना जरूरी समझा। उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसे मामलों में सच्चाई सामने लाना और पीड़ितों को न्याय दिलाना है। सदन में इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। सरकार और विपक्ष ने एक-दूसरे पर राजनीतिक लाभ के लिए संवेदनशील मुद्दों का इस्तेमाल करने के आरोप लगाए, जिससे विधानसभा का माहौल कुछ समय तक गर्म रहा।

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