Ayodhya Ram Mandir: चढ़ावा चोरी के बाद बड़ा फेरबदल, अनिल मिश्रा के करीबी समेत 2 लोगों की छुट्टी

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी विवाद के बीच ट्रस्ट ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा के दो करीबी सहयोगियों को मंदिर की व्यवस्थाओं से हटा दिया गया और परिसर में उनकी एंट्री पर रोक लगा दी गई। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब SIT की अंतिम रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंपी गई है।

Ayodhya Ram Mandir

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 19, 2026

Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ा कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद मंदिर प्रशासन की व्यवस्थाओं में लगातार बदलाव किए जा रहे हैं। जांच और प्रशासनिक स्तर पर हुई कार्रवाई के बीच अब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दो और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। मंदिर में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे केडी तिवारी उर्फ ‘बड़े बाबू’ और उनके सहयोगी बजरंग पाठक को राम मंदिर परिसर की जिम्मेदारियों से हटा दिया गया है।

चढ़ावे और कीमती वस्तुओं का हिसाब संभालते थे केडी तिवारी

केडी तिवारी मंदिर में रामलला को अर्पित किए जाने वाले कीमती आभूषणों और श्रद्धालुओं की ओर से समर्पित बहुमूल्य वस्तुओं का रिकॉर्ड और हिसाब-किताब रखने की जिम्मेदारी संभालते थे। मंदिर में आने वाले चढ़ावे और महत्वपूर्ण वस्तुओं से संबंधित काम के कारण उनकी भूमिका काफी अहम मानी जाती थी। दूसरी ओर, बजरंग पाठक की जिम्मेदारी वीआईपी दर्शनार्थियों को प्रसाद और अंगवस्त्र उपलब्ध कराने से जुड़ी थी।

दोनों कर्मियों को ट्रस्टी अनिल मिश्रा का करीबी बताया गया

मंदिर प्रशासन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, केडी तिवारी और बजरंग पाठक पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा के करीबी और भरोसेमंद कर्मचारियों में माने जाते थे। ऐसे में दोनों को मंदिर की व्यवस्थाओं से हटाए जाने को हालिया प्रशासनिक बदलावों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, उनके खिलाफ कार्रवाई के पीछे सामने आया तत्काल कारण एक महिला क्षेत्राधिकारी की शिकायत बताई जा रही है।

महिला सीओ की शिकायत के बाद शुरू हुई कार्रवाई

जानकारी के मुताबिक, मंदिर में तैनात एक महिला क्षेत्राधिकारी के कुछ अतिथि रामलला के दर्शन के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान अतिथियों के स्वागत और प्रसाद से जुड़ी व्यवस्था को लेकर बजरंग पाठक के साथ कथित तौर पर विवाद हो गया। इसके बाद महिला अधिकारी की ओर से शिकायत की गई। शिकायत मिलने के बाद ट्रस्ट प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की।

ट्रस्ट ने जारी किया नोटिस

शिकायत के बाद ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन की ओर से केडी तिवारी और बजरंग पाठक को नोटिस जारी किया गया। इसके साथ ही दोनों को तत्काल प्रभाव से राम मंदिर से जुड़े दायित्वों से मुक्त कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि परिसर में व्यवस्थाओं से जुड़े मामलों में लापरवाही या विवाद को गंभीरता से लिया जाएगा।

तीर्थ क्षेत्र पुरम किया गया स्थानांतरण

कार्रवाई के बाद दोनों कर्मचारियों को बाग बिजैसी स्थित ‘तीर्थ क्षेत्र पुरम’ में स्थानांतरित कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि मंगलवार से दोनों की राम मंदिर परिसर में प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई है। यानी अब वे मंदिर परिसर में पहले की तरह अपनी जिम्मेदारियां नहीं निभा सकेंगे। प्रशासनिक स्तर पर यह कदम मंदिर की मौजूदा व्यवस्था को सख्त और नियंत्रित रखने की दिशा में उठाया गया है।

चढ़ावा विवाद के बाद बढ़ी सतर्कता

राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ा कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद से मंदिर की सुरक्षा, प्रशासन और पारदर्शिता को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। मामले की जांच के लिए एसआईटी की कार्रवाई भी चल रही है। इससे पहले ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे की चर्चा भी सामने आई थी। ऐसे माहौल में नई कार्रवाई को प्रशासन की सख्त नीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

मंदिर व्यवस्था में जीरो टॉलरेंस की नीति

मंदिर प्रशासन अब व्यवस्थाओं को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने पर जोर दे रहा है। इसका उद्देश्य मंदिर परिसर में पारदर्शिता बनाए रखना और श्रद्धालुओं के बीच किसी तरह का अविश्वास पैदा न होने देना है। चढ़ावे, वीआईपी दर्शन, प्रसाद वितरण और अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियों से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है।

श्रद्धालुओं का भरोसा बनाए रखना प्राथमिकता

राम मंदिर देश और दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में मंदिर की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। हालिया घटनाक्रम के बाद ट्रस्ट की ओर से उठाए जा रहे कदमों का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करना और श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखना बताया जा रहा है। आने वाले दिनों में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के आधार पर और बदलाव होने की संभावना बनी हुई है।

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