NEET UG 2026: NEET-UG 2026 में कथित पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने केंद्र सरकार से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। याचिकाकर्ताओं ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए परीक्षा संचालन के लिए अधिक सुरक्षित, तकनीकी रूप से सक्षम और स्वतंत्र संस्था बनाने की मांग की है।
सॉलिसिटर जनरल ने बताई प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को NEET प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने की प्रक्रिया विस्तार से समझाई। उन्होंने बताया कि पूरी व्यवस्था में कई स्तरों पर सुरक्षा उपाय लागू हैं, हालांकि कुछ चरणों में मानवीय हस्तक्षेप भी मौजूद है। फिजिक्स जैसे विषयों के लिए कई मॉडरेटरों से करीब 500 सवालों का प्रश्न बैंक तैयार कराया जाता है।
चार प्रश्नपत्रों में से चुने जाते हैं दो सेट
प्रश्न बैंक तैयार होने के बाद दूसरे मॉडरेटरों का समूह उसमें से सवाल चुनकर 100-100 प्रश्नों वाले चार अलग-अलग पेपर तैयार करता है। इसके बाद NTA के महानिदेशक इन चार सेटों में से दो प्रश्नपत्रों का चयन करते हैं। इस प्रक्रिया के इस चरण तक यह तय नहीं किया जाता कि परीक्षा में आखिर कौन सा प्रश्नपत्र इस्तेमाल किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे प्रश्नपत्र की गोपनीयता बनाए रखने में मदद मिलती है।
CCTV और CISF की निगरानी में होती है प्रिंटिंग
तुषार मेहता ने बताया कि चयनित प्रश्नपत्रों को सीलबंद बॉक्स में दो अलग-अलग प्रिंटिंग प्रेस भेजा जाता है। प्रिंटिंग प्रेस में CCTV कैमरों के साथ CISF की निगरानी रहती है। अधिकृत व्यक्ति डिजिटल चाबी के जरिए प्रेस पहुंचता है और प्रेस मालिक फोन पर NTA महानिदेशक से इसकी पुष्टि करता है। इसके बाद कोड साझा कर बॉक्स खोला जाता है। पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाती है और बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक रहती है।
प्रिंटर को नहीं होती परीक्षा की जानकारी
सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रश्नपत्र छापने वाले प्रिंटर को यह जानकारी नहीं होती कि वह किस परीक्षा का पेपर तैयार कर रहा है। तुषार मेहता के मुताबिक, इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रश्नपत्र की पहचान और उसकी गोपनीयता को अंतिम समय तक सुरक्षित रखना है। प्रिंटिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रश्नपत्रों को सुरक्षित तरीके से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जाता है।
GPS ट्रैकिंग से परीक्षा केंद्र तक पहुंचते हैं पेपर
परीक्षा केंद्रों पर प्रश्नपत्र लोहे के विशेष बॉक्स में भेजे जाते हैं। इन बॉक्स में ऐसे लॉक लगाए जाते हैं जिन्हें खोलने के बजाय तोड़ना पड़ता है। प्रश्नपत्र ले जाने वाले वाहनों को GPS के जरिए ट्रैक किया जाता है। दो अलग-अलग प्रश्नपत्र सेट अलग-अलग बॉक्स में रखे जाते हैं और इन्हें आमतौर पर SBI या केनरा बैंक के स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रखा जाता है।
परीक्षा वाले दिन अधिकारियों की मौजूदगी में खुलता बॉक्स
परीक्षा के दिन NTA महानिदेशक सुबह सिटी कोऑर्डिनेटर को बताते हैं कि कौन सा प्रश्नपत्र सेट इस्तेमाल किया जाना है। इसके बाद सिटी कोऑर्डिनेटर जिलाधिकारी और अन्य अधिकारियों के साथ बैंक पहुंचते हैं। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जाती है और फिर प्रश्नपत्र संबंधित क्लासरूम कोऑर्डिनेटर को सौंपे जाते हैं।
छात्रों के सामने तोड़ी जाती है प्रश्नपत्र की सील
अदालत को बताया गया कि प्रत्येक क्लासरूम में सामान्यतः करीब 24 छात्र होते हैं। प्रश्नपत्र और OMR शीट सीलबंद लिफाफों में रखे जाते हैं। परीक्षा शुरू होने से पहले छात्रों के सामने ही लिफाफे की सील तोड़ी जाती है और प्रश्नपत्र खोले जाते हैं। परीक्षा समाप्त होने के बाद प्रश्नपत्र और OMR शीट को भी निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया के तहत वापस भेजा जाता है।
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, सुरक्षा व्यवस्था को संस्थागत कैसे बनाएंगे?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार द्वारा बताई गई सुरक्षा व्यवस्था राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशों के दायरे में आती है। पीठ ने स्पष्ट किया कि समस्या केवल किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं है। जरूरत ऐसी संस्थागत व्यवस्था बनाने की है, जो लंबे समय तक सुरक्षित और भरोसेमंद परीक्षा आयोजित कर सके। कोर्ट ने संस्था की संरचना, अधिकारियों की संख्या, सुरक्षा व्यवस्था और प्रश्नपत्रों की गोपनीयता पर सवाल उठाए।
साइबर सिक्योरिटी और R&D इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में केवल तत्काल सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं हैं। संस्था के भीतर लंबे समय की विशेषज्ञता और इंस्टीट्यूशनल मेमोरी विकसित होनी चाहिए। अदालत ने R&D इंफ्रास्ट्रक्चर, सॉफ्टवेयर, स्वतंत्र डेटाबेस, डेटा स्टोरेज और स्थायी साइबर सिक्योरिटी व्यवस्था को लेकर भी सवाल किए। कोर्ट ने यह भी पूछा कि टेस्टिंग सेंटर और केंद्रीय नेटवर्क ऑपरेटर की व्यवस्था कैसी है।
केंद्र से तीन सप्ताह में हलफनामा मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को तीन सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। इसमें NEET-UG सहित अन्य परीक्षाओं को सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के लिए अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी गई है। कोर्ट ने अधिकारियों की नियुक्ति, सुरक्षा ढांचे, साइबर सुरक्षा, R&D व्यवस्था और राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशों के क्रियान्वयन का विवरण भी मांगा है। अदालत ने सुरक्षा व्यवस्था की लगातार निगरानी के लिए वरिष्ठ स्तर के अधिकारी की जरूरत पर भी जोर दिया।
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