Netanyahu Rejects Trump Gaza Plan: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा और वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया है। रविवार को दिए गए उनके बयान से गाजा युद्ध समाप्त करने की अमेरिकी कोशिशों को बड़ा झटका माना जा रहा है।नेतन्याहू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक वह इजरायल के प्रधानमंत्री हैं, तब तक गाजा या वेस्ट बैंक में किसी फिलिस्तीनी राज्य का गठन नहीं होने दिया जाएगा। उनके इस रुख से इजरायल और फिलिस्तीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद के समाधान को लेकर नई चुनौतियां सामने आ गई हैं।
ट्रंप की 15-सूत्रीय शांति योजना पर भी असहमति
नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से पेश की गई 15-सूत्रीय गाजा पीस प्लान को भी स्वीकार करने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि जब तक हमास पूरी तरह अपने हथियार नहीं डालता, तब तक इजरायली सेना गाजा से वापस नहीं हटेगी। यह रुख ट्रंप की उस कोशिश के विपरीत दिखाई दे रहा है, जिसमें उन्होंने गाजा में युद्ध खत्म करने और क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में आगे बढ़ने के लिए एक विस्तृत रोडमैप पेश किया था।
ट्रंप ने योजना को बताया था बड़ी सफलता
कुछ दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाशिंगटन में नेतन्याहू की मेजबानी की थी। बैठक के बाद ट्रंप ने अपने प्रस्तावित शांति रोडमैप को बड़ी सफलता बताया था। उन्होंने कहा था कि इजरायल ने अमेरिका का सहयोग किया है और समझौते को लेकर उसका रुख सकारात्मक है। ट्रंप ने यह भी दावा किया था कि इजरायल इस योजना से काफी खुश है। हालांकि, उन्होंने साथ ही यह स्वीकार किया था कि प्रस्ताव को जमीन पर लागू करना आसान नहीं होगा और इसमें कई तरह की चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
वाशिंगटन बैठक को लेकर भी उठे सवाल
इजरायली राजनीतिक सूत्रों के एक दावे ने दोनों नेताओं के बीच वास्तविक सहमति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्र के मुताबिक, वाशिंगटन में नेतन्याहू और ट्रंप की हालिया बैठक के दौरान गाजा के मुद्दे पर कोई विस्तृत चर्चा ही नहीं हुई थी। ऐसे में नेतन्याहू द्वारा अब शांति योजना और फिलिस्तीनी राज्य के गठन से इनकार किए जाने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि दोनों पक्ष अमेरिकी रोडमैप को लेकर वास्तव में कितने सहमत हैं।
हमास ने भी रखी हथियार छोड़ने की शर्त
दूसरी तरफ, हमास ने भी ट्रंप की शांति योजना को लेकर अपनी शर्तें सामने रखी हैं। हमास का कहना है कि वह हथियार छोड़ने पर तभी विचार करेगा, जब इजरायल पहले अपने सैन्य हमले बंद करे और पहले से किए गए संघर्ष विराम समझौते की प्रतिबद्धताओं को लागू करे। यानी हमास और इजरायल दोनों ही एक-दूसरे से पहले कदम उठाने की मांग कर रहे हैं, जिससे शांति प्रक्रिया और जटिल होती दिखाई दे रही है।
हमास ने समझौते को लेकर जताई सशर्त सहमति
हमास के वरिष्ठ अधिकारी गाजी हमाद ने कहा है कि उनका संगठन कठिन और दर्दनाक समझौते को स्वीकार करने के लिए तैयार हो सकता है। हालांकि, इसके लिए इजरायल को पहले मिस्र के शर्म अल-शेख में हुए समझौते के शुरुआती चरण को लागू करना होगा। इसमें सैन्य हमले रोकना, इजरायली सैनिकों को पिछली स्थिति में वापस बुलाना और गाजा में मानवीय सहायता की आपूर्ति बढ़ाना जैसी शर्तें शामिल हैं।
हथियार सौंपने को लेकर हमास ने बताई प्रक्रिया
हमास का कहना है कि अगर इजरायल इन शर्तों को पूरा करता है तो संगठन अपने हथियार गाजा प्रशासन के लिए बनाई गई नेशनल कमिटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा को सौंप सकता है। यह एक फिलिस्तीनी टेक्नोक्रेटिक संस्था है, जिसे संक्रमणकालीन दौर में गाजा के नागरिक प्रशासन की जिम्मेदारी संभालने के लिए प्रस्तावित किया गया है। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर इजरायल और हमास के बीच अभी व्यापक मतभेद बने हुए हैं।
