UP Election 2027: उत्तर प्रदेश की राजनीतिक गलियारों में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा परवान चढ़ता दिखाई दे रहा है. देश के सबसे बड़े सूबे की सभी 403 विधानसभा सीटों पर फतेह हासिल करने के लिए सभी राजनीतिक दलों ने अभी से ही अपनी कमर कस ली है. एक ओर जहां सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने विजय रथ को बरकरार रखते हुए विकास कार्यों और सुशासन के मॉडल के दम पर तीसरी बार सत्ता में वापसी की पुरजोर कोशिश में जुटी है, वहीं मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी (SP) ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नए सियासी समीकरण को साधकर सत्ता की सीढ़ियां चढ़ने की जुगत में लगी हुई है.
फतेहपुर सीकरी में बीजेपी की लगातार दो जीत

आपको बता दे कि, फतेहपुर सीकरी विधानसभा सीट संख्या 91 है और यह सामान्य सीट है। 2022 में बीजेपी के बाबूलाल ने आरएलडी के बृजेश चाहर को 47,269 वोटों के बड़े अंतर से हराया था। इससे पहले 2017 में भी बीजेपी के चौधरी उदयभान सिंह ने बीएसपी के सूरजपाल सिंह को 52,337 वोटों से मात दी थी। वहीं 2012 में बीएसपी के सूरजपाल सिंह ने यह सीट जीती थी। यानी पिछले तीन विधानसभा चुनावों में सीट का राजनीतिक रुख बीजेपी-बनाम-बीएसपी/आरएलडी के बीच बदलता रहा है, लेकिन समाजवादी पार्टी अब तक यहां खाता नहीं खोल सकी है।
कौन पार्टी दिखाएगी दम?
भारतीय जनता पार्टी (BJP):

बीजेपी के लिए फतेहपुर सीकरी लगातार दो विधानसभा चुनावों में मिली बड़ी जीत सबसे बड़ा आधार है। 2017 में पार्टी को 47.34 प्रतिशत और 2022 में 46.14 प्रतिशत वोट मिले। 2022 में बाबूलाल को 1,12,095 वोट मिले थे। बीजेपी की चुनौती इस बढ़त को बनाए रखने के साथ-साथ जाट, सवर्ण, गैर-यादव ओबीसी और दलित मतदाताओं के बीच अपना गठजोड़ मजबूत रखने की होगी।
समाजवादी पार्टी (SP) / INDIA गठबंधन:

सपा के लिए यह सीट अब भी बड़ी चुनौती है। 2022 में सपा सीधे मुकाबले में शीर्ष दो में नहीं थी, जबकि आरएलडी दूसरे स्थान पर रही। 2027 में यदि विपक्षी वोटों का बेहतर तालमेल बनता है और जाट, मुस्लिम, दलित तथा अन्य पिछड़े वर्गों के मतदाताओं में प्रभाव बढ़ता है, तो बीजेपी के सामने मुकाबला कठिन हो सकता है।
बहुजन समाज पार्टी (BSP):

बीएसपी के लिए फतेहपुर सीकरी कभी मजबूत सीट रही है। 2012 में पार्टी के सूरजपाल सिंह ने जीत दर्ज की थी और 2022 में भी बीएसपी के डॉ. मुकेश कुमार राजपूत को 59,641 वोट यानी करीब 24.55 प्रतिशत वोट मिले। ऐसे में 2027 में बीएसपी का प्रदर्शन सीधे तौर पर बीजेपी और विपक्ष दोनों के चुनावी गणित को प्रभावित कर सकता है।
भौगोलिक क्षेत्र और बनावट

फतेहपुर सीकरी विधानसभा क्षेत्र आगरा जिले में स्थित है। यह सीट मुख्य रूप से ग्रामीण है और खेती-किसानी, जाट राजनीति तथा स्थानीय ग्रामीण मुद्दों का प्रभाव यहां की चुनावी दिशा पर देखा जाता है। फतेहपुर सीकरी का ऐतिहासिक महत्व भी बेहद बड़ा है। विश्व प्रसिद्ध फतेहपुर सीकरी स्मारक के साथ-साथ किरावली, अछनेरा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्र इस विधानसभा क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक तस्वीर बनाते हैं। क्षेत्र में कृषि, स्थानीय व्यापार, रोजगार, सड़क, सिंचाई और ग्रामीण बुनियादी सुविधाएं प्रमुख चुनावी मुद्दे बन सकते हैं।2011 के जनगणना आधारित आकलन में इस विधानसभा क्षेत्र की आबादी का लगभग 81 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण और करीब 19 प्रतिशत शहरी बताया गया था
पिछले चुनावों का सफर: 2012 से 2022 तक
वर्ष 2012 विधानसभा चुनाव — BSP की जीत
विजेता: सूरजपाल सिंह — बहुजन समाज पार्टी

वोट: 67,191
वोट शेयर: 33.09 प्रतिशत
उपविजेता: राजकुमार चाहर — निर्दलीय
वोट: 61,568
जीत का अंतर: 5,623 वोट
2012 में फतेहपुर सीकरी में मुकाबला बेहद करीबी रहा था। बीएसपी के सूरजपाल सिंह ने निर्दलीय राजकुमार चाहर को सिर्फ 5,623 वोटों से हराया था।
वर्ष 2017 विधानसभा चुनाव — BJP की बड़ी वापसी
विजेता: चौधरी उदयभान सिंह — भारतीय जनता पार्टी

