Karnataka News: कर्नाटक में तुलु को मिला आधिकारिक दर्जा, 70 साल पुरानी मांग पर हुआ फैसला

Karnataka News: तुलु भाषा को लेकर कर्नाटक सरकार ने बड़ा फैसला किया है। दक्षिण कन्नड़ और उडुपी में इसे अतिरिक्त प्रशासनिक भाषा का दर्जा दिया गया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के बाद यह घोषणा की गई। साथ ही दक्षिण कन्नड़ का नाम बदलने की प्रक्रिया भी प्रस्तावित है।

कर्नाटक में तुलु को मिला आधिकारिक दर्जा

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

सितम्बर 19, 2026

Karnataka News: कर्नाटक सरकार ने तटीय क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही तुलु भाषा को आधिकारिक मान्यता देने की मांग पर महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शुक्रवार को घोषणा की कि दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों में तुलु को एक अतिरिक्त प्रशासनिक भाषा के तौर पर मान्यता दी जाएगी। सरकार के इस निर्णय को तुलु भाषा और संस्कृति से जुड़े लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग से जोड़कर देखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य मंत्रिमंडल ने इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दी है। तुलु मुख्य रूप से कर्नाटक के तटीय इलाकों में बोली जाती है और दक्षिण कन्नड़ तथा उडुपी क्षेत्र में इसका व्यापक भाषाई और सांस्कृतिक प्रभाव है।

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लंबे समय से उठ रही थी मांग

आपको बता दें कि, तुलु भाषी समुदाय और अलग-अलग सामाजित-सांस्कृतिक संगठनों की ओर से लंबे समय से भाषा को प्रशासनिक स्तर पर मान्यता देने की मांग की जाती रही है। सरकार के अनुसार, इसी मांग को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। इस घोषणा के बाद तुलु भाषा से जुड़े लोगों और संगठनों में उत्साह देखा जा रहा है। समर्थकों का मानना है कि प्रशासनिक मान्यता मिलने से तुलु भाषा के संरक्षण, इस्तेमाल और विकास को बढ़ावा मिल सकता है। साथ ही, इससे तटीय कर्नाटक की विशिष्ट भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

दक्षिण कन्नड़ के नाम में बदलाव की तैयारी

मुख्यमंत्री ने दक्षिण कन्नड़ जिले के नाम से जुड़े बदलाव की भी जानकारी दी। उनके अनुसार, दक्षिण कन्नड़ का नाम बदलकर मंगलुरु करने की प्रक्रिया एक महीने के भीतर पूरी करने का फैसला किया गया है। इस कदम को तटीय क्षेत्र की प्रशासनिक और क्षेत्रीय पहचान से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, नाम परिवर्तन की औपचारिक प्रक्रिया और उससे जुड़े कानूनी पहलुओं पर सरकार आगे आवश्यक कदम उठाएगी।

तटीय कर्नाटक के विकास पर भी जोर

तटीय कर्नाटक के विकास पर भी जोर
तटीय कर्नाटक के विकास पर भी जोर

तुलु भाषा को प्रशासनिक मान्यता देने के साथ ही राज्य सरकार ने तटीय क्षेत्र के विकास के लिए करीब 32,611 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी देने की बात कही है। सरकार का कहना है कि क्षेत्र के विकास के साथ-साथ वहां के लोगों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को मजबूत करना भी उसकी प्राथमिकता है।

भावनात्मक राजनीति से दूर रहने की बात

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि सरकार इस मुद्दे को राजनीतिक विवाद का विषय बनाने के बजाय लोगों के हितों पर ध्यान केंद्रित करना चाहती है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने यह फैसला क्यों नहीं लिया, इस पर चर्चा करने के बजाय वर्तमान सरकार सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण पर ध्यान देगी। उन्होंने यह भी कहा कि समाज का विकास केवल भावनाओं के आधार पर नहीं किया जा सकता। सरकार का उद्देश्य लोगों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना और क्षेत्र की सामाजिक-आर्थिक ताकत को बढ़ाना है।

आगे कानूनी और आर्थिक पहलुओं पर होगी चर्चा

मुख्यमंत्री के मुताबिक, जरूरत पड़ने पर मंत्रिमंडल तुलु को प्रशासनिक स्तर पर लागू करने से जुड़े आर्थिक और कानूनी पहलुओं की समीक्षा करेगा। आने वाले दिनों में संबंधित विषयों पर बैठकें आयोजित कर आवश्यक कदम तय किए जाएंगे। इस तरह, तुलु को अतिरिक्त प्रशासनिक भाषा का दर्जा देने का फैसला कर्नाटक के तटीय क्षेत्र की भाषाई पहचान, प्रशासनिक व्यवस्था और विकास से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों में शामिल हो गया है।

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