Krishna Janmashtami : भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि आते ही पूरा देश भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव में रंग गया है। उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर भक्तों की भारी भीड़ दिखाई दे रही है। हर तरफ ‘जय श्रीकृष्ण’ और ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारे गूंज रहे हैं। मथुरा, वृंदावन, जयपुर, मुंबई, वाराणसी और चेन्नई समेत देश के कई शहरों में श्रद्धालु सुबह से ही दर्शन के लिए कतारों में खड़े हैं।
मथुरा में समुद्र मंथन की भव्य सजावट
भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में इस बार जन्माष्टमी का उत्सव बेहद खास नजर आ रहा है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर परिसर को पौराणिक ‘समुद्र मंथन’ की थीम पर भव्य रूप से सजाया गया है। वहीं, मंदिर के गर्भगृह को ‘कलहंस राजहंस’ की आकर्षक थीम में सजाया गया है। रंग-बिरंगी सजावट और धार्मिक आयोजन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
सीएम योगी ने जन्मस्थान पर की पूजा
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को मथुरा पहुंचे और श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में करीब 45 मिनट बिताए। उन्होंने सबसे पहले गौ-पूजन किया। इसके बाद केशव देव मंदिर, योगमाया मंदिर, गर्भगृह और भागवत भवन में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री ने देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर सेवा समिति ने उनका पारंपरिक स्वागत कर भगवान कृष्ण के पाञ्चजन्य शंख की प्रतिकृति भेंट की।
लखनऊ में राज्यपाल ने किए दर्शन
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने भी जन्माष्टमी के अवसर पर लखनऊ के ऐतिहासिक चौक स्थित श्री द्वारकाधीश मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने मंदिर में मौजूद बच्चों और स्वयंसेवकों से बातचीत की। जन्माष्टमी के मौके पर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मंदिरों में विशेष पूजा और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
वाराणसी में 51 सामग्रियों से महाभिषेक
धर्मनगरी वाराणसी में भी जन्माष्टमी का उत्साह देखते ही बन रहा है। दुर्गाकुंड स्थित इस्कॉन मंदिर में मध्यरात्रि के जन्मोत्सव की विशेष तैयारियां की गई हैं। भगवान के महाभिषेक के लिए गंगाजल, दूध, दही, पंचामृत और फलों व फूलों के रस सहित 51 पवित्र सामग्रियों की व्यवस्था की गई है। जन्मोत्सव के बाद बाल स्वरूप लड्डू गोपाल को 108 प्रकार के व्यंजनों से तैयार विशेष भोग अर्पित किया जाएगा।
जयपुर के गोविंददेवजी मंदिर में उमड़ी भीड़
जयपुर के प्रसिद्ध गोविंददेवजी मंदिर में जन्माष्टमी का उत्सव शुरू होने से पहले ही श्रद्धालुओं की कतार लग गई थी। शुक्रवार तड़के चार बजे मंगला आरती के लिए मंदिर के कपाट खुलते ही परिसर जयकारों से गूंज उठा। मध्यरात्रि के अभिषेक के लिए मंदिर प्रशासन ने बड़ी मात्रा में दूध, दही, देसी घी, चीनी और शहद की व्यवस्था की है।
मुंबई में दही-हांडी को लेकर उत्साह
महाराष्ट्र में जन्माष्टमी के अगले दिन होने वाले दही-हांडी उत्सव को लेकर भी तैयारियां जोर पकड़ चुकी हैं। मुंबई में गोविंदाओं की टोलियां मटकी फोड़ने के लिए अभ्यास कर रही हैं। कई स्थानों पर ऊंचाई पर माखन और दही से भरी मटकियां बांधी गई हैं। गिरगांव चौपाटी स्थित इस्कॉन मंदिर में मंगला आरती के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। धार्मिक गुरुओं ने भक्तों को भगवद्गीता के निष्काम कर्म के संदेश से भी अवगत कराया।
दक्षिण भारत में अष्टमी रोहिणी की धूम
दक्षिण भारत में भी जन्माष्टमी अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाई जा रही है। केरल के गुरुवायूर मंदिर और अरनमुला पार्थसारथी मंदिर में ‘अष्टमी रोहिणी’ पर्व को लेकर विशेष आयोजन हुए। अरनमुला मंदिर में आयोजित ‘अष्टमी रोहिणी सद्या’ के लिए 25 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को प्रसाद परोसने की तैयारी की गई। चेन्नई के ईसीआर स्थित इस्कॉन मंदिर में भी दो दिवसीय धार्मिक कार्यक्रमों में युवाओं और परिवारों ने उत्साह से हिस्सा लिया।
नेताओं ने दी जन्माष्टमी की शुभकामनाएं
जन्माष्टमी के पावन अवसर पर पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों तथा राज्यपालों ने भी देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों के जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा की कामना की।
भक्ति और एकता का संदेश देता पर्व
कृष्ण जन्माष्टमी पूरे भारत में धार्मिक आस्था, प्रेम और उल्लास के साथ मनाई जा रही है। यह पर्व अधर्म पर धर्म और अंधकार पर प्रकाश की विजय का संदेश देता है। मथुरा से मुंबई और वाराणसी से दक्षिण भारत तक अलग-अलग परंपराओं में मनाया जा रहा यह उत्सव देश को भक्ति और सांस्कृतिक एकता के सूत्र में बांधता नजर आ रहा है।
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