Haryana News: प्रदेश सरकार ने पेंशन से जुड़े मामलों को लेकर अब सख्त रुख अपना लिया है। अदालतों में लंबित पेंशन मामलों में जवाब और लिखित बयान दाखिल करने में होने वाली देरी को लेकर सरकार ने सभी विभागों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों और प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। सरकार ने कहा है कि पेंशन मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
वित्त विभाग की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि अदालतों में पेंशन संबंधी मामलों में संयुक्त लिखित बयान समय सीमा के भीतर दाखिल किए जाने चाहिए। यदि जवाब दाखिल करने में देरी होती है और इसका असर सरकार के पक्ष पर पड़ता है, तो संबंधित अधिकारी या विभाग को जिम्मेदार माना जाएगा।
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वित्तीय नुकसान पर अधिकारियों पर गिरेगी गाज
वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी अधिकारी या विभाग की लापरवाही के कारण राज्य सरकार को वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है, तो ऐसे मामलों में जवाबदेही तय की जाएगी। इसके साथ ही अगर अदालतों में देरी या कमजोर जवाब के कारण सरकार के खिलाफ प्रतिकूल कानूनी उदाहरण स्थापित होते हैं, तो संबंधित अफसरों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
सरकार का मानना है कि पेंशन मामलों में समय पर और सही तथ्यों के साथ जवाब दाखिल करना बेहद जरूरी है। कई बार विभागीय स्तर पर देरी या समन्वय की कमी के कारण अदालतों में सरकार का पक्ष कमजोर पड़ जाता है। इसी को देखते हुए वित्त विभाग ने सभी प्रशासनिक इकाइयों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
वित्त विभाग और प्रधान महालेखाकार देंगे संयुक्त जवाब
वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की ओर से जारी पत्र में पुराने निर्देशों का भी उल्लेख किया गया है। पत्र में कहा गया है कि 29 जनवरी 2018 को जारी दिशा-निर्देशों के तहत अदालतों में चल रहे पेंशन मामलों में वित्त विभाग और प्रधान महालेखाकार की ओर से संयुक्त जवाब दाखिल करने की व्यवस्था बनाई गई थी।
इन मामलों में जवाब महाधिवक्ता कार्यालय के माध्यम से अदालत में प्रस्तुत किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अदालत में सरकार का पक्ष सही, स्पष्ट और कानूनी रूप से मजबूत तरीके से रखा जाए।
विभागों को समन्वय बढ़ाने की सलाह
सरकार ने विभागों को निर्देश दिया है कि पेंशन से जुड़े मामलों में वित्त विभाग, प्रधान महालेखाकार कार्यालय और महाधिवक्ता कार्यालय के बीच बेहतर तालमेल रखा जाए। संबंधित अधिकारी समय पर रिकॉर्ड उपलब्ध कराएं, ताकि जवाब दाखिल करने में अनावश्यक देरी न हो।
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लापरवाही अब नहीं होगी माफ
प्रदेश सरकार के इस आदेश से साफ संकेत मिलता है कि पेंशन मामलों में देरी करने वाले अधिकारियों पर अब सख्ती हो सकती है। सरकार चाहती है कि अदालतों में लंबित मामलों का समय पर निपटारा हो और राज्य को किसी भी प्रकार के वित्तीय या कानूनी नुकसान से बचाया जा सके।










