Karnataka News: कर्नाटक सरकार ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी बी. दयानंद को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। 1994 बैच के अधिकारी दयानंद को डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) के पद पर प्रमोट किया गया है। उन्हें राज्य के इंटरनल सिक्योरिटी डिवीजन (ISD) का प्रमुख नियुक्त किया गया है। सरकार के आदेश के मुताबिक उनका प्रमोशन DGP ग्रेड के लेवल-16 में किया गया है। यह नियुक्ति 12 सितंबर 2025 से प्रभावी मानी गई है और उनकी नई जिम्मेदारी तत्काल लागू कर दी गई है। राज्य सरकार ने DGP, ISD के पद को IPS (Pay) Rules, 2016 के तहत DGP-CID के कैडर पद के समान दर्जा दिया है।
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चिन्नास्वामी स्टेडियम भगदड़ के बाद जांच के घेरे में आए थे
बी. दयानंद का नाम जून 2025 में बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ के बाद सुर्खियों में आया था। 4 जून 2025 को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की जीत के बाद आयोजित जश्न के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के जुटने से भगदड़ मच गई थी। उस समय दयानंद बेंगलुरु सिटी पुलिस कमिश्नर के पद पर तैनात थे। घटना के बाद उन्हें निलंबित किया गया और अन्य अधिकारियों के साथ उनके खिलाफ भी विभागीय जांच शुरू हुई। अब विभागीय जांच से क्लीनचिट मिलने के बाद उन्हें DGP ग्रेड में पदोन्नति मिली है। इससे उनकी प्रशासनिक भूमिका एक बार फिर महत्वपूर्ण हो गई है।
पुलिसिंग में लंबा और विविध अनुभव
बी. दयानंद ने कर्नाटक पुलिस में कई अहम पदों पर काम किया है। वर्ष 2020 से उन्होंने राज्य में इंटेलिजेंस के ADGP के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली। इससे पहले वह CID के आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ में ADGP और IGP जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे। उन्होंने सेंट्रल रेंज, बेंगलुरु, ईस्टर्न रेंज, दावणगेरे और स्टेट इंटेलिजेंस में IGP की जिम्मेदारियां भी निभाईं। इसके अलावा वह मैसूरु शहर के पुलिस कमिश्नर, बेंगलुरु ADGP ट्रैफिक और ज्वाइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस के पद पर भी रह चुके हैं।
ट्रैफिक और टेक्नोलॉजी में भी बनाई पहचान
दयानंद का प्रशासनिक अनुभव सिर्फ कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने ट्रांसपोर्ट और रोड सेफ्टी कमिश्नर के तौर पर भी काम किया है। तकनीक के इस्तेमाल को लेकर भी उनकी अलग पहचान रही है। 2005 में दक्षिण कन्नड़ जिले के SP रहते हुए उन्होंने पुलिसिंग से जुड़ा एक ब्लॉग शुरू किया था, जिसे शुरुआती पुलिस ब्लॉग्स में शामिल किया गया। उनकी तकनीक आधारित पहल को 2006 में नई दिल्ली में आयोजित ई-गवर्नेंस सम्मेलन में ‘ई-गवर्नेंस अवार्ड फॉर इनोवेशन’ से सम्मानित किया गया।
UN मिशन में भी निभा चुके हैं जिम्मेदारी
बी. दयानंद ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काम किया है। 2003-04 में उन्होंने कोसोवो में संयुक्त राष्ट्र मिशन के तहत सिविलियन पुलिस ऑफिसर के रूप में सेवाएं दीं। इस दौरान उन्हें अंतरराष्ट्रीय पुलिसिंग और शांति स्थापना से जुड़े काम का अनुभव मिला। इसके अलावा उन्होंने कर्नाटक की स्टेट फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी में भी करीब दो साल महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली। उनके कार्यकाल में संस्थान का पुनर्गठन हुआ और साइबर फॉरेंसिक लैब की स्थापना की गई।
राष्ट्रपति पुलिस पदक समेत कई सम्मान
दयानंद के पुलिस करियर में कई पुरस्कार भी जुड़े हैं। उन्हें गणतंत्र दिवस 2022 के अवसर पर विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था। इससे पहले उन्हें वर्ष 2011 में मेरिटोरियस सर्विस के लिए राष्ट्रपति पुलिस मेडल, 2003-04 में संयुक्त राष्ट्र मेडल और 1998-99 में मुख्यमंत्री गोल्ड मेडल भी मिल चुका है।
फिटनेस और बाइकिंग के भी शौकीन
पुलिस सेवा के अलावा बी. दयानंद अपनी फिटनेस और बाइकिंग की रुचि के लिए भी जाने जाते हैं। मैसूरु और बेंगलुरु में अहम पदों पर रहते हुए वह कभी-कभी सादे कपड़ों में बाइक से गश्त करते थे। इसका उद्देश्य फील्ड में पुलिसकर्मियों की कार्यप्रणाली को करीब से देखना बताया जाता है। रानीबेन्नूर, हावेरी जिले से ताल्लुक रखने वाले बी. दयानंद ने पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक की पढ़ाई की और 1994 में भारतीय पुलिस सेवा में शामिल हुए। अब DGP, ISD के रूप में उनके सामने आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी बड़ी जिम्मेदारी होगी।
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