UP Election 2027: कभी प्रेमलता का दबदबा, अब नीलिमा की बादशाहत, 2027 में किसकी बारी?

कल्याणपुर विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास प्रेमलता कटियार की लगातार पांच जीत, 2007 की 674 वोटों वाली कांटे की टक्कर और 2012 की हार से जुड़ा है। इसके बाद नीलिमा कटियार ने राजनीतिक विरासत संभाली और 2022 में सपा को 21,535 वोटों से हराया। अब 2027 में सीट का सियासी समीकरण फिर चर्चा में है।

UP Chunav 2027

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

सितम्बर 14, 2026

UP Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं। कानपुर की कल्याणपुर विधानसभा सीट भी उन सीटों में शामिल है, जहां चुनावी इतिहास लंबे समय तक एक ही राजनीतिक परिवार के इर्द-गिर्द घूमता रहा है। इस सीट के चुनावी इतिहास में भाजपा की वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रेमलता कटियार का नाम सबसे प्रमुखता से सामने आता है। लगातार पांच बार विधायक रहीं प्रेमलता कटियार ने इस सीट पर लंबे समय तक भाजपा का मजबूत आधार तैयार किया। हालांकि, उनके चुनावी सफर में जीत के साथ-साथ हार का अध्याय भी बेहद दिलचस्प रहा।

पनकी हनुमान मंदिर से बदला सीट का भूगोल

बताते चले कि, कानपुर का पनकी हनुमान मंदिर लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र रहा है। कभी यह मंदिर कल्याणपुर विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा हुआ करता था। चुनावों के दौरान यहां प्रत्याशियों की आवाजाही भी देखने को मिलती थी। उम्मीदवार प्रचार अभियान के दौरान मंदिर की चौखट तक पहुंचते और संकट मोचन के सामने माथा टेककर जीत का आशीर्वाद लेते थे।

कल्याणपुर में ऐसा रहा प्रेमलता कटियार का राजनीतिक सफर

कानपुर की कल्याणपुर विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास कई उतार-चढ़ावों से भरा रहा है। यह वही सीट है, जहां भाजपा की वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रेमलता कटियार ने लंबे समय तक अपना राजनीतिक दबदबा कायम रखा। उनके सामने कई बार मुकाबला बदला, प्रत्याशी बदले और चुनावी समीकरण बदले, लेकिन एक दौर में कल्याणपुर की राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा प्रेमलता कटियार ही रहीं। दिलचस्प बात यह है कि उनके चुनावी सफर की शुरुआत हार से हुई और लंबे समय तक लगातार जीत दर्ज करने के बाद उनके राजनीतिक जीवन की आखिरी विधानसभा हार भी इसी सीट पर हुई।

मां से बेटी के हाथ कल्याणपुर की कमान

इसके बाद उनकी बेटी नीलिमा कटियार ने इसी सीट से राजनीतिक विरासत संभाली और भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर विधायक बनीं। 2022 में भी नीलिमा कटियार ने सपा के सतीश कुमार निगम को बड़े अंतर से हराकर सीट पर भाजपा का कब्जा बरकरार रखा।

परिसीमन का टर्निंग पॉइंट

आपको बता दे कि, 2012 के परिसीमन ने कल्याणपुर विधानसभा क्षेत्र का भूगोल बदल दिया। पनकी क्षेत्र नए बने गोविंदनगर विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा हो गया। इसके साथ ही कल्याणपुर की राजनीतिक सीमा और चुनावी समीकरण भी बदल गए। इसी 2012 के चुनाव में कल्याणपुर की राजनीति में वह बदलाव आया, जिसने लंबे समय से इस सीट पर प्रभाव रखने वाली प्रेमलता कटियार के विजय अभियान को रोक दिया।

प्रेमलता कटियार: हार से शुरुआत, फिर लगातार पांच जीत

कल्याणपुर विधानसभा सीट से प्रेमलता कटियार के चुनावी सफर की शुरुआत वर्ष 1989 में हुई थी। अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में उन्हें जनता दल के भूधर नारायण मिश्रा के हाथों हार का सामना करना पड़ा। लेकिन इसके बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई। 1991 से प्रेमलता कटियार की जीत का सिलसिला शुरू हुआ और उन्होंने लगातार पांच विधानसभा चुनाव जीते। 1991 के बाद 1993, 1996, 2002 और 2007 में उन्होंने जीत दर्ज की।

प्रेमलता कटियार का चुनावी सफर

वर्षपरिणाम/मुख्य प्रतिद्वंद्वीस्थिति
1989जनता दल के भूधर नारायण मिश्राहार
1991भाजपाजीत
1993कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफजीत
1996कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफजीत
2002कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफजीत
2007बसपा के निर्मल तिवारी674 वोट से जीत
2012सपा के सतीश निगम2,383 वोट से हार

