Karnataka News: 20 हजार MW मांग के बीच बिजली संकट, BJP ने कांग्रेस सरकार की नीति पर साधा निशाना

कर्नाटक में बिजली की मांग करीब 20 हजार मेगावाट तक पहुंचने के बीच कथित आपूर्ति संकट को लेकर सियासत तेज हो गई है। BJP नेता आर. अशोक ने कांग्रेस सरकार की तैयारियों और बिजली खरीद नीति पर सवाल उठाए हैं। आखिर संकट की वजह क्या है और विपक्ष ने सरकार पर कौन से आरोप लगाए, जानिए पूरी कहानी

BJP ने कांग्रेस सरकार की नीति पर साधा निशाना

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

सितम्बर 12, 2026

Karnataka News:  कर्नाटक में बिजली की बढ़ती मांग और कथित आपूर्ति संकट को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस सरकार पर बिजली व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिजली की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में लोगों को कटौती का सामना करना पड़ रहा है।

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बिजली संकट को लेकर सरकार पर हमला

बिजली संकट को लेकर सरकार पर हमला
बिजली संकट को लेकर सरकार पर हमला

समाचार एजेंसी मुताबिक, आर. अशोक ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और ऊर्जा मंत्री केजे जॉर्ज पर बिजली की संभावित मांग का सही अनुमान नहीं लगाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार को पहले से पता होना चाहिए था कि बिजली की जरूरत बढ़ सकती है और उसी हिसाब से आपूर्ति की योजना तैयार करनी चाहिए थी। BJP नेता ने कांग्रेस सरकार को बिना पर्याप्त योजना के काम करने वाली सरकार बताते हुए दावा किया कि लगातार बिजली कटौती से आम लोगों की परेशानी बढ़ रही है। उनके मुताबिक, राज्य के कई इलाकों में सुबह और शाम के समय बिजली आपूर्ति प्रभावित हो रही है।

20 हजार मेगावाट की मांग

आर. अशोक ने राज्य में बिजली की मांग को लेकर सरकार की रणनीति पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि कर्नाटक में बिजली की मांग करीब 20,000 मेगावाट तक पहुंच गई है, जबकि सरकार ने संकट से निपटने के लिए लगभग 200 मेगावाट बिजली खरीदने का फैसला किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी मांग के मुकाबले केवल 200 मेगावाट अतिरिक्त बिजली खरीदने से संकट किस तरह दूर किया जा सकता है। अशोक के अनुसार, सरकार असम और जिंदल से 100-100 मेगावाट बिजली खरीदने को महत्वपूर्ण कदम के तौर पर पेश कर रही है, लेकिन यह मौजूदा मांग के मुकाबले बेहद कम है।

कमजोर मानसून को लेकर भी सरकार घिरी

BJP नेता ने कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून को भी बिजली संकट से जोड़ते हुए सरकार की तैयारी पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि मानसून के कमजोर रहने के संकेत मिलने के बाद सरकार को पहले ही वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी। आर. अशोक ने आरोप लगाया कि सरकार तकनीकी समस्याओं का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इसे सरकार की कथित अक्षमता और लापरवाही का परिणाम बताया।

किसानों, कारोबारियों और छात्रों पर असर का दावा

किसानों, कारोबारियों और छात्रों पर असर का दावा
किसानों, कारोबारियों और छात्रों पर असर का दावा

विपक्ष ने बिजली संकट के असर को लेकर भी सरकार को घेरा है। आर. अशोक का दावा है कि बिजली कटौती का प्रभाव समाज के अलग-अलग वर्गों पर पड़ रहा है। किसानों को सिंचाई और पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है, जबकि व्यापारी और उद्योग बिजली की कमी के कारण अपने कामकाज को लेकर परेशान हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बिजली कटौती से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। BJP नेता ने सरकार से जल्द ठोस कदम उठाने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो लोगों की नाराजगी और बढ़ सकती है।

‘मुफ्त बिजली’ की गारंटी पर कांग्रेस को घेरा

आर. अशोक ने कांग्रेस की चुनावी गारंटियों पर तंज कसते हुए कहा कि सत्ता में आने से पहले मुफ्त बिजली का वादा करने वाली सरकार अब लोगों को कथित तौर पर ‘मुफ्त अंधेरे’ का सामना करा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए तत्काल आपूर्ति बढ़ाने और भविष्य के लिए ठोस योजना तैयार करने पर ध्यान देना चाहिए। फिलहाल बिजली संकट को लेकर BJP के हमले के बाद कर्नाटक की राजनीति में इस मुद्दे पर बहस और तेज हो गई है।

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