Kiran Bedi Advice: छात्र आंदोलन पर किरण बेदी का बड़ा बयान, बोलीं- रायट पुलिस को पीछे रहना चाहिए

छात्र आंदोलनों के बीच पूर्व IPS अधिकारी किरण बेदी ने प्रदर्शन संभालने का नया तरीका सुझाया है। उन्होंने कहा कि शुरुआत में सिविल डिफेंस को आगे रखना चाहिए और रायट पुलिस को पीछे रहना चाहिए। आखिर उन्होंने ऐसा मॉडल क्यों बताया और इससे टकराव कैसे कम हो सकता है, जानिए पूरी जानकारी।

छात्र आंदोलन पर किरण बेदी का बड़ा बयान

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

जुलाई 23, 2026

Kiran Bedi Advice: देश की पहली महिला IPS अधिकारी रहीं किरण बेदी ने छात्र आंदोलनों और विरोध-प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए एक अलग रणनीति सुझाई है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों से निपटने के दौरान सबसे पहले शांतिपूर्ण और संवाद आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। किरण बेदी ने सुझाव दिया कि सरकार को ऐसे मामलों में प्रशिक्षित सिविल डिफेंस कर्मियों की तैनाती पर विचार करना चाहिए। उनके अनुसार, शुरुआत में सीधे दंगा-रोधी पुलिस को आगे करने के बजाय ऐसी टीमों को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए, जो स्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से संभाल सकें।

यह सुझाव ऐसे समय आया है जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है और देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्र आंदोलनों को लेकर चर्चा तेज है।

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सोशल मीडिया के जरिए रखा अपना पक्ष

पूर्व IPS अधिकारी किरण बेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने अपनी पोस्ट में प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली पुलिस को टैग करते हुए छात्र आंदोलनों से निपटने के लिए यह सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रशासन का पहला उद्देश्य स्थिति को शांत रखना और टकराव से बचना होना चाहिए। उनके मुताबिक, सही रणनीति अपनाकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव को कम किया जा सकता है।

सिविल डिफेंस को सुरक्षा 

किरण बेदी ने अपने मॉडल को देश की सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ते हुए समझाया। उन्होंने कहा कि जिस तरह सीमा पर BSF सुरक्षा की पहली लाइन के रूप में काम करती है और उसके बाद अन्य सुरक्षा बलों की भूमिका आती है, उसी तरह छात्र आंदोलनों में भी सिविल डिफेंस को शुरुआती जिम्मेदारी दी जा सकती है। उनका कहना है कि सिविल डिफेंस की टीमें पहले से ही कई राज्यों में मौजूद हैं। जरूरत है कि उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वे भीड़ नियंत्रण और संवाद स्थापित करने में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकें।

दंगा-रोधी पुलिस को पीछे रखने की सलाह

किरण बेदी के अनुसार, प्रदर्शनकारियों और हथियारों से लैस पुलिस बल के बीच सीधा आमना-सामना कई बार तनाव बढ़ा सकता है। इसलिए दंगा-रोधी पुलिस को शुरुआत में पीछे रहना चाहिए और केवल आवश्यकता पड़ने पर ही हस्तक्षेप करना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि रायट पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी सिविल डिफेंस टीमों की सुरक्षा करना होनी चाहिए। यदि हालात नियंत्रण से बाहर हों या सिविल डिफेंस कर्मियों को गंभीर खतरा हो, तभी दंगा-रोधी पुलिस को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

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टकराव कम करने और संवाद बढ़ाने पर जोर

किरण बेदी का मानना है कि छात्र आंदोलनों को केवल कानून-व्यवस्था की चुनौती के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। ऐसे मामलों में प्रशासन को संयम, बातचीत और बेहतर प्रबंधन के जरिए समाधान निकालने की कोशिश करनी चाहिए। उनके अनुसार, शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हैं और प्रशासन की भूमिका यह सुनिश्चित करना है कि विरोध भी सुरक्षित तरीके से हो और कानून व्यवस्था भी बनी रहे।