UP News: मऊ से रायबरेली तक टेक्सटाइल पार्क, निवेशकों के लिए खुलेंगे नए रास्ते

उत्तर प्रदेश में टेक्सटाइल और अपैरल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए पांच जिलों में संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क विकसित करने की तैयारी है। मऊ, कानपुर नगर, कानपुर देहात, सीतापुर और रायबरेली में जमीन चिह्नित की गई है। बंद कताई मिलों की जमीन के इस्तेमाल और नए निवेश को लेकर प्रस्ताव जल्द कैबिनेट में रखा जा सकता है।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

सितम्बर 19, 2026

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UP News: उत्तर प्रदेश में टेक्सटाइल और अपैरल उद्योग को बढ़ावा देने की तैयारी तेज हो गई है। प्रदेश सरकार पांच जिलों में नए संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। इसके लिए मऊ, कानपुर नगर, कानपुर देहात, सीतापुर और रायबरेली में जमीन चिह्नित की गई है। प्रस्तावित योजना को आने वाले महीने में होने वाली कैबिनेट बैठक में रखा जा सकता है।

5 जिलों में संत कबीर टेक्सटाइल पार्क की तैयारी

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बताते चले कि, सरकार की योजना के तहत मऊ, कानपुर नगर, कानपुर देहात, सीतापुर और रायबरेली में टेक्सटाइल पार्क विकसित किए जाने हैं। खास बात यह है कि इन पार्कों के लिए बंद पड़ी कताई मिलों की जमीन के इस्तेमाल पर विचार किया जा रहा है। इससे लंबे समय से अनुपयोगी पड़ी औद्योगिक जमीन का दोबारा इस्तेमाल हो सकेगा और नए निवेश के लिए आधार तैयार किया जा सकेगा।

बंद कताई मिलों की जमीन से टेक्सटाइल उद्योग को बढ़ावा

आपको बता दे कि, प्रस्तावित टेक्सटाइल और अपैरल पार्क के लिए संबंधित जिलों में जमीन की पैमाइश कराई जा रही है। विभाग ने जमीन की मौजूदा स्थिति और उपलब्ध क्षेत्रफल की रिपोर्ट मांगी है। जमीन की उपलब्धता और पार्क के लिए जरूरी क्षेत्र की समीक्षा के बाद आगे की प्रक्रिया तय होगी। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त जमीन की व्यवस्था भी की जा सकती है।

सड़क, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं होंगी विकसित

टेक्सटाइल पार्कों के लिए जमीन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वहां जरूरी आधारभूत सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इनमें सड़क, बिजली, पानी और अन्य औद्योगिक सुविधाएं शामिल होंगी। बुनियादी ढांचा तैयार होने के बाद निवेशकों को औद्योगिक भूखंड आवंटित किए जाएंगे। इसके जरिए कपड़ा, अपैरल और इससे जुड़ी अन्य औद्योगिक इकाइयों की स्थापना का रास्ता साफ होगा।

गुजरात और महाराष्ट्र के कपड़ा कारोबारियों की यूपी पर नजर

उत्तर प्रदेश के टेक्सटाइल सेक्टर में दूसरे राज्यों के निवेशकों की रुचि भी बढ़ रही है। अधिकारियों के मुताबिक अहमदाबाद, सूरत और मुंबई के कई कपड़ा कारोबारी उत्तर प्रदेश में निवेश की संभावनाएं तलाश रहे हैं। सस्ता श्रम, बड़ा उपभोक्ता बाजार और उद्योग के लिए उपलब्ध सुविधाएं निवेशकों को यूपी की ओर आकर्षित करने वाले प्रमुख कारणों में शामिल हैं।

औद्योगिक जमीन की कमी से यूपी की ओर बढ़ रहा निवेश

गुजरात और महाराष्ट्र जैसे औद्योगिक राज्यों में जमीन की उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियों के बीच उत्तर प्रदेश निवेश के नए विकल्प के तौर पर उभर रहा है। यूपी में औद्योगिक इकाई स्थापित करने से कंपनियों को उत्तर प्रदेश के साथ-साथ बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे पड़ोसी राज्यों के बाजारों तक पहुंच बनाने में भी मदद मिल सकती है। कम दूरी और परिवहन लागत में संभावित बचत भी निवेशकों के लिए अहम पहलू है।

5 अन्य स्थानों पर पहले से चल रहा टेक्सटाइल पार्क का काम

उत्तर प्रदेश में पांच अन्य स्थानों पर संत कबीर टेक्सटाइल पार्क विकसित करने का काम पहले से जारी है। इनमें वाराणसी का रमना, अमरोहा, बरेली का बहेड़ी, संतकबीर नगर का मगहर और बिजनौर का नगीना शामिल हैं। इन स्थानों पर करीब 50 से 80 एकड़ तक की जमीन में अवस्थापना सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, ताकि भविष्य में यहां औद्योगिक इकाइयां स्थापित की जा सकें।

राकेश सचान बोले- बढ़ती मांग को देखते हुए तैयार हो रहे नए पार्क

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हस्तशिल्प एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान के मुताबिक प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं और कपड़ा उद्योग की बढ़ती मांग को देखते हुए नए टेक्सटाइल पार्क विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि दूसरे राज्यों के निवेशकों ने भी उत्तर प्रदेश में निवेश करने की इच्छा जताई है। नए पार्कों से जुड़ा प्रस्ताव अगले महीने कैबिनेट के सामने रखे जाने की संभावना है।

टेक्सटाइल सेक्टर में निवेश और रोजगार की बढ़ सकती हैं संभावनाएं

नए संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क विकसित होने से प्रदेश में कपड़ा निर्माण और अपैरल से जुड़ी इकाइयों के लिए औद्योगिक आधार मजबूत करने की कोशिश होगी। निवेश आने की स्थिति में उत्पादन, परिवहन, पैकेजिंग और अन्य सहायक गतिविधियों में भी कारोबार बढ़ सकता है। सरकार की योजना बंद औद्योगिक परिसंपत्तियों को उपयोग में लाकर टेक्सटाइल सेक्टर को विस्तार देने की दिशा में एक अहम कदम के तौर पर सामने आ रही है।

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