UP Election 2027: घाटमपुर में किसका चलेगा सिक्का? 2027 से पहले जानिए सीट का पूरा सियासी इतिहास

उत्तर प्रदेश की घाटमपुर विधानसभा सीट का सियासी इतिहास बेहद दिलचस्प रहा है। कभी कांग्रेस का दबदबा रहा तो सपा, बसपा और जनता दल ने भी जीत दर्ज की। 2017 में भाजपा ने पहली बार कब्जा किया, जबकि 2022 में अपना दल (एस) ने जीत हासिल की। अब 2027 में फिर नए सियासी समीकरणों पर नजर है।

UP Election 2027

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

सितम्बर 12, 2026

UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू होते ही प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राजनीतिक दल बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने और मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ बनाने में जुटे हैं। इसी चुनावी माहौल में कानपुर नगर जिले की घाटमपुर विधानसभा सीट भी खास चर्चा में है। यह सीट लंबे समय से बदलते राजनीतिक समीकरणों, अलग-अलग दलों की जीत और कई बड़े नेताओं के चुनावी सफर की गवाह रही है। ऐसे में 2027 के चुनाव से पहले इस सीट के इतिहास और सियासी गणित को समझना बेहद अहम हो जाता है।

कानपुर नगर की 10 विधानसभा सीटों में शामिल है घाटमपुर

बताते चले कि, कानपुर नगर जिले में कुल 10 विधानसभा सीटें हैं। इनमें बिल्हौर, बिठूर, कल्याणपुर, सीसामऊ, आर्य नगर, कानपुर कैंट, गोविंदनगर, किदवई नगर, महाराजपुर और घाटमपुर शामिल हैं। इनमें घाटमपुर की अपनी अलग राजनीतिक पहचान है। वर्तमान स्वरूप में आने से पहले भी यह क्षेत्र विधानसभा चुनावों का हिस्सा रहा है, लेकिन समय-समय पर परिसीमन के कारण इसके स्वरूप और नाम में बदलाव होता रहा।

दो सदस्यीय सीट से शुरू हुआ घाटमपुर का चुनावी सफर

आपको बता दे कि, घाटमपुर विधानसभा क्षेत्र का इतिहास उत्तर प्रदेश के पहले आम चुनाव से जुड़ा है। उस समय यह अपने मौजूदा स्वरूप में नहीं था और घाटमपुर-भोगनीपुर ईस्ट के नाम से दो-सदस्यीय विधानसभा सीट थी। पहले चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर दयाल दास भगत और बृज बिहारी मेहरोत्रा विधायक चुने गए। इसके बाद परिसीमन के साथ सीट की संरचना में लगातार बदलाव देखने को मिला।

2002 में पहली बार सपा ने घाटमपुर में खोला खाता

2002 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने घाटमपुर सीट पर पहली बार जीत दर्ज की। राकेश सचान ने बसपा के राजा राम पाल को 7,256 वोटों से हराया। उन्हें 44,108 वोट मिले, जबकि राजा राम पाल को 36,852 वोट मिले। कांग्रेस के कुंवर शिवनाथ सिंह 26,224 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

2007 में बसपा की वापसी, रामप्रकाश कुशवाहा बने विधायक

2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने एक बार फिर घाटमपुर में वापसी की। पार्टी के रामप्रकाश कुशवाहा ने सपा के राकेश सचान को 2,477 वोटों से हराया। रामप्रकाश कुशवाहा को 65,793 वोट मिले, जबकि राकेश सचान को 63,316 वोट मिले। इस चुनाव में दोनों के बीच बेहद करीबी मुकाबला देखने को मिला।

2012 में सीट हुई SC आरक्षित, सपा ने दर्ज की जीत

2012 का चुनाव घाटमपुर के राजनीतिक इतिहास में महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि परिसीमन के बाद यह सीट अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हो गई। इसी चुनाव में समाजवादी पार्टी के इंद्रजीत कोरी ने जीत दर्ज की। उन्होंने बसपा की सरोज कुरील को महज 700 वोटों के अंतर से हराया। इंद्रजीत कोरी को 50,669 और सरोज कुरील को 49,969 वोट मिले।

