Haryana News: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के आज प्रस्तावित गुरुग्राम दौरे से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री के विरोध की आशंका के चलते जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। एहतियातन कदम उठाते हुए, पुलिस ने सोमवार सुबह से ही शहर के कई प्रमुख कांग्रेस नेताओं को उनके घरों में नजरबंद कर दिया है। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बता रहा है, वहीं पुलिस प्रशासन का कहना है कि यह कदम कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
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प्रमुख नेताओं पर पुलिस का शिकंजा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री के दौरे के विरोध को रोकने के लिए पुलिस ने कांग्रेस के संगठन पदाधिकारियों को निशाना बनाया है।
वर्धन यादव (ग्रामीण जिला अध्यक्ष): पुलिस ने सबसे पहले ग्रामीण जिला अध्यक्ष वर्धन यादव के घर को घेर लिया। उनके आवास और कार्यालय के बाहर सादी वर्दी में पुलिसकर्मियों की तैनाती देखी गई, जिससे उनका बाहर निकलना असंभव हो गया।
पंकज डावर (शहरी जिला अध्यक्ष): शहरी जिला अध्यक्ष पंकज डावर के बारे में भी पुलिस और इंटेलिजेंस की टीमें सक्रिय रहीं। हालांकि, डावर सुबह नौ बजे ही अपने निजी कार्य से रोहतक के लिए निकल चुके थे, लेकिन पुलिस ने उनके परिवार और ठिकानों पर नजर रखी।
अन्य कार्यकर्ता: इनके अलावा, ब्लॉक अध्यक्ष सुनील यादव और पार्टी के अन्य सक्रिय कार्यकर्ताओं को भी उनके घरों में नजरबंद कर दिया गया है, ताकि वे सीएम के कार्यक्रम स्थल तक न पहुंच सकें।
कांग्रेस नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया

नजरबंद किए गए कांग्रेस नेताओं ने सरकार और प्रशासन के इस कदम की कड़ी आलोचना की है और इसे तानाशाहीपूर्ण रवैया करार दिया है।
ग्रामीण जिला अध्यक्ष वर्धन यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस कार्रवाई पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के सवालों का सामना करने के बजाय सरकार पुलिस बल का दुरुपयोग कर रही है। वर्धन यादव ने सवाल उठाया, “क्या सरकार विपक्ष के सवालों से इतनी डर गई है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने के अधिकार को भी छीना जा रहा है? यह निंदनीय है।”
वहीं, पंकज डावर ने रोहतक से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सत्ता के दबाव और प्रशासनिक डंडे के जोर पर जनता की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की कार्रवाइयों से कांग्रेस कार्यकर्ताओं के हौसले पस्त होने के बजाय और मजबूत होंगे।
दो हफ्ते पहले दिखाए गए थे काले झंडे
इस कड़े पुलिस पहरे के पीछे का मुख्य कारण दो हफ्ते पुरानी एक घटना है। दरअसल, लगभग पखवाड़े भर पहले जब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी गुरुग्राम आए थे, तब कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दोनों जिला अध्यक्षों के नेतृत्व में उनके काफिले को काले झंडे दिखाए थे।
उस दौरान भारी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद सीएम के काफिले तक प्रदर्शनकारियों का पहुंचना पुलिस की बड़ी विफलता मानी गई थी। इस गंभीर चूक के चलते गुरुग्राम पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की थी और ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में 17 पुलिस कर्मियों को सस्पेंड कर दिया था।
पिछली घटना से सबक लेते हुए और किसी भी अप्रिय स्थिति या सुरक्षा चूक से बचने के लिए, गुरुग्राम पुलिस इस बार कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती और फूंक-फूंक कर कदम रख रही है।
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