वोट: 1,08,586
वोट शेयर: 47.34 प्रतिशत
उपविजेता: सूरजपाल सिंह — बहुजन समाज पार्टी
वोट: 56,249
वोट शेयर: 24.52 प्रतिशत
तीसरे स्थान पर: बृजेश कुमार चाहर — आरएलडी
वोट: 38,307
जीत का अंतर: 52,337 वोट
2017 में बीजेपी ने इस सीट पर जबरदस्त वापसी की। पार्टी ने बीएसपी के मुकाबले करीब 52 हजार वोटों की बढ़त बनाई और पहली बार सीट पर अपनी मजबूत पकड़ दिखाई।
वर्ष 2022 विधानसभा चुनाव — BJP ने फिर मारी बाजी
विजेता: बाबूलाल — भारतीय जनता पार्टी
वोट: 1,12,095
वोट शेयर: 46.14 प्रतिशत
उपविजेता: बृजेश चाहर — राष्ट्रीय लोक दल
वोट: 64,826
वोट शेयर: 26.69 प्रतिशत
तीसरे स्थान पर: डॉ. मुकेश कुमार राजपूत — बहुजन समाज पार्टी
वोट: 59,641
वोट शेयर: 24.55 प्रतिशत
जीत का अंतर: 47,269 वोट
2022 में बीजेपी ने अपना कब्जा बरकरार रखा। खास बात यह रही कि दूसरे और तीसरे स्थान पर आरएलडी और बीएसपी के बीच विपक्षी वोट बंटा, जबकि बीजेपी को 46 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिले।
2027 का चुनावी रण
भारतीय जनता पार्टी (BJP)
बीजेपी के सामने सबसे बड़ी ताकत उसके पिछले दो चुनावों के नतीजे हैं। 2017 में 52,337 और 2022 में 47,269 वोटों के अंतर से जीत बताती है कि पार्टी ने फतेहपुर सीकरी में मजबूत संगठनात्मक आधार तैयार किया है।
2027 में बीजेपी जाट, सवर्ण और गैर-यादव ओबीसी मतदाताओं के साथ-साथ विकास, कानून-व्यवस्था और केंद्र-राज्य सरकार की योजनाओं को चुनावी मुद्दा बना सकती है।
हालांकि, 2024 लोकसभा चुनाव में फतेहपुर सीकरी विधानसभा खंड में बीजेपी की बढ़त घटकर करीब 19,884 वोट रह गई थी। बीजेपी के राजकुमार चाहर को 85,695 और कांग्रेस के रामनाथ सिकरवार को 65,811 वोट मिले थे। यह आंकड़ा संकेत देता है कि विपक्ष पूरी तरह कमजोर नहीं है।
समाजवादी पार्टी / INDIA गठबंधन
सपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि 2022 में पार्टी का उम्मीदवार शीर्ष मुकाबले में नहीं था। आरएलडी दूसरे नंबर पर रही थी। ऐसे में यदि 2027 में विपक्षी गठबंधन मजबूत उम्मीदवार उतारता है और जाट, मुस्लिम, दलित तथा ओबीसी मतदाताओं का बड़ा हिस्सा एक तरफ आता है, तो बीजेपी के लिए मुश्किल बढ़ सकती है। सपा के लिए सबसे जरूरी होगा कि वह अपने पीडीए फॉर्मूले को फतेहपुर सीकरी के स्थानीय सामाजिक समीकरण से जोड़ सके।
बहुजन समाज पार्टी (BSP)
बीएसपी के लिए फतेहपुर सीकरी पुरानी राजनीतिक जमीन वापस पाने का अवसर हो सकती है। 2012 में पार्टी यहां जीत चुकी है और 2022 में भी करीब 24.55 प्रतिशत वोट हासिल कर चुकी है। अगर बीएसपी 2027 में मजबूत दलित उम्मीदवार उतारती है और जाटव वोट बैंक को दोबारा एकजुट करती है, तो वह बीजेपी और सपा दोनों के समीकरण बिगाड़ सकती है।
2027 में क्या होगा रुख?
आपको बताते चले कि, फतेहपुर सीकरी विधानसभा सीट पर फिलहाल बीजेपी का पलड़ा भारी दिखाई देता है। पार्टी ने साल 2017 को विधानसभा चुनाव और 2022 में लगातार बड़ी जीत हासिल की है। 2022 में बीजेपी को 1,12,095 वोट मिले, जबकि दूसरे स्थान पर रहे आरएलडी उम्मीदवार को 64,826 वोट मिले। लेकिन 2027 का चुनाव 2022 जैसा सीधा मुकाबला जरूरी नहीं होगा। जाट वोट की दिशा, दलित वोट का बंटवारा, ओबीसी मतदाताओं का रुख और विपक्षी गठबंधन की एकजुटता चुनाव का समीकरण बदल सकती है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि क्या बीजेपी 2017 और 2022 वाला सामाजिक गठजोड़ बरकरार रख पाएगी? दूसरी तरफ विपक्ष के लिए चुनौती सिर्फ बीजेपी को हराने की नहीं, बल्कि अपने वोटों के बिखराव को रोकने की भी होगी।










