Jhiram Ghati Case : झीरम मामले में NIA जांच पर विजय शर्मा का बयान, फैसले के बाद बढ़ी सियासी हलचल

झीरम घाटी मामले में NIA की विशेष अदालत के फैसले के बाद राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है। अदालत ने 10 आरोपियों को दोषी ठहराया और बाद में सजा सुनाई। अब विजय शर्मा ने NIA की जांच और अदालत के सामने पेश किए गए सबूतों को लेकर अपनी बात रखी है, जिससे नए सवाल उठे।

Jhiram Ghati Case

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 17, 2026

Jhiram Ghati Case : छत्तीसगढ़ के चर्चित झीरम घाटी मामले में NIA की विशेष अदालत के फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। 2013 के इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत 29 लोगों की मौत हुई थी। सितंबर 2026 में अदालत ने मामले में दोषी ठहराए गए 10 आरोपियों को मृत्युदंड सुनाया है।

जगदलपुर पहुंचे विजय शर्मा ने रखा सरकार का पक्ष

जगदलपुर पहुंचे छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने झीरम घाटी मामले को लेकर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने मामले की जांच, आरोपियों की स्थिति और कथित सबूतों को लेकर अपनी बात कही। शर्मा ने कहा कि पूरे मामले को अलग-अलग श्रेणियों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर समझने की जरूरत है।

आरोपियों की अलग-अलग श्रेणियों का किया उल्लेख

विजय शर्मा ने झीरम मामले से जुड़े कुल 39 लोगों की अलग-अलग स्थिति का उल्लेख किया। उनके मुताबिक, इनमें नौ आरोपी अब ‘न्यूट्रलाइज’ हो चुके हैं, जबकि 11 आरोपियों के खिलाफ ट्रायल चला। उन्होंने यह भी कहा कि 14 माओवादियों का पुनर्वास हो चुका है। गृहमंत्री ने इन आंकड़ों के जरिए मामले में आरोपियों की अलग-अलग स्थिति की ओर ध्यान दिलाया।

NIA की जांच पर गृहमंत्री ने जताया भरोसा

गृहमंत्री विजय शर्मा ने NIA की जांच का बचाव करते हुए कहा कि एजेंसी ने मामले की जांच तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की। इसी जांच के आधार पर NIA की विशेष अदालत में लंबे समय तक सुनवाई चली। अदालत ने सितंबर 2026 में 10 आरोपियों को दोषी ठहराने के बाद उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई।

भूपेश बघेल के दावे पर विजय शर्मा की प्रतिक्रिया

झीरम मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बयान पर भी विजय शर्मा ने प्रतिक्रिया दी। शर्मा ने कहा कि यदि किसी के पास इस मामले से जुड़े महत्वपूर्ण सबूत मौजूद हैं, तो उन्हें जांच एजेंसियों के सामने प्रस्तुत किया जाना चाहिए। उन्होंने इस विषय को सार्वजनिक बहस तक सीमित रखने के बजाय संबंधित जांच प्रक्रिया में तथ्य उपलब्ध कराने की बात कही।

सबूत हैं तो जांच एजेंसियों तक पहुंचाने की अपील

विजय शर्मा ने कहा कि झीरम घाटी मामले से संबंधित किसी भी ठोस जानकारी या साक्ष्य को जांच एजेंसी के सामने रखा जा सकता है। उनके मुताबिक, यदि किसी व्यक्ति के पास ऐसे तथ्य हैं जो जांच के लिए उपयोगी हो सकते हैं, तो उन्हें संबंधित एजेंसी को सौंपना उचित होगा। इससे जांच में उपलब्ध सामग्री को आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनाने का रास्ता खुल सकता है।

चौक-चौराहों की चर्चा से अलग जांच प्रक्रिया पर जोर

गृहमंत्री ने कहा कि मामले से जुड़े कथित सबूतों को लेकर सार्वजनिक स्थानों पर चर्चा करने के बजाय उन्हें जांच एजेंसियों तक पहुंचाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि किसी पक्ष के पास ठोस जानकारी है, तो उसे संबंधित एजेंसी के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए, ताकि जांच प्रक्रिया में उस पर विचार हो सके।

2013 के झीरम हमले की जांच रही है लंबी प्रक्रिया

25 मई 2013 को बस्तर के झीरम घाटी क्षेत्र में कांग्रेस के परिवर्तन यात्रा काफिले पर माओवादी हमला हुआ था। इस हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सहित 29 लोगों की मौत हुई थी। NIA ने मामले की जांच की और अदालत में आरोपपत्र पेश किए। सितंबर 2026 में विशेष अदालत ने 10 आरोपियों को दोषी ठहराया और बाद में मृत्युदंड सुनाया।

फैसले के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर

NIA अदालत के फैसले के बाद अब मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, दोषियों को उच्च न्यायालय में अपील के लिए 30 दिन का समय दिया गया है। विजय शर्मा ने अपने बयान में जांच एजेंसी की प्रक्रिया पर भरोसा जताते हुए कहा कि यदि किसी के पास अतिरिक्त सबूत हैं, तो उन्हें जांच एजेंसियों के सामने पेश किया जाना चाहिए। इस बीच झीरम घाटी मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी जारी हैं।

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