ट्रंप के 15-सूत्रीय प्लान में युद्धविराम से पुनर्निर्माण तक योजना
ट्रंप के प्रस्ताव में गाजा युद्ध समाप्त करने के लिए चरणबद्ध व्यवस्था का सुझाव दिया गया है। इसके तहत इजरायल और हमास को अगले चरण में जाने से पहले मौजूदा युद्धविराम संबंधी प्रतिबद्धताओं को पूरा करना होगा। इसके बाद हमास और अन्य फिलिस्तीनी गुटों से गाजा के नागरिक प्रशासन तथा आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रस्तावित राष्ट्रीय समिति को सौंपने की बात कही गई है।
हथियारों और सुरंगों पर नियंत्रण का प्रस्ताव
शांति योजना में गाजा में मौजूद भारी हथियारों, हथियारों के भंडार, सैन्य ठिकानों और सुरंगों की पहचान करने तथा उन्हें प्रस्तावित प्रशासनिक समिति के नियंत्रण में रखने की बात कही गई है। इसके साथ ही इजरायली सैनिकों और फिलिस्तीनी प्रशासन वाले क्षेत्रों के बीच अलगाव सुनिश्चित करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय स्टेबलाइजेशन फोर्स तैनात करने का प्रस्ताव है। इस बल की जिम्मेदारी समझौते के पालन की निगरानी करना भी होगी।
चरणबद्ध इजरायली वापसी और पुनर्निर्माण का रोडमैप
योजना के अनुसार, निर्धारित समयसीमा के तहत इजरायली सेना को चरणबद्ध तरीके से गाजा से पीछे हटना होगा। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय निगरानी में क्षेत्र के पुनर्निर्माण और आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं को बहाल करने की प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव है। रोडमैप में गाजा के भविष्य के प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी व्यापक बदलाव की कल्पना की गई है।
फिलिस्तीनी आत्मनिर्णय और राज्य गठन की बात
ट्रंप की प्रस्तावित योजना में लंबे समय तक चलने वाली राजनीतिक प्रक्रिया का भी उल्लेख किया गया है। इसका उद्देश्य फिलिस्तीनियों के आत्मनिर्णय के अधिकार और भविष्य में फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना की दिशा में आगे बढ़ना बताया गया है। यही वह बिंदु है जिस पर नेतन्याहू का मौजूदा रुख सीधे तौर पर टकराता दिखाई देता है। उनके अनुसार, उनके प्रधानमंत्री रहते गाजा या वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना नहीं होगी।
आठ देशों ने इजरायल को दी कड़ी चेतावनी
इजरायल और अमेरिकी शांति रोडमैप के बीच बढ़ती दूरी को लेकर कई मुस्लिम-बहुल देशों ने भी चिंता जताई है। संयुक्त अरब अमीरात, कतर, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, तुर्की, सऊदी अरब और मिस्र ने संयुक्त रूप से इजरायल के सैन्य अभियानों की आलोचना की है। इन देशों का कहना है कि गाजा में लगातार सैन्य कार्रवाई अमेरिकी समर्थित शांति योजना के अगले चरण को लागू करने की कोशिशों को नुकसान पहुंचा सकती है।
संयुक्त बयान में शांति प्रयास कमजोर होने की चिंता
आठ देशों की ओर से जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि इजरायल की मौजूदा कार्रवाई उन अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को कमजोर कर रही है, जिनका उद्देश्य समझौते को आगे बढ़ाना है। इन देशों ने विशेष रूप से उस स्थिति पर चिंता जताई जिसमें फिलिस्तीनी गुटों ने ट्रंप की घोषित रूपरेखा को स्वीकार करने का संकेत दिया है, जबकि इजरायल की ओर से अब योजना के महत्वपूर्ण हिस्सों पर असहमति सामने आ रही है।
शांति प्रक्रिया के सामने बढ़ी मुश्किलें
नेतन्याहू, ट्रंप और हमास के अलग-अलग रुख से गाजा में स्थायी युद्धविराम और व्यापक राजनीतिक समाधान की राह फिलहाल कठिन दिखाई दे रही है। एक तरफ अमेरिका चरणबद्ध शांति योजना के जरिए युद्ध समाप्त करने की कोशिश कर रहा है, वहीं इजरायल हमास के पूर्ण निरस्त्रीकरण और फिलिस्तीनी राज्य के विरोध पर कायम है। दूसरी ओर, हमास इजरायली सैन्य कार्रवाई रोकने और सैनिकों की वापसी को हथियार छोड़ने की पूर्व शर्त बता रहा है। ऐसे में किसी साझा समझौते तक पहुंचने के लिए तीनों पक्षों के बीच गंभीर राजनीतिक और कूटनीतिक बातचीत की जरूरत होगी।
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