Operation Mongoose: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर क्यूबा के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि क्यूबा को अब वॉशिंगटन के साथ समझौता (डील) करना ही होगा, अन्यथा उसे विनाशकारी आर्थिक परिणामों का सामना करना पड़ेगा। रविवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर ट्रंप ने लिखा कि अब समय समाप्त हो रहा है और क्यूबा को वेनेजुएला से मिलने वाला तेल और पैसा पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। ट्रंप का मानना है कि वेनेजुएला के समर्थन के बिना क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार ताश के पत्तों की तरह ढहने की कगार पर है। उन्होंने क्यूबा के नेतृत्व को सलाह दी कि इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, उन्हें अमेरिका की शर्तों पर मेज पर आना चाहिए।
मार्को रूबियो की आक्रामक रणनीति और सत्ता परिवर्तन के संकेत
इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है। रूबियो, जिनके पूर्वज क्यूबा से आए थे, इस द्वीप देश की सरकार के सबसे मुखर विरोधियों में से एक रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया है कि अमेरिका अब हाथ पर हाथ धरकर बैठने के मूड में नहीं है। रूबियो ने रहस्यमयी अंदाज में कहा कि हवाना की सरकार को अपनी सुरक्षा की चिंता करनी चाहिए क्योंकि अमेरिका के अगले कदम काफी प्रभावी हो सकते हैं। दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप ने सोशल मीडिया पर उन सुझावों का भी समर्थन किया है जिनमें रूबियो को भविष्य में क्यूबा का नेतृत्व करते हुए दिखाया गया है। रूबियो के लिए क्यूबा में सत्ता परिवर्तन केवल एक राजनीतिक लक्ष्य नहीं, बल्कि एक व्यक्तिगत मिशन की तरह है।
वेनेजुएला में ऑपरेशन और क्यूबा की लाइफलाइन पर प्रहार
क्यूबा पर अचानक बढ़े इस दबाव के पीछे वेनेजुएला में हाल ही में हुआ एक बड़ा सैन्य ऑपरेशन है। अमेरिकी कार्रवाई के कारण वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ा जाना क्यूबा के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। दशकों से क्यूबा अपनी अर्थव्यवस्था और ऊर्जा जरूरतों के लिए वेनेजुएला के सस्ते तेल पर निर्भर रहा है। बदले में क्यूबा, वेनेजुएला को सुरक्षा सलाहकार और मेडिकल स्टाफ उपलब्ध कराता था। अब, वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज पर ट्रंप द्वारा तेल की सप्लाई अमेरिका की ओर मोड़ने के दबाव के बाद क्यूबा एक भीषण ऊर्जा संकट में फंस गया है। बिना ईंधन और वित्तीय सहायता के क्यूबा की अर्थव्यवस्था का पहिया थमने के कगार पर है।
इतिहास के पन्ने: सीआईए की कास्त्रो को हटाने की अजीबोगरीब साजिशें
अमेरिका और क्यूबा के बीच यह दुश्मनी नई नहीं है। शीत युद्ध के दौर से ही अमेरिका ने क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो को सत्ता से हटाने के लिए सैकड़ों प्रयास किए। डीक्लासिफाई किए गए दस्तावेजों के अनुसार, सीआईए ने कास्त्रो की हत्या के लिए ऐसी साजिशें रची थीं जो किसी काल्पनिक फिल्म की तरह लगती हैं। इसमें ‘विस्फोटक सिगार’ से लेकर ‘जहरीले मिल्कशेक’ तक शामिल थे। इतना ही नहीं, कास्त्रो को डाइविंग का शौक था, इसलिए उनके डाइविंग सूट में बैक्टीरिया लगाने और समुद्र में ‘विस्फोटक सीप’ (Explosive Seashells) रखने की योजनाएं भी बनाई गई थीं। हालाँकि, इनमें से अधिकांश योजनाएं अव्यावहारिक होने के कारण कभी सफल नहीं हो सकीं, लेकिन ये अमेरिका के दशकों पुराने संकल्प को दर्शाती हैं।
रूस, चीन और क्यूबा का बदलता वैश्विक समीकरण
यद्यपि अमेरिका का दबाव चरम पर है, लेकिन आज का क्यूबा 1990 के दशक (सोवियत संघ के पतन के बाद) जैसा पूरी तरह अकेला नहीं है। हालांकि वेनेजुएला उसका सबसे बड़ा सहयोगी रहा है, लेकिन हवाना ने पिछले कुछ वर्षों में रूस और चीन के साथ अपने संबंधों को काफी मजबूत किया है। रूस और चीन उसे सामरिक और आर्थिक मदद देते रहते हैं, जिससे उसे अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच कुछ राहत मिलती है। ट्रंप और रूबियो की रणनीति अब इन वैश्विक शक्तियों के प्रभाव को कम करते हुए क्यूबा को चारों तरफ से घेरने की है। वॉशिंगटन का मानना है कि यदि तेल की सप्लाई स्थायी रूप से काट दी जाए, तो बाहरी मदद भी सरकार को बचाने में नाकाफी होगी।
क्या फिर दोहराया जाएगा इतिहास? 2019 की विफलता से सबक
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप और रूबियो ने मिलकर क्यूबा के सहयोगियों को निशाना बनाया है। 2019 में भी वेनेजुएला में मादुरो को हटाने की एक बड़ी कोशिश की गई थी, लेकिन वह विफल रही। उस समय क्यूबा की खुफिया एजेंसी ने मादुरो को अमेरिकी साजिश के बारे में पहले ही आगाह कर दिया था। जॉन बोल्टन की किताब के अनुसार, क्यूबा के एजेंट्स ने वेनेजुएला में रहकर मादुरो की सत्ता की रक्षा की थी। अब, जबकि मादुरो सीन से बाहर हैं, अमेरिका को लगता है कि क्यूबा अपनी ‘ढाल’ खो चुका है। लेकिन इतिहास गवाह है कि क्यूबा की सरकार ने दशकों के डिप्लोमैटिक आइसोलेशन और कड़े व्यापारिक प्रतिबंधों के बावजूद खुद को बचाए रखा है।
समय की कसौटी पर क्यूबा और अमेरिका के संबंध
मार्को रूबियो का कहना है कि “ऐसी चीजों में समय लगता है”, जो यह संकेत देता है कि अमेरिका एक लंबी और सुनियोजित लड़ाई की तैयारी कर रहा है। क्यूबा के लिए मौजूदा स्थिति ‘करो या मरो’ जैसी है। एक तरफ ट्रंप की आर्थिक नाकेबंदी और तेल संकट है, तो दूसरी तरफ दशकों पुरानी क्रांतिकारी विचारधारा। क्या क्यूबा झुककर अमेरिका के साथ कोई नई डील करेगा, या फिर रूस-चीन के भरोसे इस नए संकट को भी झेल जाएगा? आने वाले कुछ महीनों में वेनेजुएला से तेल की आपूर्ति का रुकना और अमेरिका की नई सैन्य-कूटनीतिक चालें इस द्वीप राष्ट्र का भविष्य तय करेंगी।
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