Tarun Tejpal Surrender : तरुण तेजपाल ने रेप केस में किया सरेंडर, सुप्रीम कोर्ट की मोहलत हुई खत्म

2013 के रेप केस में दोषी ठहराए गए तरुण तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद गोवा की मापुसा अदालत में सरेंडर कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें निर्धारित अवधि में आत्मसमर्पण का निर्देश दिया था। अब उनकी 10 साल की सजा के खिलाफ अपील पर आगे की सुनवाई होगी।

Tarun Tejpal Surrender

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 14, 2026

Tarun Tejpal Surrender : तहलका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल ने 2013 के दुष्कर्म मामले में सोमवार को गोवा की मापुसा अदालत के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। उनका यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सामने आया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया था कि बॉम्बे हाईकोर्ट के दोषसिद्धि वाले फैसले के खिलाफ दाखिल उनकी अपील पर सुनवाई से पहले तेजपाल को सरेंडर करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने सरेंडर से राहत देने की उनकी याचिका खारिज कर तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था।

महिला पत्रकार ने लगाया था यौन उत्पीड़न का आरोप

यह मामला नवंबर 2013 का है। एक महिला पत्रकार ने तरुण तेजपाल पर आरोप लगाया था कि 7 और 8 नवंबर 2013 को गोवा के एक होटल की लिफ्ट के भीतर उनका यौन उत्पीड़न किया गया। आरोप सामने आने के बाद पुलिस ने 30 नवंबर 2013 को तेजपाल को गिरफ्तार किया था। मामले की सुनवाई के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया और सजा सुनाई। इसी फैसले को तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

सरेंडर से पहले अपील पर सुनवाई की मांग

तरुण तेजपाल ने शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल कर आत्मसमर्पण से छूट देने का अनुरोध किया था। उनका तर्क था कि उनकी आपराधिक अपील को पहले सूचीबद्ध कर उस पर सुनवाई की जानी चाहिए और इसके बाद सरेंडर की आवश्यकता पर फैसला होना चाहिए। तेजपाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि उपयुक्त परिस्थितियों में अदालत के पास सरेंडर की अनिवार्यता से राहत देने का अधिकार मौजूद है।

कपिल सिब्बल ने अदालत के अधिकार का दिया हवाला

सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा था कि किसी आरोपी के आत्मसमर्पण से पहले भी उसकी आपराधिक अपील को सूचीबद्ध किया जा सकता है। उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले का भी उल्लेख किया, जिसके जरिए तेजपाल की पहले की स्थिति बदल गई थी। सिब्बल का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट को अपील के गुण-दोष पर विचार करना चाहिए और मामले की सुनवाई आगे बढ़ाई जानी चाहिए।

तुषार मेहता
तुषार मेहता

गोवा सरकार ने सरेंडर में राहत का किया विरोध

गोवा सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तेजपाल की सरेंडर से छूट की मांग का विरोध किया। उन्होंने अदालत से कहा कि इस आवेदन पर विचार करते समय मामले की गंभीरता और उसके गुण-दोष को ध्यान में रखा जाना चाहिए। मेहता ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए बताया कि तेजपाल को दुष्कर्म के मामले में 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने सीमित मुद्दे पर सुनी दलीलें

जस्टिस आलोक अराधे की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि फिलहाल अदालत केवल सरेंडर से छूट के सवाल पर विचार कर रही है। अदालत ने यह भी कहा कि उसने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले का अध्ययन किया है। इसके साथ ही दोनों पक्षों को निर्देश दिया गया कि वे अपनी दलीलों को केवल आत्मसमर्पण से राहत दिए जाने के मुद्दे तक सीमित रखें और अपील के मूल गुण-दोष पर इस चरण में विस्तार से बहस न करें।

तीन सप्ताह का समय मांगने के बाद आदेश

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तेजपाल की ओर से पूछा था कि उन्हें आत्मसमर्पण करने के लिए कितना समय चाहिए। उनकी ओर से तीन सप्ताह का वक्त मांगा गया था। इसके बाद अदालत ने सरेंडर से छूट वाली याचिका खारिज कर दी। साथ ही तेजपाल को तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने और इसका प्रमाण अदालत के समक्ष दाखिल करने का निर्देश दिया गया।

22 सितंबर को अपील सूचीबद्ध होने की संभावना

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि तेजपाल के सरेंडर प्रमाण पत्र दाखिल करने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ उनकी आपराधिक अपील को 22 सितंबर को सूचीबद्ध किया जा सकता है। अब सोमवार को मापुसा अदालत के सामने आत्मसमर्पण करने के बाद अपील की सुनवाई के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने का रास्ता साफ हो गया है। तेजपाल की अपील पर अब सुप्रीम कोर्ट में आगे की कार्यवाही होने की संभावना है।

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