2017 में पहली बार भाजपा का कब्जा, कमल रानी वरुण की बड़ी जीत

2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने घाटमपुर की राजनीति में ऐतिहासिक एंट्री की। भाजपा की कमल रानी वरुण ने बसपा की सरोज कुरील को 45,178 वोटों के भारी अंतर से हराया। कमल रानी वरुण को 92,776 वोट मिले, जबकि सरोज कुरील को 47,598 वोट मिले। इस जीत के साथ पहली बार भाजपा ने घाटमपुर विधानसभा सीट पर कब्जा किया।

2020 में कमल रानी वरुण के निधन के बाद हुआ उपचुनाव

2017 में विधायक चुनी गईं कमल रानी वरुण उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भी बनीं। अगस्त 2020 में कोरोना संक्रमण के दौरान उनके निधन के बाद घाटमपुर विधानसभा सीट रिक्त हो गई। इसके बाद उपचुनाव कराया गया, जिसमें भाजपा के उपेंद्र नाथ पासवान ने जीत दर्ज कर पार्टी का कब्जा बरकरार रखा।

2022 में अपना दल एस ने पहली बार घाटमपुर में जीत दर्ज की

2022 के विधानसभा चुनाव में घाटमपुर की राजनीति ने एक बार फिर नया मोड़ लिया। भाजपा की सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) ने पहली बार इस सीट पर जीत हासिल की। पार्टी की सरोज कुरील ने समाजवादी पार्टी के भगवती प्रसाद सागर को 14,474 वोटों से हराया। सरोज कुरील को 81,727 वोट मिले, जबकि सपा उम्मीदवार को 67,253 वोट मिले। बसपा के प्रशांत अहिरवार 32,472 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

2027 में क्या फिर बदलेगा घाटमपुर का सियासी समीकरण?

घाटमपुर विधानसभा सीट का इतिहास बताता है कि यहां लंबे समय तक किसी एक दल का स्थायी वर्चस्व नहीं रहा। कांग्रेस, सोशलिस्ट पार्टी, जनता पार्टी, जनता दल, बसपा, सपा, भाजपा और अपना दल (एस) अलग-अलग दौर में इस सीट पर जीत दर्ज कर चुके हैं। 2017 में भाजपा और 2022 में अपना दल (एस) की जीत के बाद अब 2027 में NDA के सामने इस सीट पर अपना कब्जा बनाए रखने की चुनौती होगी।

सपा, बसपा और कांग्रेस के सामने वापसी की चुनौती

घाटमपुर में विपक्षी दलों के लिए भी 2027 का चुनाव अहम होगा। सपा यहां 2002 और 2012 में जीत दर्ज कर चुकी है, जबकि बसपा का भी इस सीट पर मजबूत चुनावी इतिहास रहा है। कांग्रेस का प्रभाव पुराने दौर में काफी मजबूत था और कुंवर शिवनाथ सिंह कुशवाहा जैसे नेताओं ने लंबे समय तक इस सीट का प्रतिनिधित्व किया। ऐसे में विपक्षी दल पुराने जनाधार और नए सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश कर सकते हैं।

घाटमपुर का इतिहास बताता है- यहां हर चुनाव में बदल सकता है खेल

घाटमपुर की सियासत का सबसे दिलचस्प पहलू यही है कि इस सीट ने समय के साथ लगातार राजनीतिक करवट ली है। कभी कांग्रेस का प्रभाव रहा, तो कभी समाजवादी और बहुजन समाज पार्टी ने अपना आधार मजबूत किया। 2017 में भाजपा ने पहली बार बड़ी जीत दर्ज की और 2022 में अपना दल (एस) ने नया इतिहास बनाया। अब 2027 में मुकाबला किस दिशा में जाता है, यह बदलते राजनीतिक समीकरण, उम्मीदवारों और मतदाताओं के रुख पर निर्भर करेगा।