Janmashtami 2026: कृष्ण जन्म की बेला पर जगमगाया मथुरा, घर-घर गूंजे बधाई गीत

मथुरा में रात 12 बजे श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर कान्हा के जन्म के साथ ही उत्सव का माहौल छा गया। बधाई गीतों और जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा, भक्तों ने जमकर खुशियां मनाईं।

Janmashtami 2026

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

सितम्बर 5, 2026

Janmashtami 2026: इस भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की मध्यरात्रि का दृश्य ठीक वैसा ही था, जैसा कभी द्वापर युग में हुआ था। दिनभर बादलों की मूसलाधार बारिश के बाद रात को भी आसमान पर काली घटाएं छाई रहीं। हर पल घनघोर बारिश होने को आतुर थी और आसमान में बिजली कड़क रही थी। जैसे ही घड़ी की सुइयों ने शुक्रवार रात के ठीक 12 बजाए, पूरा ब्रजमंडल “नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा। इस अलौकिक आभा, भारी जनसैलाब, ढोल-नगाड़ों की थाप और घंटे-घड़ियालों की गूंज के बीच देश के कोने-कोने में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। मंदिरों और घर-घर में गूंजते बधाई गीतों के बीच लाखों श्रद्धालुओं ने इस पावन पल के साक्षी बनकर खुद को धन्य महसूस किया।

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श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर मुख्य अनुष्ठान

जन्माष्टमी का मुख्य और सबसे भव्य आयोजन मथुरा के प्रसिद्ध श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर संपन्न हुआ। यहां भक्तों का उत्साह चरम पर था। रात ठीक 11 बजे नवगृह स्थापना के साथ विशेष पूजन का शुभारंभ हुआ। इसके बाद, रात 11:55 बजे तक कमल पुष्प और तुलसीदल के जरिए विधि-विधान से सहस्त्रार्चन किया गया। रात के 11:59 बजते ही भागवत भवन में विराजमान युगल सरकार के कपाट बंद कर दिए गए। यह एक मिनट का पल भक्तों के लिए ऐसा था, मानो सदियां बीत रही हों।

स्वर्ण-रजत कामधेनु से हुआ लल्ला का अभिषेक

रात ठीक 12 बजे लीलाधर श्रीकृष्ण के चलित श्रीविग्रह को भागवत भवन लाया गया। यहां एक भव्य रजत कमल पुष्प में विराजमान भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक किया गया। इस दौरान श्रीकृष्ण जन्मस्थान के ट्रस्टी अनुराग डालमिया, सचिव कपिल शर्मा और सदस्य गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने सोने और चांदी से निर्मित लगभग 100 किलोग्राम वजनी कामधेनु गाय की मूर्ति में गंगाजल और पंचामृत भरकर लल्ला का महामभिषेक किया। इस मंगल बेला पर ढोल-नगाड़े, घंटे-घड़ियाल, झांझ-मजीरे, मृदंग और शंख की गूंज से पूरा परिसर गूंज उठा। कान्हा के जन्मोत्सव पर गाए जाने वाले पारंपरिक बधाई गीतों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। जन्मस्थान पर भगवान के दर्शन और पूजन का यह दौर रात डेढ़ बजे तक निरंतर चलता रहा।

गर्भगृह से पहली बार ऐतिहासिक लाइव स्ट्रीमिंग

भगवान श्रीकृष्ण के 5253वें जन्मोत्सव के अवसर पर इस बार एक खास तकनीकी व्यवस्था की गई। श्रीकृष्ण जन्मभूमि स्थित मूल श्रीगर्भगृह यानी भगवान के कारागार से अभिषेक और पूजा-अर्चना की पहली बार लाइव स्ट्रीमिंग कराई गई। गर्भगृह वही पवित्र स्थान है जहां श्रीकृष्ण बाल-गोपाल रूप में विराजते हैं। अब तक केवल भागवत भवन से ही लाइव प्रसारण किया जाता था, लेकिन इस बार शुक्रवार की मध्यरात्रि करोड़ों श्रद्धालुओं ने घर बैठे ही टेलीविजन स्क्रीन और डिजिटल माध्यमों पर सीधे गर्भगृह से दर्शन किए। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान द्वारा इस ऐतिहासिक प्रसारण के लिए अत्याधुनिक कैमरों की व्यवस्था की गई थी, जिससे दूर बैठे भक्त भी इस दिव्य अलौकिक पल का हिस्सा बन सके।

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