UP News: उत्तर प्रदेश में युवाओं को सरकारी नौकरी देने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। अखिलेश यादव के तंज पर पलटवार करते हुए सीएम योगी ने कहा कि सरकार लगातार युवाओं को नियुक्ति पत्र दे रही है और अगले छह महीने में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने का लक्ष्य पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आंकड़े गिनते जाइए, सरकार एक लाख से कम नहीं बल्कि इससे ज्यादा युवाओं को नियुक्ति पत्र देने जा रही है।
818 चयनित अभ्यर्थियों को मिले नियुक्ति पत्र

बताते चले कि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को तीन अलग-अलग विभागों में चयनित 818 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस दौरान उन्होंने कहा कि नियुक्ति की प्रक्रिया लगातार जारी रहेगी। मुख्यमंत्री के मुताबिक, 20 सितंबर को भी करीब एक हजार चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य पारदर्शी तरीके से युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
साढ़े 9 लाख युवाओं को नौकरी देने का दावा
सीएम योगी ने कहा कि अब तक करीब साढ़े 9 लाख युवाओं को विभिन्न विभागों में पारदर्शी तरीके से नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि इसका असर प्रदेश में दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अकेले उत्तर प्रदेश पुलिस में करीब 36 हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र दिया जाना है, जबकि चयनित अभ्यर्थियों का मेडिकल परीक्षण चल रहा है।
पुलिस, होमगार्ड और आयोगों में हजारों भर्तियों का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि होमगार्ड में करीब 41 से 42 हजार पदों के लिए परीक्षाएं हो चुकी हैं। वहीं, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से अगले छह महीने में 25 से 30 हजार युवाओं को रोजगार के अवसर मिलने की बात कही। उत्तर प्रदेश शिक्षा चयन आयोग से अगले तीन से चार महीनों में करीब 20 से 25 हजार युवाओं को अवसर मिलने की उम्मीद जताई गई है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग की परीक्षाओं के परिणाम आने के बाद 15 से 16 हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जाने की बात भी मुख्यमंत्री ने कही।
अखिलेश यादव के तंज पर योगी का जवाब

दरअसल, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री के अगले छह महीने में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने के दावे पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था कि जनवरी के बाद आचार संहिता लग जाएगी, ऐसे में एक लाख नौकरियां कैसे दी जाएंगी। इसी टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जो लोग खुद कुछ नहीं कर पाए, वे आज सवाल खड़े कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार नियुक्ति पत्र देती रहेगी।
2017 से पहले की भर्ती व्यवस्था पर निशाना
सीएम योगी ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में भर्ती प्रक्रिया को लेकर युवाओं के बीच भरोसे का संकट था। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन सरकारों ने भर्ती बोर्डों और आयोगों में अपने लोगों को बैठाकर व्यवस्था को प्रभावित किया। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उस दौर में निष्पक्ष तरीके से भर्तियां नहीं होती थीं और इसके चलते युवाओं को रोजगार के लिए प्रदेश से बाहर जाने को मजबूर होना पड़ता था।
यूपी में रोजगार और अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने युवाओं की प्रतिभा को समस्या के बजाय प्रदेश की अर्थव्यवस्था की ताकत के रूप में देखा। उन्होंने दावा किया कि 2017 से पहले जिस उत्तर प्रदेश को पिछड़ा और गरीब राज्य माना जाता था, वही अब लगातार राजस्व अधिशेष वाला राज्य है और देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि आज यूपी के युवाओं के लिए प्रदेश के भीतर भी रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं और देश-दुनिया में भी उनके लिए नए रास्ते खुल रहे हैं।
यूपी लोकसेवा आयोग के पुराने विवाद का भी जिक्र
योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सपा सरकार पर हमला बोलते हुए उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग से जुड़े पुराने विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय आयोग के अध्यक्ष पद पर ऐसे व्यक्ति को नियुक्त किया गया, जो उनके अनुसार उस पद के लिए योग्य नहीं था। मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया को लेकर युवाओं में इतना असंतोष था कि उन्हें आंदोलन के लिए सड़कों पर उतरना पड़ा।
एक लाख सरकारी नौकरियों के लक्ष्य पर सरकार का जोर

मुख्यमंत्री योगी ने एक बार फिर दोहराया कि अगले छह महीने में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने का लक्ष्य पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं, परिणामों और नियुक्ति प्रक्रियाओं के जरिए यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। योगी ने कहा कि सरकारी नौकरी और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया को लेकर उनकी सरकार अपने दावे के मुताबिक लगातार काम कर रही है।