1993 का चुनाव प्रेमलता कटियार के लिए खास रहा। उन्होंने करीब 35,791 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। इसके बाद 1996 और 2002 में भी उनका प्रभाव कायम रहा।

यानी 1991 से 2007 तक कल्याणपुर विधानसभा सीट पर प्रेमलता कटियार का राजनीतिक प्रभाव लगातार मजबूत होता गया।

2007 में कांटे का मुकाबला, महज 674 वोटों से जीतीं

वर्ष 2007 का विधानसभा चुनाव प्रेमलता कटियार के राजनीतिक सफर का सबसे कठिन चुनाव माना जाता है। इस चुनाव में बसपा के निर्मल तिवारी ने उन्हें कड़ी चुनौती दी। शुरुआत में निर्मल तिवारी को मुख्य मुकाबले का बड़ा दावेदार नहीं माना जा रहा था, लेकिन मतगणना शुरू होते ही चुनावी तस्वीर बदलने लगी। जैसे-जैसे मतगणना के राउंड आगे बढ़े, मुकाबला बेहद करीबी होता गया।

कई चरणों में निर्मल तिवारी बढ़त बनाने में सफल रहे और कुछ मौकों पर वह पहले स्थान पर भी पहुंच गए। इससे भाजपा खेमे में बेचैनी बढ़ी। हर राउंड के साथ मुकाबला और रोमांचक होता गया। आखिरकार अंतिम नतीजे में प्रेमलता कटियार ने सिर्फ 674 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। लेकिन यही जीत उनके चुनावी सफर की आखिरी जीत साबित हुई।

2012 में सपा ने पलट दिया पूरा समीकरण

वर्ष 2012 में परिसीमन के बाद बदले क्षेत्रीय समीकरणों के बीच कल्याणपुर में समाजवादी पार्टी ने बड़ा उलटफेर किया। सपा के सतीश निगम ने भाजपा की प्रेमलता कटियार को 2,383 वोटों से हरा दिया।

इस हार के साथ कल्याणपुर में प्रेमलता कटियार का लगातार जीत का सिलसिला टूट गया। दिलचस्प यह भी है कि उनके राजनीतिक जीवन की पहली विधानसभा हार 1989 में हुई थी और आखिरी विधानसभा हार 2012 में। दोनों ही बार कल्याणपुर की जनता ने उन्हें विपक्ष में बैठाया।

बेटी नीलिमा कटियार ने संभाली राजनीतिक विरासत

2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कल्याणपुर से प्रेमलता कटियार की बेटी नीलिमा कटियार को मैदान में उतारा। नीलिमा ने चुनाव जीतकर अपनी मां की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया। इस जीत के साथ भाजपा ने एक बार फिर कल्याणपुर सीट पर कब्जा कर लिया। बाद में नीलिमा कटियार प्रदेश सरकार में उच्च शिक्षा राज्यमंत्री भी बनीं।इस तरह कल्याणपुर में प्रेमलता कटियार के बाद उनकी बेटी का राजनीतिक सफर शुरू हुआ और सीट पर परिवार का प्रभाव बरकरार रहा।

आठ चुनावों में सात बार कटियार परिवार को टिकट

कल्याणपुर की राजनीति में कटियार परिवार के प्रभाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि लगातार कई चुनावों तक भाजपा ने इसी परिवार पर भरोसा जताया। उपलब्ध चुनावी इतिहास के मुताबिक पिछले आठ विधानसभा चुनावों में भाजपा ने सात बार प्रेमलता कटियार को टिकट दिया, जबकि 2017 में उनकी बेटी नीलिमा कटियार को उम्मीदवार बनाया गया।

यह आंकड़ा बताता है कि कल्याणपुर सिर्फ भाजपा के लिए एक मजबूत सीट नहीं रही, बल्कि पार्टी ने यहां लंबे समय तक कटियार परिवार को ही अपना प्रमुख चेहरा बनाए रखा।

2022 में फिर नीलिमा कटियार का दबदबा

2022 के विधानसभा चुनाव में कल्याणपुर सीट पर एक बार फिर भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला।

भाजपा की नीलिमा कटियार को कुल 98,997 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के सतीश कुमार निगम को 77,462 वोट प्राप्त हुए।

नीलिमा कटियार ने सतीश कुमार निगम को 21,535 वोटों के अंतर से हराया।

2022 का चुनाव परिणाम

प्रत्याशीपार्टीवोटस्थान
नीलिमा कटियारभाजपा98,997विजेता
सतीश कुमार निगमसपा77,462दूसरा
अरुण मिश्राबसपा6,615तीसरा
अशोक कुमार कालियाकांग्रेसकांग्रेसचौथा

