Kolkata Police X Handle: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आए अभूतपूर्व बदलाव की लहर अब केवल मतदान केंद्रों तक सीमित नहीं रही है, बल्कि इसका असर राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी साफ दिखने लगा है। भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत और सत्ता परिवर्तन के बीच कोलकाता पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया व्यवहार ने राज्य के सियासी गलियारों में एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है।
सोशल मीडिया पर सत्ता परिवर्तन की आहट
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जैसे ही मतगणना के रुझानों ने यह स्पष्ट किया कि राज्य में भाजपा की सरकार बन रही है, कोलकाता पुलिस के आधिकारिक X (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर हलचल तेज हो गई। पुलिस प्रशासन ने अपनी ‘फॉलोइंग’ लिस्ट को पूरी तरह से अपडेट कर दिया है। वर्षों से राज्य की सत्ता का केंद्र रहे चेहरों को इस लिस्ट से हटाना डिजिटल बदलाव का सबसे बड़ा संकेत माना जा रहा है। यह कदम दर्शाता है कि प्रशासनिक एजेंसियां अब नई सरकार के स्वागत और उसके साथ तालमेल बिठाने की तैयारी में जुट गई हैं।
ममता और अभिषेक बनर्जी को किया गया अनफॉलो
कोलकाता पुलिस ने अपने आधिकारिक हैंडल से राज्य की निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के कद्दावर नेता अभिषेक बनर्जी को ‘अनफॉलो’ कर दिया है। अब तक ये दोनों नेता राज्य प्रशासन के डिजिटल संवाद और सूचनाओं के आदान-प्रदान का मुख्य हिस्सा थे। विपक्षी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता जाने के संकेतों के साथ ही पुलिस की इस कार्रवाई का उद्देश्य नई राजनीतिक वास्तविकता को स्वीकार करना है। इसे प्रशासन की ‘बदलती वफादारी’ और भविष्य की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह अब लिस्ट में शामिल
ममता बनर्जी को हटाने के साथ ही कोलकाता पुलिस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आधिकारिक हैंडल्स को फॉलो करना शुरू कर दिया है। चूंकि पश्चिम बंगाल अब भाजपा शासित राज्य बनने की ओर अग्रसर है, ऐसे में राज्य पुलिस और केंद्र सरकार के बीच समन्वय बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। डिजिटल स्तर पर उठाया गया यह कदम भविष्य में केंद्र और राज्य के बीच बेहतर प्रशासनिक तालमेल और संभावित सुरक्षा सहयोग की दिशा में एक औपचारिक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
कालीघाट और भवानीपुर में सुरक्षा व्यवस्था में कटौती
बदलाव केवल डिजिटल जगत तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन पर भी इसकी स्पष्ट झलक मिल रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित निजी आवास और अभिषेक बनर्जी के कार्यालयों के बाहर से अतिरिक्त पुलिस बल को धीरे-धीरे हटाया जा रहा है। भवानीपुर जैसे हाई-प्रोफाइल इलाकों से बैरिकेड्स हटाए जाने की खबरें भी सामने आ रही हैं। हालांकि, बंगाल पुलिस मुख्यालय इन बदलावों को एक ‘सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया’ करार दे रहा है, लेकिन राजनीतिक जानकार इसे पुराने युग की विदाई और नए शासन की दस्तक मान रहे हैं।
प्रशासनिक वफादारी और नई व्यवस्था का उदय
पश्चिम बंगाल की ब्यूरोक्रेसी और पुलिस बल हमेशा से चर्चाओं में रहे हैं। सत्ता परिवर्तन के इस दौर में पुलिस द्वारा उठाया गया यह ‘डिजिटल कदम’ एक बड़े संदेश की तरह काम कर रहा है। यह स्पष्ट करता है कि राज्य का प्रशासनिक ढांचा अब नई कमान के तहत काम करने के लिए मानसिक रूप से तैयार है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा की नई सरकार बनने के बाद पुलिस और प्रशासन के स्तर पर और कौन से बड़े फेरबदल देखने को मिलते हैं।










