Cabinet Decision: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार, 19 अगस्त 2026 को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर कई अहम फैसले लिए गए। बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार ने चार रेलवे परियोजनाओं और एक फोर-लेन हाईवे प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं पर कुल करीब 13,041 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार के मुताबिक इन प्रोजेक्ट्स से यात्री और माल परिवहन दोनों को गति मिलेगी।
मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनवर्षा फोर-लेन हाईवे को मंजूरी
बताते चले कि, कैबिनेट ने बिहार के मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनवर्षा फोर-लेन हाईवे के निर्माण को भी मंजूरी दी है। इस परियोजना पर करीब 3,591 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस सड़क परियोजना से क्षेत्र में कनेक्टिविटी मजबूत होने और आवागमन को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
हावड़ा-चेन्नई रेल रूट को क्वाड्रुपल करने की बड़ी योजना
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि देश के रेलवे नेटवर्क में सात प्रमुख ट्रंक रूट हैं और इनमें हावड़ा-चेन्नई रेल रूट बेहद महत्वपूर्ण है। सरकार इस पूरे मार्ग को चरणबद्ध तरीके से चार-लाइन यानी क्वाड्रुपल रेल कॉरिडोर बनाने की दिशा में काम कर रही है।
चार लाइन होने से बढ़ेगी ट्रेनों की रफ्तार और क्षमता
सरकार का कहना है कि रेलवे लाइन बढ़ने से इस रूट पर ज्यादा ट्रेनें चलाना संभव होगा। साथ ही मालगाड़ियों की आवाजाही सुगम होगी और ट्रैक के रखरखाव का काम भी आसान हो जाएगा। हाल में मंजूर की गई तीन प्रमुख रेल परियोजनाएं इसी हावड़ा-चेन्नई मुख्य रेल लाइन से जुड़ी हैं, जबकि चौथी परियोजना पारादीप-कटक रेल खंड के लिए है।
खड़गपुर-भद्रक फोर-लाइन रेल कॉरिडोर को मंजूरी
पहली बड़ी रेलवे परियोजना के तहत खड़गपुर से भद्रक के बीच 173 किलोमीटर लंबे रेल खंड को चार-लाइन कॉरिडोर में बदला जाएगा। यह मार्ग बालासोर और रूपसा होते हुए भद्रक तक जाता है। इस रूट पर कोयला और लौह-अयस्क उत्पादक क्षेत्रों से भारी मालगाड़ियों की आवाजाही होती है। इसके अलावा हावड़ा-चेन्नई के बीच चलने वाली मेल, एक्सप्रेस, सुपरफास्ट और पैसेंजर ट्रेनों का भी भारी दबाव रहता है।
3,352 करोड़ की परियोजना में बनेंगे 210 पुल
इस रेल परियोजना की अनुमानित लागत करीब 3,352 करोड़ रुपये है। निर्माण के दौरान इस मार्ग पर 41 बड़े और 169 छोटे पुल बनाए जाएंगे। सरकार का दावा है कि परियोजना पूरी होने के बाद माल ढुलाई के साथ यात्री ट्रेनों के संचालन में भी सुधार होगा और रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी।
भद्रक-हरिदासपुर चौथी रेल लाइन से घटेगी भीड़
दूसरी परियोजना भद्रक से हरिदासपुर के बीच 75 किलोमीटर लंबी रेल लाइन से जुड़ी है। हावड़ा-खड़गपुर-भद्रक रूट पर इस खंड में तीसरी लाइन का काम पहले से चल रहा है। कई स्थानों पर यह काम पूरा भी हो चुका है। अब यहां चौथी लाइन के निर्माण को मंजूरी दी गई है।
कटक में रेल जाम कम करने के लिए खास ढांचा
परियोजना के तहत कटक शहर में रेल यातायात के कारण होने वाली भीड़ और जाम को कम करने के लिए विशेष रेल-ओवर-रेल और रेल फ्लाई-ओवर ढांचे तैयार किए जाएंगे। करीब 1,533 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना से शहर के भीतर ट्रेनों की आवाजाही को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।
हर साल 433 करोड़ रुपये की लॉजिस्टिक्स बचत
सरकार के अनुसार इस रेल लाइन के शुरू होने के बाद देश को हर साल करीब 433 करोड़ रुपये की लॉजिस्टिक्स लागत की बचत हो सकती है। वहीं परियोजना के निर्माण से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
गुम्मिडीपुंडी-गुडूर रेल रूट भी होगा क्वाड्रुपल
तीसरी परियोजना आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु की सीमा के पास गुम्मिडीपुंडी से गुडूर के बीच रेल रूट से संबंधित है। करीब 90 किलोमीटर लंबे इस खंड में फिलहाल डबल लाइन है। अब यहां तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाकर इसे क्वाड्रुपल कॉरिडोर में बदला जाएगा।
ज्यादा पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनें चलाने की तैयारी
चार-लाइन कॉरिडोर बनने के बाद इस रूट पर रेल यातायात की क्षमता बढ़ेगी। इससे अधिक पैसेंजर ट्रेनों के साथ नई एक्सप्रेस ट्रेनों को चलाने की संभावना बढ़ जाएगी। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 2,229 करोड़ रुपये बताई गई है।
रेलवे विस्तार से बढ़ेगी कनेक्टिविटी, रोजगार को भी रफ्तार
केंद्र सरकार के मुताबिक इन रेलवे परियोजनाओं का उद्देश्य केवल ट्रैक की क्षमता बढ़ाना नहीं है, बल्कि देश के प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक क्षेत्रों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी देना भी है। मालगाड़ियों की आवाजाही आसान होने से लॉजिस्टिक्स व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है। साथ ही निर्माण कार्यों के दौरान बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
कुल मिलाकर मोदी कैबिनेट के इन फैसलों में रेलवे नेटवर्क के विस्तार, हावड़ा-चेन्नई रूट की क्षमता बढ़ाने और बिहार में फोर-लेन हाईवे निर्माण पर खास जोर दिया गया है। सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं से यात्री सुविधाओं के साथ माल परिवहन और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को भी बड़ा फायदा मिलेगा।