इस चुनाव में भाजपा और सपा के बीच मुकाबला मुख्य रूप से दो ध्रुवों पर केंद्रित रहा। बसपा और कांग्रेस के उम्मीदवार काफी पीछे रहे।

नीलिमा कटियार की जीत का अंतर 21,535 वोट रहा, जो उनके पक्ष में मजबूत जनसमर्थन का संकेत देता है। वहीं सतीश कुमार निगम के लिए यह हार इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि वह पहले 2012 में प्रेमलता कटियार को हराकर इस सीट पर सपा को जीत दिला चुके थे।

कल्याणपुर सीट: आंकड़ों में

तथ्यविवरण
विधानसभा सीटकल्याणपुर
सीट नंबर211
राज्यउत्तर प्रदेश
विधानसभा सीटें403
2022 विजेतानीलिमा कटियार
विजेता पार्टीभाजपा
2022 में भाजपा वोट98,997
2022 में सपा वोट77,462
जीत का अंतर21,535 वोट
2022 में बसपातीसरा स्थान
2022 में कांग्रेसचौथा स्थान
मतदाताओं की संख्या3,49,567

शिक्षा और शोध संस्थानों का बड़ा केंद्र

कल्याणपुर विधानसभा क्षेत्र की पहचान केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं है। यह कानपुर का ऐसा इलाका है जहां देश और प्रदेश की कई महत्वपूर्ण शैक्षणिक एवं शोध संस्थाएं मौजूद हैं।क्षेत्र में आईआईटी कानपुर, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, एचबीटीयू, गणेश शंकर विद्यार्थी स्मारक मेडिकल कॉलेज, राजकीय होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज, दलहन अनुसंधान संस्थान और राष्ट्रीय शर्करा संस्थान जैसी संस्थाएं स्थित हैं।

इस वजह से कल्याणपुर की राजनीतिक अहमियत सिर्फ मतदाताओं की संख्या या चुनावी समीकरणों तक सीमित नहीं है। यह क्षेत्र कानपुर के शिक्षा और शोध तंत्र का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।

स्वास्थ्य सेवाओं में भी अहम भूमिका

कल्याणपुर विधानसभा क्षेत्र में लाला लाजपत राय अस्पताल और उससे जुड़े अन्य स्वास्थ्य संस्थान भी मौजूद हैं। यह अस्पताल कानपुर के साथ-साथ आसपास के जिलों के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र रहा है।कोविड महामारी के दौरान भी अस्पताल की भूमिका महत्वपूर्ण रही। इसके अलावा क्षेत्र में इससे जुड़े कई अन्य अस्पताल और चिकित्सा संस्थान हैं, जिससे कल्याणपुर कानपुर के बड़े स्वास्थ्य केंद्रों में शामिल हो जाता है।

कानपुर प्राणि उद्यान से अटल घाट तक

कल्याणपुर क्षेत्र में शिक्षा और स्वास्थ्य के साथ पर्यटन की भी अपनी पहचान है। कानपुर प्राणि उद्यान और विकसित किया गया अटल घाट क्षेत्र के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं। परिवहन की दृष्टि से भी यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है। कल्याणपुर और रावतपुर रेलवे स्टेशन यहां की कनेक्टिविटी को मजबूत करते हैं।इस तरह एक ही विधानसभा क्षेत्र में बड़े शिक्षण संस्थान, शोध केंद्र, मेडिकल संस्थान, अस्पताल, पर्यटन स्थल और रेलवे कनेक्टिविटी मौजूद है।

2027 में क्या होगा कल्याणपुर का सियासी समीकरण?

कल्याणपुर का इतिहास बताता है कि यहां जीत किसी एक दल या परिवार की स्थायी गारंटी नहीं रही है। अब नजर 2027 के विधानसभा चुनाव पर है। भाजपा जहां अपने पुराने प्रभाव को बरकरार रखने की कोशिश करेगी, वहीं समाजवादी पार्टी 2012 की जीत को आधार बनाकर दोबारा मजबूत वापसी की रणनीति बना सकती है। बसपा और कांग्रेस भी अपने सामाजिक आधार को मजबूत करने की कोशिश करेंगी।

कल्याणपुर में विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था, स्थानीय समस्याएं और जातीय-सामाजिक समीकरण चुनावी मुद्दों को प्रभावित कर सकते हैं। इसके साथ ही बड़ी संख्या में युवा और शिक्षित मतदाता भी इस सीट के चुनावी रुख को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण वर्ग हैं।