Jaishankar on Iran: भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर भारत का कड़ा संदेश, समुद्री सुरक्षा पर जोर

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान से जुड़े घटनाक्रम के बीच भारतीय नाविकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए समुद्री सुरक्षा पर भारत का स्पष्ट रुख दोहराया। उनके बयान के बाद क्षेत्रीय हालात और भारत की रणनीतिक तैयारी को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। अब नजर आगे के कूटनीतिक कदमों पर है।

Jaishankar on Iran

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 31, 2026

Jaishankar on Iran:  भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से टेलीफोन पर महत्वपूर्ण बातचीत की। इस वार्ता का मुख्य केंद्र पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, समुद्री सुरक्षा और भारतीय नागरिकों, विशेष रूप से नाविकों की सुरक्षा रहा। भारत ने स्पष्ट रूप से कहा कि क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि या संघर्ष का असर अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और निर्दोष समुद्री कर्मचारियों पर नहीं पड़ना चाहिए। भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करने की अपील भी की।

भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर भारत का स्पष्ट संदेश

बातचीत के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरानी समकक्ष के सामने भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने दो टूक कहा कि किसी भी परिस्थिति में वाणिज्यिक जहाजों या उन पर कार्यरत समुद्री कर्मचारियों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। भारत ने इस बात पर जोर दिया कि समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार की जीवनरेखा हैं और इन पर होने वाले हमले न केवल संबंधित देशों बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं। इसलिए ऐसे किसी भी हमले से हर हाल में बचना आवश्यक है।

सोशल मीडिया पर साझा की बातचीत की जानकारी

विदेश मंत्री जयशंकर ने बातचीत के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि शाम के समय उनकी ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से विस्तृत चर्चा हुई। इस दौरान क्षेत्र में जारी तनाव और लगातार हो रहे हमलों को लेकर भारत ने अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत का स्पष्ट मत है कि कमर्शियल शिपिंग और समुद्री कर्मचारियों पर किसी भी प्रकार का हमला स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने दोहराया कि भारत किसी भी पक्ष द्वारा किए गए ऐसे हमलों की कड़ी निंदा करता है।

भारत ने दोहराया कूटनीति और संवाद का समर्थन

एस. जयशंकर ने बताया कि बातचीत के दौरान उन्होंने मौजूदा हालात और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर ईरान का दृष्टिकोण भी जाना। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से विवादों के समाधान के लिए बातचीत, कूटनीति और शांतिपूर्ण समाधान का समर्थक रहा है। उनका कहना था कि बढ़ते तनाव का समाधान सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि संवाद और आपसी विश्वास के जरिए ही संभव है। भारत ने एक बार फिर सभी पक्षों से संयम बरतने और शांति स्थापित करने के लिए मिलकर प्रयास करने की अपील की।

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच हुई वार्ता

भारत और ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियां तेज हुई हैं, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे माहौल में भारत ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और हालात को और बिगड़ने से रोकने की अपील की है।

ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर हमले का किया दावा

ईरान ने दावा किया है कि उसने कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए नए हमले किए हैं। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, सेना ने ‘ऑपरेशन लाइटनिंग’ के 27वें चरण के तहत अमेरिका द्वारा संचालित अहमद अल जाबेर एयर बेस पर ड्रोन हमले किए। ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई हाल ही में उसके क्षेत्र में हुए अमेरिकी हमले के जवाब में की गई है। इन घटनाओं ने क्षेत्रीय तनाव को और अधिक बढ़ा दिया है।

अमेरिकी कार्रवाई के जवाब का दावा

तेहरान का कहना है कि यह सैन्य अभियान केसम द्वीप पर स्थित एक रिहायशी घर पर हुए अमेरिकी हमले की प्रतिक्रिया है। ईरानी पक्ष का आरोप है कि उस कार्रवाई में सैन्य ढांचे को निशाना बनाया गया था। इसमें एयरक्राफ्ट शेल्टर, सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम और अन्य महत्वपूर्ण सैन्य उपकरणों के भंडारण स्थलों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। हालांकि इन दावों पर स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इन घटनाओं ने क्षेत्र में तनाव को और गहरा कर दिया है।

समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर की आशंका

पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का सीधा असर समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों पर पड़ सकता है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से दुनिया के बड़े हिस्से की ऊर्जा आपूर्ति होती है। ऐसे में किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई या जहाजों पर हमला वैश्विक बाजार, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित कर सकता है। भारत ने इसी चिंता को सामने रखते हुए समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

भारत की प्राथमिकता है नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति

भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता अपने नागरिकों और भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही भारत क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और सुरक्षित समुद्री मार्गों का भी समर्थक है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की यह बातचीत दर्शाती है कि भारत मौजूदा संकट पर लगातार नजर बनाए हुए है और कूटनीतिक माध्यमों से तनाव कम करने के हर संभव प्रयास में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

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