Manipur Relief Camp : मणिपुर कैंपों में मौतों पर उठे गंभीर सवाल, सुप्रीम कोर्ट ने मांगे दस्तावेज

मणिपुर हिंसा के बाद राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित लोगों की मौतों पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने 25 अप्राकृतिक मौतों की जांच, पोस्टमार्टम, एफआईआर और मौत के कारणों से जुड़ी विस्तृत जानकारी मांगी है। अब राज्य सरकार को अदालत के सामने पूरी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।

Manipur Relief Camp

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 17, 2026

Manipur Relief Camp : मणिपुर हिंसा के बाद राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित लोगों की अप्राकृतिक मौतों की खबरों पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। गुरुवार को मणिपुर हिंसा से जुड़े यौन हिंसा के मामलों की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार से इन मौतों की विस्तृत जानकारी और जांच की मौजूदा स्थिति बताने को कहा। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस मोहना की पीठ ने इस संबंध में मणिपुर के मुख्य सचिव को निर्देश दिए।

25 अप्राकृतिक मौतों का पूरा रिकॉर्ड मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर के मुख्य सचिव से 25 अप्राकृतिक मौतों से संबंधित पूरी जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है। कोर्ट ने मौत की वजह, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच से जुड़े अन्य दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए। पीठ ने यह स्पष्ट करना चाहा कि इन मामलों में मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए क्या जांच की गई और अब तक जांच किस स्तर तक पहुंची है।

राहत शिविरों में सुरक्षा और सुविधाओं पर सवाल

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित लोगों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि शिविरों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। इसके साथ ही विस्थापित लोगों को पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराने पर भी ध्यान देने का निर्देश दिया गया।

आठ जिलों में 640 मौतों की रिपोर्ट पर संज्ञान

सुप्रीम कोर्ट ने उस रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया, जिसमें मणिपुर के आठ जिलों के राहत शिविरों में कुल 640 मौतों का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक इनमें केवल 20 मामलों में पोस्टमार्टम कराया गया। कोर्ट ने इस स्थिति पर सवाल उठाते हुए पूछा कि बाकी मौतों के मामलों में पोस्टमार्टम क्यों नहीं कराया गया। अदालत ने कुछ मामलों में केवल 20 से 30 हजार रुपये मुआवजा दिए जाने को लेकर भी राज्य सरकार से जवाब मांगा।

सभी अप्राकृतिक मौतों में FIR दर्ज करने का निर्देश

अदालत ने मणिपुर लीगल सर्विसेज अथॉरिटी को मामले पर तत्काल ध्यान देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि अप्राकृतिक मौत के सभी मामलों में FIR दर्ज की जानी चाहिए और मौत की वास्तविक वजह की जांच होनी चाहिए। इसके अलावा राहत शिविरों में विस्थापित लोगों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने तथा पहले से दर्ज FIR की जांच जल्द पूरी करने को भी कहा गया।

25 मौतों की जानकारी नहीं मिलने पर सवाल

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने मणिपुर के एडवोकेट जनरल से भी सवाल किया। अदालत ने पूछा कि 4 जुलाई को समिति की ओर से जिन 25 मौतों की जानकारी मांगी गई थी, वह अब तक उपलब्ध क्यों नहीं कराई गई। कोर्ट ने राज्य सरकार से संबंधित रिकॉर्ड जल्द पेश करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

3,020 मामलों की जांच कर रही 42 SIT

केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि मणिपुर के आठ जिलों में 42 विशेष जांच दल यानी SIT गठित किए गए हैं। ये टीमें कुल 3,020 मामलों की जांच कर रही हैं। स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार 302 मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, जबकि 1,583 मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल हुई है। 1,135 मामले अभी जांच के स्तर पर हैं और 33 मामलों में ट्रायल शुरू हो चुका है।

CBI कर रही 31 मामलों की जांच

सुनवाई में बताया गया कि केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI कुल 31 मामलों की जांच कर रही है। इनमें 28 मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई है, जबकि छह मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने की जानकारी दी गई। तीन मामले अभी जांच के अधीन हैं। चार्जशीट दाखिल किए गए मामलों में आगे की न्यायिक कार्रवाई शुरू हो चुकी है।

गवाहों और गिरफ्तारियों की भी जानकारी

CBI से जुड़े मामलों में चार्जशीट में कुल 978 गवाहों के नाम शामिल किए गए हैं। हालांकि अब तक केवल छह गवाहों की गवाही दर्ज होने की जानकारी अदालत को दी गई। इन मामलों में 38 लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है। सुप्रीम कोर्ट अब राहत शिविरों में हुई मौतों, जांच की प्रगति और विस्थापित लोगों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर राज्य सरकार की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।

मणिपुर हिंसा मामलों की निगरानी जारी

सुप्रीम कोर्ट मणिपुर हिंसा से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान जांच और राहत व्यवस्था से संबंधित कई पहलुओं पर राज्य सरकार से जानकारी मांग रहा है। मौजूदा सुनवाई में अप्राकृतिक मौतों की जांच, पोस्टमार्टम, FIR, मुआवजा, राहत शिविरों की सुरक्षा और चिकित्सा सुविधाएं प्रमुख मुद्दे रहे। अदालत के निर्देशों के बाद अब राज्य सरकार की ओर से पेश की जाने वाली विस्तृत जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

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