NEET UG 2026 Scam: पेपर लीक के पीछे कौन? CBI जांच में सामने आया पूरा नेटवर्क

NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI जांच ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। एजेंसी ने चार्जशीट में कथित नेटवर्क, डिजिटल सबूत और आरोपियों की भूमिका का खुलासा किया है। आखिर पेपर लीक की साजिश कैसे रची गई और कौन-कौन लोग इसमें शामिल थे? जानिए पूरी इनसाइड स्टोरी।

पेपर लीक के पीछे कौन?

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अगस्त 7, 2026

NEET UG 2026 Scam: NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपनी चार्जशीट में कई अहम खुलासे किए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार यह कोई सामान्य पेपर लीक की घटना नहीं थी, बल्कि कई राज्यों तक फैला एक सुनियोजित नेटवर्क था, जिसमें परीक्षा से जुड़े लोगों के साथ-साथ कोचिंग संचालक, बिचौलिए और अन्य आरोपी शामिल थे। CBI ने इस मामले में कुल 13 लोगों को आरोपी बनाया है। इनमें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के तीन विषय विशेषज्ञों के नाम भी शामिल हैं। हालांकि चार्जशीट में कुछ तकनीकी कमियों के कारण अदालत ने अभी तक इस पर संज्ञान नहीं लिया है।

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महीनों पहले तैयार किया गया था पूरा प्लान

CBI का दावा है कि NEET पेपर लीक की साजिश परीक्षा से कुछ दिन पहले नहीं, बल्कि कई महीने पहले तैयार की गई थी। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने एक ऐसा नेटवर्क बनाया था, जिसके जरिए गोपनीय प्रश्नपत्रों तक पहुंच बनाई गई और फिर उन्हें अलग-अलग माध्यमों से अभ्यर्थियों तक पहुंचाया गया। एजेंसी के मुताबिक, यह एक संगठित आपराधिक गतिविधि थी, जिसमें कई राज्यों के लोग अलग-अलग भूमिका निभा रहे थे।

NTA के तीन विशेषज्ञों पर उठे सवाल

CBI की चार्जशीट में NTA द्वारा नियुक्त तीन विषय विशेषज्ञों को भी आरोपी बनाया गया है। इनमें फिजिक्स, केमिस्ट्री और बॉटनी विषय के विशेषज्ञ शामिल हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन विशेषज्ञों ने अपने पद का गलत इस्तेमाल करते हुए परीक्षा से जुड़े गोपनीय दस्तावेजों तक पहुंच बनाई और कथित रूप से उन्हें लीक नेटवर्क से जुड़े लोगों तक पहुंचाया। CBI के अनुसार, इन विशेषज्ञों को परीक्षा प्रक्रिया के दौरान मिली जिम्मेदारियों का फायदा उठाकर साजिश में शामिल किया गया।

WhatsApp, Telegram और PDF से हुआ पेपर का प्रसार

जांच के दौरान CBI को कई डिजिटल सबूत मिलने का दावा किया गया है। एजेंसी के अनुसार लीक हुए प्रश्नपत्र WhatsApp, Telegram और PDF फाइलों के जरिए साझा किए गए। जब्त किए गए मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में चैट रिकॉर्ड, दस्तावेज और प्रश्नपत्र से जुड़े डिजिटल प्रमाण मिलने की बात कही गई है। CBI के मुताबिक, आरोपी यश यादव के मोबाइल से NEET प्रश्नों की PDF फाइल और Telegram चैट मिली है। इसके अलावा एक WhatsApp ग्रुप भी जांच के दायरे में आया है, जिसे एजेंसी इस नेटवर्क की अहम कड़ी मान रही है।

25 लाख रुपये में प्रश्नपत्र खरीदने का दावा

CBI ने चार्जशीट में दावा किया है कि आरोपी शुभम खैरनार ने कथित रूप से 25 लाख रुपये देकर लीक प्रश्नपत्र हासिल किए थे। जांच एजेंसी के अनुसार यह प्रश्नपत्र कई बिचौलियों के जरिए आगे पहुंचाया गया। CBI का कहना है कि इस नेटवर्क में कोचिंग संचालकों और निजी ऑपरेटरों की भूमिका भी सामने आई है, जिन्होंने प्रश्नपत्र को छात्रों तक पहुंचाने में मदद की।

छात्रों से 4 लाख रुपये लेने की तैयारी का आरोप

जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि कुछ छात्रों और उनके अभिभावकों को करीब 4 लाख रुपये लेकर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने की पेशकश की गई थी। CBI के अनुसार, कुछ संदिग्ध गतिविधियों में ऑफलाइन रिवीजन क्लास के जरिए कथित लीक प्रश्नों पर चर्चा किए जाने की आशंका भी सामने आई है।

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बरामद दस्तावेजों से जांच को मिला आधार

CBI ने जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद करने का दावा किया है। इनमें छात्रों की मार्कशीट, प्रमाणपत्र और हस्ताक्षर किए हुए खाली चेक शामिल हैं। जांच एजेंसी को आशंका है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कथित भुगतान और लेनदेन की सुरक्षा के लिए किया जा रहा था।

कानूनी धाराओं के तहत आगे बढ़ रही जांच

इस मामले में CBI ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत कार्रवाई की है। चार्जशीट में शामिल सभी 13 आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। CBI का कहना है कि मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल चैट और फॉरेंसिक रिपोर्ट इस मामले की जांच में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

चार्जशीट पर अदालत के फैसले का इंतजार

CBI ने चार्जशीट दाखिल कर दी है, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण अदालत ने अभी तक इस पर संज्ञान नहीं लिया है। एजेंसी इन कमियों को दूर करने की प्रक्रिया में है।फिलहाल जांच जारी है और CBI इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।

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